पीएम एफएमई योजना के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश, देश में अव्वल…

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में सूक्ष्म खाद्य उद्योगों को मिली नई गति

NTPC

2000 करोड़ से अधिक टर्म लोन स्वीकृत, 98% स्ट्राइक रेट के साथ यूपी का उत्कृष्ट प्रदर्शन

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व एवं निर्देशन में उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (पीएम एफएमई) योजना का क्रियान्वयन देश में अव्वल स्थान पर पहुंच गया है। योजना के प्रभावी संचालन से प्रदेश में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को नई ऊर्जा मिल रही है तथा रोजगार सृजन को व्यापक गति प्राप्त हो रही है। योजना की अद्यतन प्रगति के अनुसार प्रदेश में विभिन्न बैंकों द्वारा 2000 करोड़ रुपये से अधिक का टर्म लोन स्वीकृत किया जा चुका है, जो राज्य में उद्योग स्थापना के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में योजना के अंतर्गत स्वीकृत प्रस्तावों की संख्या सर्वाधिक रही है, जिसमें 98 प्रतिशत का स्ट्राइक रेट दर्ज किया गया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट उपलब्धि है।

योजना के तहत औसत स्वीकृति समय 100 दिन, औसत टर्म लोन 10 लाख रुपये तथा औसत अनुदान राशि 4 लाख रुपये प्रति इकाई स्वीकृत है, जो देश में सर्वोत्तम है। उद्योग स्थापना को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जनपद में जनपदीय रिसोर्स पर्सन (डीआरपी) की तैनाती मुख्य विकास अधिकारियों द्वारा की गई है। प्रत्येक इकाई की स्थापना में सहयोग के लिए डीआरपी को 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन धनराशि प्रदान की जाती है, जिससे उद्यमियों को सशक्त मार्गदर्शन मिल रहा है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में  अब तक 267.25 करोड़ रुपये व्यय किये जा चुके हैं, जो योजना के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को दर्शाता है। राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में पीएम एफएमई योजना के अंतर्गत 7340 प्रस्तावों की स्वीकृति के साथ उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है, जबकि 7293 प्रस्तावों के साथ बिहार दूसरे और 5695 प्रस्तावों के साथ महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (पीएम एफएमई) योजना के अंतर्गत असंगठित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के उन्नयन हेतु परियोजना लागत का 35 प्रतिशत (अधिकतम 10 लाख रुपये तक) क्रेडिट लिंक्ड अनुदान प्रदान किया जाता है। स्वयं सहायता समूहों, एफपीओ एवं सहकारिताओं को कॉमन इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए अधिकतम 3 करोड़ रुपये तक (35 प्रतिशत क्रेडिट लिंक्ड) अनुदान की व्यवस्था है। खाद्य प्रसंस्करण में कार्यरत स्वयं सहायता समूहों के प्रति सदस्य को 40,000 रुपये की दर से कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई जाती है तथा उत्पादों की ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग के लिए 50 प्रतिशत तक सहायता प्रदान की जाती है। पी एम एफ एम ई योजना के तहत अब तक 24197 से अधिक इकाइयो को अनुदान की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और पीएम एफएमई योजना के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, मूल्य संवर्धन एवं रोजगार सृजन को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों तक पारदर्शिता के साथ पहुंचाया जाए और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

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