कुशीनगर में स्थापित होगी अत्याधुनिक केले की टिशू कल्चर लैब

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किसानों को मिलेंगे उन्नत किस्म के केले के पौधे, बढ़ेगी आय और खुशहाली

 लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने के क्रम में जनपद कुशीनगर के कसया स्थित राजकीय आलू फार्म पर ‘केला टिशू कल्चर लैब’ की स्थापना की जा रही है। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि इस परियोजना के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु कुल 401.75 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से 223.54 लाख रुपये निर्माण कार्य और 178.21 लाख रुपये मशीनरी व उपकरणों के लिए आवंटित किए गए हैं। इस लैब की स्थापना से क्षेत्र के केला उत्पादक किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले रोगमुक्त पौधे स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे उनकी उत्पादन लागत में कमी आएगी और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य जनपद कुशीनगर में केले की खेती को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ना है। कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि वर्तमान में किसानों को उन्नत टिशू कल्चर पौधों के लिए अन्य राज्यों या दूरस्थ क्षेत्रों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे परिवहन के दौरान पौधों के खराब होने का डर और अधिक व्यय होता था। अब स्थानीय स्तर पर लैब स्थापित होने से किसानों को समय पर स्वस्थ और अधिक उपज देने वाली प्रजातियों के पौधे प्राप्त होंगे। यह लैब न केवल केले की गुणवत्ता में सुधार करेगी, बल्कि निर्यात योग्य फसल तैयार करने में भी सहायक सिद्ध होगी, जिससे ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) अभियान को भी नई गति मिलेगी।

परियोजना के अंतर्गत निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड (UPRNSS) को सौंपी गई है। कुशीनगर के कसया में ही सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) पोटैटो के अतिरिक्त घटकों के लिए भी 70.86 लाख रुपये की व्यवस्था की गई है। इस प्रकार कुल 472.61 लाख रुपये की संयुक्त वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया गतिमान है। इन सुविधाओं के विकसित होने से कुशीनगर और आसपास के जनपदों के हजारों किसान सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि यह लैब तकनीकी हस्तांतरण का केंद्र बनेगी, जहां किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण भी दिया जा सकेगा। लैब के माध्यम से तैयार पौधे कीट और रोगों के प्रति सहनशील होंगे, जिससे कीटनाशकों पर होने वाला खर्च कम होगा और किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि होगी। सरकार का यह कदम कुशीनगर को केले के उत्पादन और प्रसंस्करण के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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