प्रेम भरी ग़ज़लों की पुस्तक ‘‘तुम्हारी ग़ज़ल’’ का हुआ विमोचन

‘तुम्हारी ग़ज़ल’ प्रेम की कोमल अनुभूतियों को शालीन शब्द-विन्यास में प्रस्तुत करने वाली कृति है पं. छतिश द्विवेदी

NTPC

वाराणसी | साहित्य, संवेदना और रचनात्मक संवाद की गरिमामयी उपस्थिति के बीच उद्गार सभागार, वाराणसी में एक प्रभावशाली साहित्यिक आयोजन संपन्न हुआ। इस आयोजन ने न केवल नगर के साहित्यिक वातावरण को ऊर्जस्वित किया, बल्कि विचार, काव्य और मानवीय भावनाओं के सशक्त आदान–प्रदान का अवसर भी प्रदान किया। बड़ी संख्या में साहित्यकारों, रचनाकारों और साहित्यप्रेमियों की सहभागिता ने कार्यक्रम को स्मरणीय बना दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार आबिद सलेमपुरी ने की। आयोजन को प्रकाशक एवं वरिष्ठ साहित्यकार पं. छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’ के मार्गदर्शन ने विशिष्ट गरिमा प्रदान की। मुख्य अतिथि के रूप में देवेंद्र पांडेय तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में नसीमा निशा की उपस्थिति रही। लेखकीय अतिथि के रूप में शमीम गाजीपुरी ने आयोजन की साहित्यिक गरिमा को और सुदृढ़ किया। कार्यक्रम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भावनात्मक पक्ष हिन्दी ग़ज़ल की पुस्तक ‘तुम्हारी ग़ज़ल’ का विमोचन रहा, जिसकी लेखिका डॉ. प्रियंका तिवारी हैं। यह कृति गहरे प्रेम, सूक्ष्म अनुभूतियों और आत्मीय भावनाओं से समृद्ध सुन्दर ग़ज़लों का संग्रह है, जो हिन्दी ग़ज़ल की समकालीन यात्रा में एक संवेदनशील और सार्थक हस्तक्षेप के रूप में सामने आई। विमोचन अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों ने पुस्तक की भाव-भूमि और भाषा-सौंदर्य की मुक्तकंठ से सराहना की।
इस अवसर पर प्रकाशक पं. छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’ ने अपने वक्तव्य में कहा कि ‘तुम्हारी ग़ज़ल’ प्रेम की कोमल अनुभूतियों को शालीन शब्द-विन्यास में प्रस्तुत करने वाली कृति है। डॉ. प्रियंका तिवारी की ग़ज़लों में भावनात्मक गहराई, स्त्री-संवेदना और भाषा की सादगी का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। यह संग्रह हिन्दी ग़ज़ल को भाव और शिल्प—दोनों स्तरों पर समृद्ध करता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आबिद सलेमपुरी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि साहित्य का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य के भीतर मनुष्यता को जीवित रखना है। आज के इस आयोजन और ‘तुम्हारी ग़ज़ल’ जैसी पुस्तकों से यह स्पष्ट होता है कि प्रेम, संवेदना और इंसानी रिश्ते अब भी साहित्य के केंद्र में हैं। ऐसे आयोजन साहित्यिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाते हैं।
कार्यक्रम के मध्य विभिन्न साहित्यकारों का जन्म-माह उत्सव भी उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर चंद्रभूषण सिंह, देवेंद्र पांडे, कलाम बनारसी तथा संध्या मौर्या कुंभु को उनके साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया और उपस्थित साहित्यकारों ने उन्हें शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र का संचालन बुद्धदेव तिवारी तथा द्वितीय सत्र का संचालन कवि सुनील कुमार सेठ द्वारा किया गया। दोनों संचालकों ने कार्यक्रम को सुव्यवस्थित, संवादपूर्ण और साहित्यिक गरिमा के अनुरूप बनाए रखा।
गोष्ठी में बी.के. गुप्ता ‘तनहा’ जौनपुरी, डॉ. नसीमा निशा, करुणा सिंह, सीनू अग्रवाल, विजय चन्द्र त्रिपाठी, राम नरेश पाल, दिनेश दत्त पाठक, डॉ. जगदीश नारायण गुप्त, कैलाश नाथ यादव, कवि बिमल बिहारी, नन्दलाल राजमा ‘नन्दू’, आलोक सिंह ‘बेताब’, डॉ. प्रताप शंकर दूबे, संध्या मौर्या, अजफर बनारसी, डॉ. ए.के. सिन्हा ‘बहुमुखी’, ‘आशिक’ बनारसी, निजाम बनारस, कलाम बनारसी, प्रो. इशरत जहाँ, मुश्ताक बनारसी, सुनील कुमार सेठ तथा जी.एल. पटेल ‘अयन’ सहित अनेक साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही। काव्य-पाठ, विचार-विमर्श और साहित्यिक संवाद से परिपूर्ण यह आयोजन श्रोताओं को भावविभोर करता हुआ आपसी सद्भाव, रचनात्मक ऊर्जा और साहित्यिक निरंतरता के संकल्प के साथ संपन्न हुआ। उपस्थित साहित्यकारों ने ऐसे आयोजनों को साहित्यिक चेतना के संवर्धन के लिए आवश्यक बताते हुए इनके नियमित आयोजन पर बल दिया।

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