19
Mar
(वीरांगना अवंतीबाई लोधी के 168वें बलिदान दिवस पर विशेष काव्य-रचना) मध्यभारत की पावन धरती पर आज भी ज्वाला जलती है प्रचंड, वीरों के रक्त से लिखी गाथाएँ करती हैं इतिहास को अनंत। सिवनी के मनकेहणी ग्राम में जन्मी वह वीरांगना अपार, जिसने बचपन से ही थाम लिया था शौर्य, साहस और तलवार। रानी अवंतीबाई लोधी नाम नहीं केवल, रण में दहकती हुई एक ज्वाला थी प्रखर, अन्याय के अंधकार में चमकती वह स्वाभिमान की अमर मशाल थी अमर। रामगढ़ की रानी बनकर जिसने प्रजा का मान बढ़ाया था, अन्याय के हर तूफान के आगे साहस से सिर उठाया था। जब…
