संवेदनाओं का संचार है कविता – प्रो. उमेश सिंह

*युवा कवि कुलदीप कुमार की काव्य कृति “मैं कौन हूँ?” का हुआ लोकार्पण

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पीडीडीयू नगर। कविता शब्दोंके साथ खिलवाड़ नहीं, कविता तुकबंदी का संयोजन भी नहीं है कविता संवेदनाओं का संचार है। जब कोई संवेदनशील व्यक्ति किसी घटना या व्यक्ति के प्रति संवेदनशील होकर विचार करता है और उस विचार को शब्दों ढाल कर एक अर्थ का संचार करता है तो वो कविता होती है। कविता दर्द की हंसी और सुख में मानवता का भाव भी है। ये बाते प्रख्यात साहित्यकार एवं केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ वाराणसी के विजिटिंग प्रोफेसर डॉ उमेश प्रसाद सिंह नगर के एक होटल में काव्य मंजूषा चंदौली के तत्वावधान में आयोजित युवा कवि कुलदीप कुमार की प्रथम काव्य कृति ‘मैं कौन हूं ‘ के लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा। उन्होंने कुलदीप की काव्य साधना की प्रशंसा करते हुए कहा कि कवि समाज में व्याप्त विषमताओं एवं विपरीत परिस्थितियों से पैदा होता है। कुलदीप भी उन्हीं में एक हैं।

    विचार व्यक्त करते दिनेश चंद्रा 

  समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रसिद्ध साहित्यकार एवं पूर्व वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी दिनेश चंद्रा बने कहा कि युवाओं में कविता प्रति रुझान होना शुभ संकेत है। क्योंकि देश का भविष्य युवाओं के ऊपर निर्भर करता है। यदि युवा कविता से जुड़ेगा तो उसमें मानवता सहित सभी मानवीय मूल्यों का जन्म होगा जिससे देश नैतिक रूप से सबल होगा। कुलदीप का यह प्रयास उसी दिशा में चलने का प्रथम प्रयास है। हम इन्हें शुभकामनाएं देते हैं। डॉ विनय वर्मा एवं डॉ बहुत भूषण यादव ने भी विशिष्ट वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए। प्रथम सत्र की अध्यक्षता काव्य मंजूषा के अध्यक्ष राम नगीना सिंह ने किया।

कविता पाठ करती रीना तिवारी 

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में भव्य कवि सम्मेलन हुआ। जिसमें अंतराष्ट्रीय शायर सुहैल उस्मानी, मनोज मधुर, अरविंद कौशल, रौशन मुगलसरायवी, आकाश मिश्र, दानिश इकबाल, रीना तिवारी, आदि लोगों ने काव्य पाठ किया।  इस अवसर पर मुख्य रूप से डा अभिशेष, डा राजीव, ऋतु, सुनीता गुप्ता, सतनाम सिंह, हेमंत शर्मा , सुभाष तुलस्यान, संदीप बेनीवाल, अभिशेष तुलस्यान, सतीश जिंदल, डा हरेंद्र, संदीप निगम, डॉ  रवि, महेंद्र, विनोद, प्रमोद, विनोद, मिथिलेश,  दिनेश शर्मा, अनीता कुशवाहा आदि लोग उपस्थित रहे। दोनों सत्रों का संचालन युवा कवि डॉ. सुरेश अकेला व धन्यवाद कमलेश तिवारी ने किया।

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