वाराणसी काशी की विद्वत्सपर्या का स्मरण करते हुये स्मृति व्याख्यान की अपनी विशिष्ट परंपरा द्वारा इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के क्षेत्रीय केन्द्र वाराणसी द्वारा नवनिर्मित अभिनव भरत शोध संस्थान, वाराणसी के संयुक्त तत्त्वावधान में प्रोफेसर कमलेशदत्त त्रिपाठी की जन्मस्मृति के अवसर पर स्मृति-व्याख्यान आयोजित किया गया। इस व्याख्यान का केन्द्रीय विषय ट्टदक्षिणपूर्व एशिया में संस्कृत’ सुनिश्चित किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्यवक्ता सुप्रसिद्ध संस्कृत साहित्यकार एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज के संस्कृत विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो० हरिदत्त शर्मा थे। साहित्यमार्तण्ड प्रो० विंध्येश्वरीप्रसाद मिश्र (पूर्व डीन संकाय, संस्कृतविद्याधर्मविज्ञान संकाय, बीएचयू, वाराणसी) थे।
कला केन्द्र की परंपरानुसार कार्यक्रम का शुभारम्भ बृहस्पति पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण तथा पुनः आगन्तुक अतिथियों के द्वारा देवी सरस्वती एवं प्रोफेसर कमलेशदत्त त्रिपाठी के चित्र पर पुष्पाजंलि अर्पित करने एवं दीप प्रज्जवलन से हुआ। इसके उपरान्त कला केन्द्र के क्षेत्रीय निदेशक, डॉ० अभिजित् दीक्षित ने वाचिक स्वागत करते हुये, कहा कि ट्टमैं यह मानता हूँ कि इस कला केन्द्र की जो प्रज्ञा, शास्त्र और लोक के क्षेत्र में काम कर रही हैं, उसमें कमलेशदत्त त्रिपाठी गुरूजी का प्रमुख योगदान है, साथ ही उन्होंने अपने वक्तव्य के सहयोगी संस्था अभिनव भरत शोध संस्थान, वाराणसी से परिचित कराते हुए बताया कि यह नवनिर्मित संस्था गुरूजी के आदर्शों एवं शोधों के अनुकूल बनी है और यह उसके द्वारा प्रथम आयोजित कार्यक्रम है। उन्होंने व्याख्यान हेतु उपस्थित सभी आगन्तुक विद्वानों का वाचिक स्वागत किया।
व्याख्यान के मुख्य वक्ता प्रो० हरिदत्त शर्मा ने व्यापकरूप से दक्षिण-पूर्व एशिया में संस्कृत के प्रसार और प्रभाव के सर्वांगीण आयामों पर अपने विषय को केन्द्रित किया – जिसमें साहित्य, भाषाशास्त्र, रचना-विज्ञान, शिल्प, स्थापत्य, नाट्य आदि विविध प्रसंगों का वर्णन समाहित था। उन्होंने विभिन्न स्थानों, नामों तथा प्रसंगों का उल्लेख करते हुये व्याख्यान के मूल विषय को व्यापक रूप में परिभाषित किया। प्रो० हरिदत्त ने विशेषतः अपने तीन साल विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में थाईलैंड में बिताये गये समय में ग्रहित अनुभवों को अत्यन्त सूक्ष्मता वर्णित किया।
कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो० विंध्येश्वरीप्रसाद मिश्र ने प्रो० त्रिपाठी से प्राप्त ज्ञान और उनकी मानवीय आत्मीयता की व्याख्या की तथा उन्होंने आईजीएनसीए एवं अभिनव भरत संस्था के प्रमुख पारिजात त्रिपाठी को इस व्याख्यान आयोजित करने के लिए साधुवाद दिया। दोनों ही विद्वान् आचार्यों ने प्रोफेसर त्रिपाठी से जुड़ी उनकी स्मृतियों को सुन्दर साहित्यिक पद्यों में निरूपित करते हुये अपने व्याख्यान का आरम्भ किया। कार्यक्रम के समापन में डॉ० पारिजात त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुये संस्था के उद्देश्यों एवं भावी कार्यक्रमों को प्रकाशित किया। इस कार्यक्रम का संचालन डॉ० रजनीकांत त्रिपाठी ने किया।
कार्यक्रम में काशी के अनेक विशिष्ट विद्वान् उपस्थित रहे, जिनमें – प्रो० सीबी झा, प्रो० हरिनारायण तिवारी, प्रो० कृष्णकान्त शर्मा, डॉ० दयानिधि मिश्र, प्रो० मारुति नन्दन प्रसाद तिवारी, प्रो० शान्तिस्वरूप सिन्हा, विजय शंकर त्रिपाठी, डॉ० कृष्णानन्द सिंह, डॉ० प्रह्लाद गिरि, डॉ० अवधेश कुमार, डॉ० गीता भट्ट, डॉ० त्रिलोचन प्रधान, डॉ० देबाशीष जाना, डॉ० शिवेन्द्र सिंह राणा, संजय सिंह, गौतम चटर्जी आदि प्रमुख हैं।

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