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सुरक्षित भारत की दिशा में हो गंभीर आत्ममंथन….

सुरक्षित भारत की दिशा में हो गंभीर आत्ममंथन….

04 मार्च राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस:    - सुरेश सिंह बैस "शाश्वत" राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि देश की कार्यसंस्कृति और नागरिक जिम्मेदारी की परीक्षा है। इसकी स्थापना 1972 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा की गई थी। उद्देश्य स्पष्ट था,औद्योगिक दुर्घटनाओं में कमी लाना, कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करना और नागरिकों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित करना।परंतु पाँच दशकों से अधिक समय बाद भी प्रश्न यह है,क्या हमने सुरक्षा को संस्कृति का हिस्सा बनाया है, या यह अब भी केवल एक सप्ताह का अभियान भर है? भारत विश्व की तीव्र गति से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। निर्माण, खनन, ऊर्जा, परिवहन और अवसंरचना क्षेत्रों…
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रंगों की खुशियों के बीच स्वास्थ्य और स्वच्छता का संकल्प: सुरक्षित होली की ओर एक जिम्मेदार पहल

रंगों की खुशियों के बीच स्वास्थ्य और स्वच्छता का संकल्प: सुरक्षित होली की ओर एक जिम्मेदार पहल

04 मार्च होली के अवसर पर उमेश कुमार सिंहहोली भारत का एक अत्यंत लोकप्रिय और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पर्व है, जिसे देश के विभिन्न हिस्सों में उल्लास, उत्साह और सामाजिक सौहार्द के साथ मनाया जाता है। यह केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, क्षमा, संवाद और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। इस दिन लोग एक दूसरे को रंग लगाकर मन की दूरियां मिटाते हैं और नई शुरुआत का संदेश देते हैं। हालांकि बदलते समय के साथ होली के स्वरूप में भी परिवर्तन आया है। बाजार में उपलब्ध अनेक रंगों में अब कृत्रिम रसायनों का प्रयोग होने लगा है, जो त्वचा, बालों, आंखों और श्वसन तंत्र…
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एक मार्च शून्य भेदभाव दिवस:समानता का संकल्प और समाज की परीक्षा

एक मार्च शून्य भेदभाव दिवस:समानता का संकल्प और समाज की परीक्षा

  - सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"  एक मार्च को मनाया जाने वाला शून्य भेदभाव दिवस केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना की कसौटी है। इसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनएआइडीएस ने एचआईवी/एड्स से प्रभावित लोगों के प्रति व्याप्त पूर्वाग्रह और सामाजिक बहिष्कार के विरोध में की थी। आज यह दिवस हर प्रकार के भेदभाव जाति, धर्म, लिंग, वर्ग, भाषा, रंग, आयु, लैंगिक पहचान या दिव्यांगता के विरुद्ध वैश्विक संकल्प का प्रतीक बन चुका है। भारत का संविधान समानता, स्वतंत्रता और गरिमा का अधिकार देता है। अनुच्छेद 14 से 17 तक स्पष्ट रूप से भेदभाव निषेध की बात कही गई है। फिर भी प्रश्न यह है कि क्या सामाजिक व्यवहार में यह…
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