राजा द्रुपद की पुत्री थी यज्ञसेनी जो पांडवों की पत्नी बनी 

राधा कृष्ण मंदिर में आयोजित श्री मद भागवत कथा में भक्तों को कथा का रसपान कराया राघव जी महाराज ने 

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अहरौरा, मिर्जापुर /नगर के सत्यांनगंज मोहल्ले में स्थित राधा कृष्ण मंदिर में आयोजित श्री मद भागवत कथा में कथा वाचक श्री श्री 108 महंत श्री राघव दास जी महाराज ने कहा की पितरों के मोक्ष के लिए श्रीमद् भागवत् कथा सुनना अत्यंत आवश्यक है। राघव जी महाराज ने भागवत कथा का रसपान कराते हुए अपने मुखारविंद से शुकदेव जी का आगमन, शुकदेव परीक्षित संवाद एवं द्रौपदी चरित्र का वर्णन किया गया। व्यास जी ने शुकदेव और परीक्षित का संवाद सुनाते हुए कहा कि राजा परीक्षित के मृत्युदंड के भय और उनके जीवन के अंतिम क्षणों पर केंद्रित है।

 जब राजा परीक्षित को पता चला कि उन्हें तक्षक नाग के डसने से सातवें दिन मरना है तो उन्होंने गंगा किनारे जाकर अनशन ब्रत लिया और सभी संतो का आशीर्वाद मांगा। इस स्थिति में  शुकदेव जी ने परीक्षित को भागवत कथा सुनाई।

व्यास जी ने द्रौपदी चरित्र का सार समझाते हुए कहा कि वह अत्यधिक सुंदर, बुद्धिमान और पति निष्ठा के साथ उनके प्रतिरोध की भावना और नारीत्व का प्रतीक होने में निहित है। वह राजा द्रुपद की पुत्री थीं, जो एक यज्ञ से उत्पन्न हुई थी इसलिए उन्हें *यज्ञसेनी* भी कहा जाता है । द्रौपदी पांचों पांडवों की पत्नी बनी और महाभारत युद्ध के लिए एक प्रमुख कारण साबित हुई।

 कथा का रसपान करने वालो में ज्योतिषाचार्य डा विजय शंकर मिश्र, राजकुमार केशरी, अशोक कुमार केशरी, संतोष केशरी, सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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