LITERATURE

आस्था, राष्ट्रभाव और प्रकृति चेतना की काव्य-प्रतिध्वनि: स्मृति श्रीवास्तव का ‘अन्तर्ध्वनि’

आस्था, राष्ट्रभाव और प्रकृति चेतना की काव्य-प्रतिध्वनि: स्मृति श्रीवास्तव का ‘अन्तर्ध्वनि’

समीक्षक: उमेश कुमार सिंह डायमंड पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित स्मृति श्रीवास्तव का तृतीय काव्य संग्रह “अन्तर्ध्वनि” समकालीन हिंदी काव्यधारा में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में उभरता है। हिंदी साहित्य में एम.ए. उपाधि प्राप्त करने के उपरांत लेखिका ने अपना जीवन हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों के संवर्धन को समर्पित किया है। नई दिल्ली के सेंट थॉमस स्कूल में दो दशकों तक हिंदी एवं संस्कृत का अध्यापन, दिल्ली विश्वविद्यालय के नेत्रहीन विद्यार्थियों के लिए दुर्लभ ग्रंथों का वाचन-रिकॉर्डिंग तथा वंचित महिलाओं के लिए सामाजिक सक्रियता—इन सभी अनुभवों की गहन मानवीय संवेदना इस कृति की पंक्तियों में स्पष्ट रूप…
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सूर्यकांत त्रिपाठी निराला: महाप्राण कवि, जिन्होंने समय को अपनी धारा में बहाया

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला: महाप्राण कवि, जिन्होंने समय को अपनी धारा में बहाया

21 फरवरी सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के जन्मदिवस पर विशेष -      - सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"       बसंत पंचमी संकेत है बसंत के पर्दापण का, मां सरस्वती की पूजा अर्चना का, और उस महान कवि सिरमौर के जन्म स्मरण का, जिसे अपने अद्भूत व्यक्तित्व के कारण "निराला" उपनाम को धारण किया। इनका पूरा नाम सूर्यकांत त्रिपाठी निराला था। इनका जन्म 1896 को बसंत पंचमी के ही दिन पश्चिम बंगाल के महिषादल में हुआ था।      निराला, छायावादी कवि के रूप में विख्यात हैं, किन्तु गद्य क्षेत्र में भी निराला की उतनी ही पकड़ थी ,इसीलिये यहां भी इनकी उतनी ही प्रसिद्धि हैं। इन्होंने गद्य की प्रायः सभी…
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मातृभाषा के सम्मान का संकल्प: भाषाई पूर्वाग्रह त्यागकर समावेशिता की ओर

मातृभाषा के सम्मान का संकल्प: भाषाई पूर्वाग्रह त्यागकर समावेशिता की ओर

21 फरवरी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर विशेष - सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"  ‌‌‌         प्रतिवर्ष 21 फरवरी के दिन अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य है कि विश्व में भाषायी एवं सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषिता को बढ़ावा मिले। मातृभाषा के महत्ता  इसी  बानगी में देखिए की मातृभाषा के लिए एक देश के दो टुकड़े हो गए। जब हमारा देश आजाद हुआ तब पाकिस्तान दो भागों में विभक्त था एक पूर्वी पाकिस्तान और दूसरा पश्चिमी पाकिस्तान। आज जो बांग्लादेश के रूप में स्वतंत्र देश के रूप में जाना जाता है वही पूर्वी पाकिस्तान कहलाता था और बांग्ला भाषा यानी मातृभाषा…
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आस्था, दर्शन और शोध का समन्वय: ‘सुन्दरकाण्ड रहस्य मीमांसा’ की गहन पड़ताल

आस्था, दर्शन और शोध का समन्वय: ‘सुन्दरकाण्ड रहस्य मीमांसा’ की गहन पड़ताल

पुस्तक समीक्षा : सुन्दरकाण्ड रहस्य मीमांसा : आध्यात्मिक एवं दार्शनिक विवेचना समीक्षक: उमेश कुमार सिंह भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में श्रीरामचरितमानस केवल एक काव्यग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन का व्यापक विधान है। इसके पंचम सोपान ‘सुन्दरकाण्ड’ को सदियों से विशेष महत्त्व प्राप्त है, क्योंकि इसमें भक्ति, साहस, विवेक और आत्मसमर्पण का अद्वितीय संगम दिखाई देता है। इसी सुन्दरकाण्ड को केंद्र में रखकर लेखक आनन्द सिंह ने ‘सुन्दरकाण्ड रहस्य मीमांसा : आध्यात्मिक एवं दार्शनिक विवेचना’ के माध्यम से एक गहन शोधपरक और तात्त्विक व्याख्या प्रस्तुत की है। यह कृति केवल कथा-प्रस्तुति नहीं, बल्कि भाव, दर्शन और आध्यात्मिक संकेतों का सूक्ष्म विश्लेषण है। लेखक की पूर्व प्रकाशित कृतियाँ—‘प्रवाह’, ‘मानस-गंगाः-श्रीहनुमानचालीसा-चालीसा में मानस’ तथा ‘मानस-गंगाः-श्रीहनुमानचालीसा-एक आध्यात्मिक एवं दार्शनिक…
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डायमंड वार्षिक राशिफल 2026 : ज्योतिष, काल-विज्ञान और समकालीन विश्व का दर्पण

डायमंड वार्षिक राशिफल 2026 : ज्योतिष, काल-विज्ञान और समकालीन विश्व का दर्पण

पुस्तक समीक्षा : समय, समाज और संसार का ज्योतिषीय दर्पण उमेश कुमार सिंह भारतीय ज्योतिष साहित्य की समृद्ध परंपरा में “डायमंड वार्षिक राशिफल 2026” एक ऐसी कृति के रूप में सामने आती है, जो केवल भविष्यकथन तक सीमित न रहकर समय, समाज, राष्ट्र और विश्व की समग्र चेतना को स्पर्श करती है। पं. रमेश भोजराज द्विवेदी द्वारा रचित यह ग्रंथ ज्योतिष को एक जीवंत, गतिशील और कर्मप्रधान विज्ञान के रूप में प्रस्तुत करता है। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो ज्योतिष को अंधविश्वास नहीं, बल्कि काल-विज्ञान और जीवन-दर्शन के रूप में समझना चाहते हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित डायमंड वार्षिक राशिफल 2026 जिसके लेखक पं. रमेश…
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पुस्तक समीक्षा : अर्घ्य दान की तृप्ति’: समाज-संवाद की चिंतनशील कृति

पुस्तक समीक्षा : अर्घ्य दान की तृप्ति’: समाज-संवाद की चिंतनशील कृति

‘व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र की ओर विचार-यात्रा   उमेश कुमार सिंह डॉ. सुजाता दास 'मीठी' द्वारा रचित ‘अर्घ्य दान की तृप्ति’ लेखिका के भाव, विचार और वैचारिक प्रतिबद्धता का अनूठा संग्रह है। यह मात्र लेखों का संकलन नहीं है, बल्कि यह मनुष्य और समाज के बीच प्रवाहित उन संवेदनाओं का अभिलेख है जो सामान्यतः हमारे दैनिक अनुभवों में होती तो हैं, मगर अभिव्यक्ति की प्रतीक्षा में दबकर रह जाती हैं। इस कृति में लेखिका ने अपने विचारों को पाठकों तक उसी प्रकार पहुंचाया है, जैसे सूर्य अर्घ्य दान से तृप्त होता है—मन की पूर्णता, कृतज्ञता और शांत संतुष्टि के साथ। डायमंड पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित पुस्तक अर्घ्य दान…
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कविता है तो हम हैं, कविता के बिना ज़िंदगी अधूरी – बालस्वरूप राही

कविता है तो हम हैं, कविता के बिना ज़िंदगी अधूरी – बालस्वरूप राही

आज का बच्चा किताब के साथ-साथ मोबाइल और कम्प्यूटर की दुनिया में भी जीता है समीक्षक : उमेश कुमार सिंह बाल साहित्य के क्षेत्र में बालस्वरूप राही एक ऐसा नाम है, जिसने अपनी सादगी, संवेदनशीलता और काव्य-संपन्नता से बच्चों के मन में विशेष स्थान बनाया है। उनकी रचनाएँ न केवल बालमन को आनंदित करती हैं, बल्कि उनमें जीवन-मूल्यों, संस्कारों और ज्ञान के प्रति सम्मान की झलक भी मिलती है। डायमंड पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित पुस्तक “हम छोड़ेंगे नहीं किताब” बालस्वरूप राही की रचित बाल कविताओं का संग्रह है, जो आधुनिक युग के बच्चों को साहित्य से जोड़ने का सशक्त प्रयास है। पुस्तक : हम छोड़ेंगे नहीं किताब लेखक: बालस्वरूप राही लेखक स्वयं…
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आम आदमी के साथ थे मुंशी प्रेमचंद……

आम आदमी के साथ थे मुंशी प्रेमचंद……

भोलानाथ मिश्र, पत्रकार कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानियां 31 जुलाई, 2025, को उनकी 145वीं जयंती पर भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी उस समय थीं जब इन्हें लिखा गया था। 31 जुलाई, 1880 ई. को उत्तर प्रदेश में वाराणसी के निकट लमही गांव में जन्में अमर कथाकार प्रेमचंद हिन्दी-उर्दू कथा साहित्य की कर्मभूमि बदलकर, यथार्थवादी काया-कल्प करने वाले एक ऐसे कथा शिल्पी हैं, जो आम आदमी के साथ थे। उनकी कहानियों के पात्र आजादी के अमृतकाल में भी स्थान-स्थान पर देखे जा सकते हैं। धनपत राय श्रीवास्तव 8 अक्टूबर, 1936 को इस संसार से तो विदा हो गए, लेकिन करीब…
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एक राष्ट्र -एक चुनाव से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत होगी – केशव प्रसाद मौर्य 

एक राष्ट्र -एक चुनाव से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत होगी – केशव प्रसाद मौर्य 

 लखनऊ / उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि एक राष्ट्र- एक चुनाव से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। एक राष्ट्र -एक चुनाव से आर्थिक बचत, प्रशासनिक दक्षता व राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव के कारण प्रशासनिक कार्यों में व्यवधान और नीतिगत निर्णय में देरी होती है ।एक साथ चुनाव करने से यह समस्या दूर होगी। चुनाव में होने वाले खर्च में कमी आएगी ,जिससे जो खर्च बचत आएगी, वह अन्य विकास कार्यों में लगाई जा सकेगी ।श्री केशव प्रसाद मौर्य शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के…
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आधुनिक हिंदी साहित्य की महान विभूति महादेवी वर्मा

आधुनिक हिंदी साहित्य की महान विभूति महादेवी वर्मा

26 मार्च महादेवी वर्मा जयंती पर विशेष-      -- सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"  "हिन्दी के विशाल मंदिर की वीणापाणी,स्फूर्ति-घेतना रचना की प्रतिभा कल्याणी"कवि शिरोमणि निराला ने कभी महादेवी वर्मा कवयित्री के व्यक्तित्व को उक्त पंक्तियों से समझने की कोशिश की थी। एक जापानी कवि नागूची ने कहा था कि- "महादेवी प्रयाग की गंगा है।" आधुनिक हिन्दी साहित्य की जिन छह महान विभूतियों ने निर्विवाद रूप में अमरता प्राप्त कर ली है, उनमें महादेवी का स्थान विशिष्ट है। अन्य पांच विभूतियां हैं- भारतेंदू, मैथिलीशरण, जयशंकर प्रसाद, निराला और सुमित्रा नंदन पंत। महादेवी में छायावादी कविता को एक गति वेग दिया, उसकी श्रृंगार-भावना को सौम्य और सौदर्य चेतना…
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