लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने जनकल्याण, रोजगार सृजन, निवेश का विस्तार तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से सशक्त, सुरक्षित और समृद्ध प्रदेश के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप वर्ष 2029-30 तक प्रदेश को 01 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का हमारा लक्ष्य है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए इस वर्ष का बजट सदन में प्रस्तुत किया गया है। इस बजट के माध्यम से राज्य सरकार ने प्रदेश में प्रधानमंत्री के विजन को साकार करने का प्रयास किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास किया गया है। हर गाँव में खेल का मैदान, ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम तथा जनपद स्तर पर स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा है। मेजर ध्यानचन्द जी के नाम पर जनपद मेरठ में प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का निर्माण किया जा रहा है। मण्डल मुख्यालय पर एक स्पोर्ट्स कॉलेज बनाया जाएगा, इन्हें किसी एक विशेष खेल के लिए सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। यह प्रदेश के युवाओं को खेल के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने के लिए महत्वपूर्ण होंगे। ओलम्पिक, कॉमनवेल्थ तथा एशियाड खेलों में पदक प्राप्त करने वाले प्रदेश के 500 से अधिक खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी उपलब्ध करायी जा चुकी है। वर्ष 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स तथा वर्ष 2036 में ओलम्पिक खेलों की मेजबानी के लिए हमने सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की कार्यवाही आगे बढ़ायी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के एजेण्डे में विकास नहीं था, बल्कि परिवारवाद, तुष्टिकरण तथा दंगाइयों को पोषित करने का था। जे0पी0एन0आई0सी0 का डी0पी0आर0 200 करोड़ रुपये था, यह 800 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी अधूरा है। गोमती रिवर फ्रण्ट का डी0पी0आर0 300 करोड़ रुपये का था, जिस पर 1,400 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी कार्य अधूरे थे। बिना भूमि अर्जित किए ही पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के टेण्डर एवॉर्ड कर दिए गए थे। पहले यह टेण्डर 15,200 करोड़ रुपये का था। यह एक्सप्रेस-वे 110 मीटर चौड़ा 350 किलोमीटर लम्बाई में बनना था। हमारी सरकार बनने पर इसके कार्यों की समीक्षा की गई, तो पता चला कि भूमि का अर्जन ही नहीं हुआ है। हमने इसके टेण्डर निरस्त कर दिए। हमने एक्सप्रेस-वे को 120 मीटर करने का प्रस्ताव रखा, क्योंकि दिल्ली से वाराणसी तक चलने वाली बुलेट ट्रेन चलाने के लिए भूमि की व्यवस्था भी इसके साथ की गई है। बाद में जब एक साथ टेक्निकल और फाइनेन्शियल बिड मँगाते हुए टेण्डर किए गए, तब वह 11,800 करोड़ रुपये के थे।
इमरजेंसी के समय प्रदेश में दूसरी आजादी के आन्दोलन का शंखनाद करने वाले जय प्रकाश नारायण जी उत्तर प्रदेश की धरा पर जन्मे थे। जय प्रकाश नारायण की अन्तिम इच्छा का सम्मान करते हुए हमारी सरकार ने उनकी जन्मभूमि पर हॉस्पिटल निर्माण तथा कनेक्टिविटी के कार्य किए हैं। पिछली सरकारों ने जय प्रकाश नारायण जी और डॉ0 राम मनोहर लोहिया के सपनों पर कुठाराघात किया। आज इनका समाजवाद सम्पत्ति और सन्तति का प्रतीक बन गया है। इन्होंने अपने कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में अव्यवस्था और अराजकता फैलायी। युवाओं के सामने पहचान तथा बहन और बेटियों के सामने सुरक्षा का संकट खड़ा किया। अन्नदाता किसानों को आत्महत्या करने तथा व्यापारियों को प्रदेश छोड़ने के लिए मजबूर किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जल, थल और नभ की बेहतरीन कनेक्टिविटी है। उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस-वे का संजाल है। देश के एक्सप्रेस-वे का 55 फीसदी हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क उत्तर प्रदेश में है। 22 फरवरी, 2026 को देश की पहली रैपिड रेल दिल्ली से मेरठ का उद्घाटन प्रधानमंत्री जी करने का जा रहे हैं।
वर्ष 2017 के पूर्व मेरठ से दिल्ली की दूरी 05 से 06 घण्टे में तय होती थी तथा सफर भी सुरक्षित नहीं था। आज उत्तर प्रदेश में सुरक्षा का वातावरण है। अब दिल्ली और मेरठ के बीच 12-लेन का हाइवे बन जाने से यह दूरी 45 मिनट में तय की जा सकती है। उत्तर प्रदेश में 07 एक्सप्रेस-वे क्रियाशील हैं, 05 निर्माणाधीन हैं तथा 10 पर कार्य चल रहा है। देश में सर्वाधिक 06 शहरों में मेट्रो रेल संचालित हैं। प्रधानमंत्री द्वारा 22 फरवरी, 2026 को मेरठ में मेट्रो रेल का उद्घाटन होने के बाद यह संख्या 07 हो जाएगी। ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन उत्तर प्रदेश में है। वाराणसी से हल्दिया के बीच इनलैण्ड वॉटर-वे संचालित हो रहा है। उत्तर प्रदेश लॉजिस्टिक का बेहतरीन केन्द्र बनने जा रहा है।

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