विजयानन्द का रचना धर्म प्रेरणादायक है – प्रो० लक्ष्मी अय्यर

मनोज पांडेय

NTPC

प्रयागराज। ब्रह्मसमाज सेवा समिति प्रतिष्ठानपुर प्रयागराज का होली मिलन एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह केंद्रीय विद्यापीठ हवेलिया के सभागार में संपन्न हुआ। श्रीलंका से पधारी मुख्य अतिथि सबरागामुवा विश्वविद्यालय की वरिष्ठ आचार्य डॉ०लक्ष्मी अय्यर ने कहा कि श्रीलंका में होली का चलन नहीं है किंतु तमिलनाडु में होली खूब मनाई जाती है। विजयानन्द की इस लोकार्पित पुस्तक में भारतीय संस्कृति एवं उत्सवों के कई आलेख हैं। उनका रचना धर्म प्रेरणादायक है। 

विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक डॉ०रामशंकर द्विवेदी ने बताया कि राम और कृष्ण होलिकोत्सव के मुख्य नायक हैं। ब्रह्मसमाज को एकता कायम रखते हुए ऐसे उत्सवों का आयोजन करते रहना चाहिए। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं संस्थाध्यक्ष डॉ०विजयानन्द ने कहा कि साहित्य, संस्कृति और समाज को नई दिशा देता है। होलिकादहन और प्रह्लाद की सफलता इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है। पहली बार हनुमान जी श्रीलंका गए थे, हमें भारत में आपसी एकता की जठराग्नि प्रज्वलित करने की जरूरत है। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण एवं डॉ०इंदु जौनपुरी की सरस्वती वंदना से हुआ। महामंत्री अभय नारायण तिवारी ने संस्था का विधिवत परिचय दिया। इसके उपरांत डॉ० विजयानन्द की कानपुर से प्रकाशित ८६वीं पुस्तक ” वैश्विक साहित्य एवं अन्य निबंध” का लोकार्पण किया गया। कुशल संचालन श्री रमेश त्रिपाठी वेश ने किया।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में हास्य कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। जिसमें सर्वश्री डॉ०विजयानन्द, नजर इलाहाबादी, ठाकुर इलाहाबादी, गंगा प्रसाद त्रिपाठी, संतोष शुक्ल समर्थ, डॉ० इंदु जौनपुरी, पुष्कर प्रधान आदि ने अपनी रोचक कविताओं से समा बांध दिया। सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से कई बार गूंज उठा। कुशल संचालन ठाकुर इलाहाबादी ने किया। कार्यक्रम में आचार्य सियाराम त्रिपाठी, डॉ० कमलेश कुमार मिश्र, सभापति तिवारी, चंद्रकरण तिवारी, कृष्णमोहन तिवारी, अवधनारायण मिश्र, कमलाकांत शुक्ल, ज्योतिशंकर चौबे, देवराज शुक्ल, ताराशंकर उपाध्याय, अशोक तिवारी, श्रीकांत शुक्ल, महेंद्रनाथ शुक्ल, प्रमोद कुमार त्रिपाठी, प्रभाकर द्विवेदी, शशिकांत पांडेय, बृजभूषण मिश्र, राजेश पांडेय, त्रिभुवन पांडेय आदि ने उपस्थित होकर कार्यक्रम को गौरवान्वित किया।

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