03
Mar
सोनभद्र। बसन्त ऋतु के बाद ही प्रकृति अपना यौवन बिखेरना शुरू कर देती है और वातावरण में उल्लास छा जाता है।नव पल्लवों से सुसज्जित पेड़ पौधे ,आम के बौर एवं महुए की मादकता से मस्त कोयल की कूक बिरहिनो के लिए दिल में हूक बनकर टीस पैदा करती है।इस रंगों की होली में नव नवेली दुल्हन अपने पिया की बाट जोहती है।होली के पास आते ही प्रकृति भी रंगों से सराबोर हो जाती है। रवि की फसलें भी बसन्ती बयार के कारण अपने परिपक्वता की उफान पर होती है।सेमल व पलाश के पेड़ों पर उगने वाले मोहक फूल केवल प्रकृति…
