गंभीर रीढ़ की हड्डी की शल्यचिकित्सा के तुरंत बाद अगले दिन मरीज का चलना-फिरना शुरू
राउरकेला। सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) के इस्पात जनरल अस्पताल (आईजीएच) ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि अपने नाम की है, जहां 32 वर्षीय महिला मरीज, जो आयुष्मान भारत योजना की लाभार्थी हैं, गंभीर रीढ़ की हड्डी की शल्यचिकित्सा के तुरंत बाद अगले ही दिन फिर से चलने में सक्षम हो गईं।
मरीज़ को पीठ के निचले हिस्से में तेज़ दर्द के साथ भर्ती कराया गया था, जो दाहिने पैर तक फैल रहा था, साथ ही खड़े होने, चलने-फिरने, बिस्तर पर करवट लेने और पेशाब और मल त्याग करने में भी दिक्कत हो रही थी I ये परेशानी उसे पिछले पाँच दिनों से थी I आईजीएच में किए गए एमआरआई से पता चला कि एल5-एस1 डिस्क घिसकी हुई है, जिसके कारण कॉडा इक्वाइना संलक्षण दिखने लगे थे जो एक न्यूरोसर्जिकल आपात स्थिति है, जिसमें तुरंत हस्तक्षेप के आवश्यकता होती है।
तत्काल कार्रवाई करते हुए, चिकित्सा दल ने आपातकालीन लम्बर स्पाइन शल्यचिकित्सा की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया। ऑपरेशन का नेतृत्व वरिष्ठ कंसल्टेंट (न्यूरोसर्जरी), डॉ. मनोज कुमार देव ने किया और अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी, डॉ. संजुक्ता पाणिग्रही ने एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी संभाली। सिस्टर गोधूली और सिस्टर अंजली ने ऑपरेशन के दौरान महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
मरीज़ में ज़बरदस्त स्वस्थ सुधार दिखने लगी और शल्यचिकित्सा के सिर्फ़ एक दिन बाद वह खड़ी होने और चलने-फिरने लगी। शल्यचिकित्सा के पश्चात के देखभाल सिस्टर गौरी, सिस्टर सस्मिता, सिस्टर मनीषा, सिस्टर रुबी और सिस्टर सोनिया द्वारा अत्यंत कुशलता से की गई, जिससे मरीज का स्वास्थ्य लगातार बेहतर होता गया।
राहत और आभार व्यक्त करते हुए, मरीज ने बताया कि लक्षणों में 80% का सुधार है । अब वह पूरी तरह से ठीक हो रही हैं और जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जायेगी । सफलता की यह कहानी आईजीएच की उत्कृष्ट स्वस्थ सेवा केंद्र होने के पुष्टि करती है और यह दर्शाती है कि सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के तहत उन्नत, संवेदनशील और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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