13
Jan
माँ महा मैत्रायणी योगिनी जी का निर्वाण दिवस मनाया गया पड़ाव, वाराणसी/ हमलोगों का आचरण-व्यवहार हर जगह बदलता रहता है। जैसा व्यवहार-आचरण हमलोग यहाँ या अपने दूसरे आश्रम में करते हैं, जैसा बात-विचार यहाँ करते हैं, यहाँ से जाने के बाद हमारा आचरण-व्यवहार, विचार, भावनाएं आदि दूसरी हो जाती हैं। जीवन के बहुत से ऐसे भटकाव हैं, आकर्षण हैं, जिनको रोकने के लिए कहा गया है। पूज्य बाबा जी ने कहा कि शिक्षा बहुत आवश्यक है- आगे बढ़ाने के लिए, राष्ट्र-समाज को दिशा देने के लिए, आगे बढ़ाने के लिए। लेकिन इसमें अपवाद भी है, क्योंकि कई लोग शिक्षा लेकर ऊटपटांग…
