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राष्ट्रीय मतदाता दिवस : लोकतंत्र की शक्ति और मताधिकार का महत्व

राष्ट्रीय मतदाता दिवस : लोकतंत्र की शक्ति और मताधिकार का महत्व

(‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’, 25 जनवरी 2026 पर विशेष आलेख) भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिवस देश के हर नागरिक के लिए अत्यंत अहम है। यह दिन देशवासियों के लिये केवल एक औपचारिक दिन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को स्मरण करने का अवसर है। इस दिन देश के प्रत्येक नागरिक को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह राष्ट्र के प्रत्येक चुनाव में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा, क्योंकि हर एक वोट देश के भविष्य की नींव रखता है। कहा जाये तो वास्तव में, प्रत्येक मतदाता का मत ही राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया…
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कल्याण सिंह: हिमालय-सा विराट व्यक्तित्व, रामभक्त नेता

कल्याण सिंह: हिमालय-सा विराट व्यक्तित्व, रामभक्त नेता

(कल्याण सिंह जी की 94वीं जन्म-जयंती 05 जनवरी 2026 पर विशेष आलेख) भारतीय राजनीति के युगपुरुष, श्रेष्ठ राजनीतिज्ञ, कोमलहृदय संवेदनशील मनुष्य, वज्रबाहु राष्ट्रप्रहरी, भारतमाता के सच्चे सपूत तथा भारतीय राजनीति में भगवान श्रीरामचन्द्र जी के हनुमान कहे जाने वाले हिन्दू हृदय सम्राट कल्याण सिंह उन विरल नेताओं में थे, जिन्होंने भारतीय राजनीति में अनेक ऐतिहासिक मिसालें प्रस्तुत कीं। उनका राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन सदैव निष्कलंक, सिद्धांतनिष्ठ और प्रेरणास्पद रहा। कुशल प्रशासन, दृढ़ निर्णय क्षमता और जनहित के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता की मिसालें तब तक दी जाती रहेंगी, जब तक यह संसार रहेगा। कल्याण सिंह ने राजनीति को सत्ता नहीं,…
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नया वर्षः आत्ममंथन, संकल्प और मोदी सरकार की अग्नि-परीक्षा

नया वर्षः आत्ममंथन, संकल्प और मोदी सरकार की अग्नि-परीक्षा

(नववर्ष 2026 पर विशेष आलेख) नया साल एक नए सवेरे की तरह  है, जो हर वर्ष एक बार आता है और अपने साथ नई शुरुआत की संभावनाएँ लेकर आता है। समय के साथ वह अपने चरम पर पहुँचता है और फिर धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है। यही क्रम एक निरंतर अनुभव है, जिसे इस संसार का प्रत्येक व्यक्ति अनुभव करता है। यह निरंतरता ही प्रकृति और जीवन का परम सत्य है। नए वर्ष की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति को पिछले साल के निरंतर प्रवाह और अनुभवों से सीख लेकर अच्छे कार्यों से करनी चाहिए। यह समय आत्मचिंतन का होता है, जब…
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जेलों में निरूद्ध नौनिहालों का भविष्य क्या…? 

जेलों में निरूद्ध नौनिहालों का भविष्य क्या…? 

 - सुरेश सिंह बैस "शाश्वत" भारत में जेलों में पल रहे नौनिहालों का भविष्य वाकई में गंभीर संकटों से घिरा हुआ है। ऐसे बच्चों के जीवन और व्यक्तित्व के विकास की संभावना जेल की दीवारों के भीतर लगभग अवरुद्ध हो जाती है, जिससे उनका बचपन अंधकारमय हो जाता है। छत्तीसगढ़ जब मध्य प्रदेश के अंतर्गत आता था तब मैंने भी बंदी कल्याणारार्थ  किरण परियोजना के अंतर्गत बिलासपुर जेल में कई वर्ष कार्य किया था। जिसके तहत बंदी कल्याण के सभी कार्यों को करने की जिम्मेदारी थी। चाहे वह कानूनी हो पुनर्वास और शिक्षा हो या अन्य मानवीय समस्याओं का समाधान हो। यह बहुत…
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“अटल बिहारी वाजपेयी: विचार, व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण की अमर गाथा”

“अटल बिहारी वाजपेयी: विचार, व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण की अमर गाथा”

(युगपुरुष अटल बिहारी वाजपेयी जी की 101वीं जयंती 25 दिसम्बर 2025 पर विशेष आलेख) भारत माँ के सच्चे सपूत, राष्ट्रपुरुष, राष्ट्रमार्गदर्शक और निष्ठावान देशभक्त-भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी को न जाने कितनी उपाधियों से अलंकृत किया गया, और वे इन सभी उपाधियों के वास्तविक अर्थ भी थे। किंतु इन सबसे बढ़कर वे एक अत्यंत संवेदनशील, सरल और श्रेष्ठ इंसान थे। उन्होंने जमीन से जुड़े रहकर राजनीति की और ‘जनता के प्रधानमंत्री’ के रूप में जन-जन के हृदय में अपनी विशेष जगह बनाई। अटल बिहारी वाजपेयी जी का व्यक्तित्व ऐसा था जो बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों-सभी के बीच समान…
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भारत-रूस संबंधः विश्वास, सम्मान और दशकों पुराने भावनात्मक जुड़ाव की नींव”

भारत-रूस संबंधः विश्वास, सम्मान और दशकों पुराने भावनात्मक जुड़ाव की नींव”

(विशेष आलेख) भारत और रूस के द्विपक्षीय संबंध दशकों से अत्यंत गहरे, विश्वसनीय और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच की यह मित्रता केवल कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर एक-दूसरे के समर्थन और सहयोग के रूप में हमेशा मजबूती से प्रकट हुई है। रूस ने हमेशा भारत को अपना अत्यंत निकटतम और विश्वासपात्र मित्र माना है, वहीं भारत ने भी वैश्विक मंचों पर रूस के साथ अपनी पुरानी और मजबूत साझेदारी को निरंतर बनाए रखा है। विश्व राजनीति के विभिन्न दौरों और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच भी दोनों मित्र देशों…
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अक्षम सरकारों के विरुद्ध जेन जी का बढ़ता आक्रोश

अक्षम सरकारों के विरुद्ध जेन जी का बढ़ता आक्रोश

- सुरेश सिंह बैस विभिन्न देशों में बढ़ता जेन जी (Gen Z) का आक्रोश सरकारों की असफलता के लक्षण भी हैं और युवा पीढ़ी की जागरूक, व्यथित प्रतिक्रिया का परिचायक भी है। यह सिर्फ उच्च्श्रंखिल आक्रोश नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक असंतोष का परिणाम है। नेपाल में करीब 70 दिन पहले जेन जी के नेतृत्व में हुए उग्र प्रदर्शन ने पिछले प्रधानमंत्री ओली की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था, लेकिन ताजातरीन हालात बता रहे हैं कि नई अंतरिम सरकार के साथ भी जन असंतोष, गहरी निराशा और आंदोलन की भावना कम नहीं हुई है। जेन जी प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें भ्रस्ताचार खत्म करना, पारदर्शिता, जल्दी चुनाव, और संसद…
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लाखों भारतीय ट्रंप के एच1बी वीजा बम से सीधे प्रभावित होंगे….

लाखों भारतीय ट्रंप के एच1बी वीजा बम से सीधे प्रभावित होंगे….

ब्रह्मानंद राजपूत टैरिफ को लेकर मची खलबली के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने एच-1बी वीजा पर वार्षिक 1,00,000 डॉलर की नई फीस लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में जिस एग्जिक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किया है, उससे एच-1बी वीजा व्यवस्था में बड़े बदलाव आए हैं। अब से कोई भी व्यक्ति अमेरिका जाने के लिए एच-1बी वीजा के लिए आवेदन करेगा, तो उसके नियोक्ता को प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में 1 लाख डॉलर (करीब ₹83 लाख) का भुगतान करना होगा। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह…
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स्कूली बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य: एक सामूहिक जिम्मेदारी

स्कूली बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य: एक सामूहिक जिम्मेदारी

 डॉ. मनोज कुमार तिवारी , वरिष्ठ परामर्शदाता  एआरटीसी, एस एस हॉस्पिटल, आईएमएस, बीएचयू, वाराणसी  आज के दौर में स्कूली बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और उस पर ध्यान देना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। बच्चे हमारे समाज और राष्ट्र का भविष्य हैं, और एक स्वस्थ भविष्य की नींव उनके शारीरिक और मानसिक कल्याण पर ही टिकी होती है। जिस प्रकार हम उनके शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर सजग रहते हैं, उसी प्रकार उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी अनिवार्य है। बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य की चिंताजनक स्थिति आधुनिक जीवनशैली और प्रतिस्पर्धा के इस युग में बच्चे छोटी उम्र से ही कई तरह के दबावों…
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आम आदमी के साथ थे मुंशी प्रेमचंद……

आम आदमी के साथ थे मुंशी प्रेमचंद……

भोलानाथ मिश्र, पत्रकार कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानियां 31 जुलाई, 2025, को उनकी 145वीं जयंती पर भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी उस समय थीं जब इन्हें लिखा गया था। 31 जुलाई, 1880 ई. को उत्तर प्रदेश में वाराणसी के निकट लमही गांव में जन्में अमर कथाकार प्रेमचंद हिन्दी-उर्दू कथा साहित्य की कर्मभूमि बदलकर, यथार्थवादी काया-कल्प करने वाले एक ऐसे कथा शिल्पी हैं, जो आम आदमी के साथ थे। उनकी कहानियों के पात्र आजादी के अमृतकाल में भी स्थान-स्थान पर देखे जा सकते हैं। धनपत राय श्रीवास्तव 8 अक्टूबर, 1936 को इस संसार से तो विदा हो गए, लेकिन करीब…
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