समकालीन व्यापार प्रथाओं में ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ सिद्धांत के पालन में बढ़ते क्षरण के प्रति चेतावनी

एमएफएन सिद्धांत के क्षरण को लेकर चेतावनी : एचएनएलयू अंतरराष्ट्रीय कोलोक्वियम में सीटीआईएल–आईआईएफटी के प्रमुख प्रो. जेम्स नेडुमपरा

NTPC

रायपुर | अंतरराष्ट्रीय कोलोक्वियम के मुख्य अतिथि, प्रो. जेम्स नेडुमपरा ने समकालीन व्यापार प्रथाओं में ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ (एमएफएन) सिद्धांत के पालन में बढ़ते क्षरण के प्रति चेतावनी दी। उन्होंने वैश्विक व्यापार के वर्तमान परिदृश्य में उभर रहे विभिन्न मुद्दों पर भी प्रकाश डाला।

कोलोक्वियम का उद्घाटन करते हुए प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन, कुलपति, एचएनएलयू ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के तीन दशकों के विकासक्रम का विश्लेषण करते हुए कहा कि प्राप्त उपलब्धियाँ निर्धारित संरचनात्मक लक्ष्यों के अनुरूप नहीं रहीं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत डब्ल्यूटीओ संबंधी विमर्श में सतर्कता की अवस्था से आगे बढ़कर केंद्रीय भूमिका में आ गया है।

हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एचएनएलयू), रायपुर ने अपने सेंटर फॉर डब्ल्यूटीओ एवं डब्ल्यूआईपीओ स्टडीज़, स्कूल ऑफ लॉ एंड टेक्नोलॉजी के माध्यम से, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के डब्ल्यूटीओ चेयर्स प्रोग्राम के अंतर्गत, डब्ल्यूटीओ यंग ट्रेड लीडर्स प्रोग्राम तथा सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ (सीटीआईएल), आईआईएफटी के सहयोग से “वैश्विक व्यापार में करियर, डब्ल्यूटीओ की 30-वर्षीय विरासत और भावी दिशाएँ” विषय पर एक दिवसीय प्री-समिट अंतरराष्ट्रीय कोलोक्वियम का सफलतापूर्वक आयोजन किया।

इस कार्यक्रम में अनेक प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने सहभागिता की, जिनमें प्रो. जेम्स नेडुमपरा, प्रमुख, सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ, आईआईएफटी; सुश्री अमीता वर्मा दुग्गल, संस्थापक भागीदार, डीजीएस एसोसिएट्स; तथा सुश्री आरुषि श्रीवास्तव, यंग ट्रेड लीडर (भारत), डब्ल्यूटीओ, एवं ग्लोबल काउंसल में औद्योगिक नीति विश्लेषक शामिल थीं।

उद्घाटन सत्र के संबोधनों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली से जुड़ी प्रमुख चिंताओं के साथ-साथ भावी मार्गों पर भी प्रकाश डाला गया। सुश्री आरुषि श्रीवास्तव ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार संस्थानों और नीति-निर्माण प्रक्रियाओं से प्रारंभिक चरण में जुड़ाव के महत्व पर बल दिया। वहीं, सुश्री अमीता वर्मा दुग्गल ने डब्ल्यूटीओ की संस्थागत दृढ़ता और उसकी निरंतर प्रासंगिकता को रेखांकित किया। इसके पश्चात सुश्री आरुषि श्रीवास्तव के साथ एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें डब्ल्यूटीओ यंग ट्रेड लीडर्स प्रोग्राम तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार, नीति और कूटनीति के क्षेत्र में उभरते व्यावसायिक अवसरों पर व्यावहारिक जानकारी साझा की गई।

कोलोक्वियम में आगे “वैश्विक व्यापार में करियर, डब्ल्यूटीओ का संस्थागत विकास एवं आगे की दिशा” विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। इस पैनल में डॉ. अंकित अवस्थी, प्रमुख, सेंटर फॉर डब्ल्यूटीओ एवं डब्ल्यूआईपीओ स्टडीज़, एसएलटी, एचएनएलयू ने डब्ल्यूटीओ के संस्थागत विकास पर विचार प्रस्तुत किए; सुश्री आरुषि श्रीवास्तव ने डब्ल्यूटीओ तथा वैश्विक व्यापार नीति संस्थानों में करियर मार्गों पर चर्चा की; तथा सुश्री अदिति वारियर, प्रिंसिपल एसोसिएट, डीजीएस एसोसिएट्स ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि के क्षेत्र में व्यावसायिक अवसरों—विशेषकर विधि फर्मों में करियर और उभरते अभ्यास क्षेत्रों—पर प्रकाश डाला। सत्र का समापन प्रश्न-उत्तर सत्र के साथ हुआ।

कार्यक्रम के दौरान कौटिल्य सोसाइटी, एचएनएलयू की द्वितीय लेखन प्रतियोगिता, 2025 के परिणामों की भी घोषणा की गई, जिसका आयोजन सेंटर फॉर डब्ल्यूटीओ एवं डब्ल्यूआईपीओ स्टडीज़, एसएलटी, एचएनएलयू तथा डीजीएस एसोसिएट्स, नई दिल्ली के सहयोग से किया गया था। कोलोक्वियम के अवसर पर Trade, Business & Sustainability नामक पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया गया। साथ ही 2–4 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाले प्रथम अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि शिखर सम्मेलन “The WTO@30: Reimagining Multilateralism in International Trade Law” की पुस्तिका का भी लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर इंटरनेशनल नेटवर्क फॉर ट्रेड एडवोकेसी, डेवलपमेंट एंड रिसर्च (IN-TADR) का शुभारंभ भी किया गया। डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव, कुलसचिव (प्रभारी), एचएनएलयू ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अंकित अवस्थी, डॉ. मयंक श्रीवास्तव, सुश्री उर्वी श्रीवास्तव और डॉ. अंकित सिंह द्वारा किया गया, जबकि छात्र समन्वयक कृतिका सेंटिल कुमार और संजना रामनाथ ने कार्यक्रम के सुचारु संचालन को सुनिश्चित किया।

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