26
Feb
सोनभद्र। आधुनिकता ने त्यौहारों की पुरानी परम्परा को काफी पीछे छोड़ दिया है मानो होली एक दिन का औपचारिकता पूरी करने वाला त्योहार बनकर रह गया है। पहले बसंत पंचमी से ही ढोल मंजीरा एवं मानर बजना शुरू हो जाया करता था। बड़ी संख्या में लोग फाग गीत गाने जुटा करते थे। चारों ओर फाग गवैयों का मस्ती भरा शोर पारंपरिक लोकगीत के माध्यम से त्योहार के उत्साह को दोगुना कर देता था। अब समय के साथ फाग गीतों की परंपरा ही विलुप्त होती जा रही है।होली आपसी भाईचारे वाला त्यौहार हुआ करता था, वर्तमान समय मे हुड़दंग अश्लीलता और…
