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होली सद्भाव, अपनत्व और गिले-शिकवे भुलाने का पर्व है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

होली सद्भाव, अपनत्व और गिले-शिकवे भुलाने का पर्व है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

*रायपुर प्रेस क्लब के होली मिलन समारोह “रंगोत्सव” मुख्यमंत्री हुए शामिल* रायपुर / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह “रंगोत्सव” एवं “महामूर्ख सम्मेलन 2026” में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को होली की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को सुदृढ़ करने का पावन अवसर भी है। यह पर्व हमें छोटी-छोटी अनबन और गिले-शिकवे भुलाकर नए सिरे से संबंधों को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब में पर्वों…
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विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार – मंत्री रामविचार नेताम

विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार – मंत्री रामविचार नेताम

मंत्री श्री रामविचार नेताम ने 50 लाख रुपये के विकास कार्यों की दी सौगातरायपुर, / कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने अपने उद्बोधन में कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के समग्र विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पण्डो समाज जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आज बलरामपुर जिले के विकासखंड रामचंद्रपुर के ग्राम पंचायत महादेवपुर में विशेष पिछड़ी जनजाति सम्मेलन का आयोजन किया गया। ग्राम पंचायत महादेवपुर में कुल 50 लाख रुपये की लागत से बनने वाले दो प्रमुख कार्यों का शिलान्यास किया।…
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पर्यावरण संरक्षण के साथ आय संवर्धन की दिशा में पहल

पर्यावरण संरक्षण के साथ आय संवर्धन की दिशा में पहल

फूलों से तैयार कर कर रही स्व-रोजगाररायपुर,/   रंगों का पावन पर्व होली इस बार जिले में कुछ खास होने जा रहा है। जहां जिला प्रशासन एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत भनौरा के गंगा महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक हर्बल गुलाल तैयार कर स्टॉल कर बिक्री कर रही हैं।बलरामपुर जिला के ग्राम भनौरा के समूह में 11 सदस्य हैं, महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं का मानना है कि पारंपरिक विधि से बनाए गए प्राकृतिक गुलाल से न केवल त्वचा सुरक्षित रहती है, बल्कि यह…
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उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय में “सेवा संकल्प प्रस्ताव” का वाचन एवं संगोष्ठी का आयोजन

उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय में “सेवा संकल्प प्रस्ताव” का वाचन एवं संगोष्ठी का आयोजन

  प्रयागराज ।  उत्तर मध्य रेलवे (उमरे) मुख्यालय में आज "सेवा संकल्प प्रस्ताव" के वाचन और उस पर चर्चा के लिए एक विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई। यह कार्यक्रम विन्ध्य हॉल में पूर्वाह्न 11:00 बजे आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता अपर महाप्रबंधक जे.एस. लाकरा ने की। "सेवा संकल्प प्रस्ताव" मूल रूप से केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 24 फरवरी, 2026 को नए प्रधानमंत्री कार्यालय, 'सेवा तीर्थ' में अपनी ऐतिहासिक पहली बैठक के दौरान पारित किया गया था । उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान, अपर महाप्रबंधक जे.एस. लाकरा ने इस संकल्प का पाठ किया, जिसमें नागरिक-केंद्रित शासन: 'नागरिक देवो…
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को ट्रैक रखरखाव प्रक्रियाओं में सुधार के दिए निर्देश

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को ट्रैक रखरखाव प्रक्रियाओं में सुधार के दिए निर्देश

*भारतीय रेलवे में ट्रैक सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एआई-आधारित निगरानी, स्वदेशी फास्टनर, आपूर्तिकर्ता विविधीकरण और विस्तारित रखरखाव ब्लॉक लागू किए जा रहे हैं*   नई दिल्ली । भारतीय रेलवे आधुनिक तकनीक और मानकीकृत घटकों के साथ ट्रैक रखरखाव प्रक्रियाओं में सुधार कर रहा है। आज रेल भवन में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में, ट्रैक बिछाने, संयोजन और स्वास्थ्य निगरानी की वर्तमान विधियों में सुधार के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। - एआई-आधारित ट्रैक निगरानी: टर्नआउट रीडिंग और ट्रैक की वास्तविक स्थिति की निगरानी के लिए स्मार्टफोन-सक्षम, एआई-आधारित एप्लिकेशन विकसित किया जा…
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छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य मंडल के 85वें वार्षिकोत्सव में कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल सम्मानित

छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य मंडल के 85वें वार्षिकोत्सव में कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल सम्मानित

रायपुर / छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य मंडल के 85वें स्थापना/वार्षिकोत्सव समारोह में साहित्य साधिका श्रीमती सुषमा प्रेम पटेल को “प्रतिदिन व्हाट्सऐप मंच में स्नेहिल सृजन” प्रेषित करने के लिए सम्मानित किया गया। यह गरिमामय समारोह वृंदावन (बड़ा हॉल), सिविल लाइंस, रायपुर में आयोजित हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि आयुर्वेद विश्व परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं साहित्यप्रेमी विद्वान डॉ. राजाराम त्रिपाठी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विभिन्न साहित्यकारों, विद्वानों एवं गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय सहभागिता रही, जिससे आयोजन की गरिमा और बढ़ गई।  मंडल द्वारा सुषमा प्रेम पटेल की सतत एवं समर्पित साहित्य साधना की सराहना करते हुए उन्हें प्रशस्ति चिन्ह एवं सम्मान-पत्र प्रदान…
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”कटुता भुलाकर गले मिलें”

”कटुता भुलाकर गले मिलें”

“(होली पर्व पर विशेष काव्य-रचना) फाल्गुन की उजली पूर्णिमा, जब नभ में मुस्काती है, होलिका की पावन ज्वाला बुराई को जलाती है। सत्य की राह दिखाकर हमको, नव विश्वास जगाती है, अंधियारे मन के कोनों में भी उजियारा भर जाती है। सुबह धुलेंडी रंग लिए जब आँगन में आ जाती है, अबीर-गुलाल की खुशबू से हर गली महक जाती है। छोटे-बड़े सब संग मिलकर प्रेम का रंग लगाते हैं, रूठे-रूठे मन भी हँसकर फिर से मित्र बन जाते हैं। ढोल मंजीरे गूँज उठें जब गीत फाग के गाए जाएँ, नाचें गाएँ लोग सभी, हर चेहरे पर रंग समाएँ। मन का…
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होली: परंपरा, उत्साह और सामाजिक समरसता का पर्व

होली: परंपरा, उत्साह और सामाजिक समरसता का पर्व

(होली विशेष आलेख) - डॉ.ब्रह्मानंद राजपूत होली भारतवर्ष का एक अत्यंत प्राचीन, सांस्कृतिक और लोकआस्था से जुड़ा हुआ पर्व है, जिसे पूरे देश में अत्यधिक धूमधाम, उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है। ऋतु परिवर्तन के इस समय में जब शीत ऋतु विदा लेती है और वसंत का आगमन होता है, प्रकृति स्वयं रंग-बिरंगे पुष्पों से सुसज्जित हो जाती है। मानो प्रकृति भी रंगों के इस उत्सव का स्वागत कर रही हो। होली का पर्व परंपरागत रूप से दो दिनों तक मनाया जाता है। पहले दिन फाल्गुन पूर्णिमा…
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जैव विविधता की रक्षा या विकास की अंधी दौड़…

जैव विविधता की रक्षा या विकास की अंधी दौड़…

3 मार्च विश्व वन्य जीव दिवस:   - सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"  विश्व वन्य जीव दिवस केवल एक औपचारिक अंतरराष्ट्रीय दिवस नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के अस्तित्व से जुड़ा प्रश्न है। वर्ष 2013 में युनाइटेड नेशन जनरल एसेंबली ने इस दिवस की घोषणा की, ताकि वैश्विक स्तर पर वन्य जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया जा सके। यह दिन हमें याद दिलाता है कि पृथ्वी केवल मनुष्यों की नहीं, बल्कि करोड़ों अन्य जीवों की भी साझी धरोहर है। वन्य जीव किसी पर्यटन आकर्षण या जंगल की शोभा मात्र नहीं हैं। वे पारिस्थितिकी तंत्र के स्तंभ हैं। परागण करने वाले कीट, बीजों का प्रसार करने…
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03 मार्च पूर्ण चंद्र ग्रहण :  चंद्र ग्रहण एक खगोलीय महाकाव्य

03 मार्च पूर्ण चंद्र ग्रहण :  चंद्र ग्रहण एक खगोलीय महाकाव्य

       - सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"   3 मार्च 2026 मंगलवार -बुधवार की दरमियानी रात्रि को विलक्षण खगोलिक घटनाक्रम के तहत पड़ने वाले पूर्ण चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को पृथ्वी के साये में चाँद के प्रवेश का वह मौन, वरदान-सा क्षण होगा जब आकाश अपने रंगों से खेलता है और चंद्रमा निकल-चमक कर “रक्तिम पूर्णिमा” का दृश्य प्रस्तुत करता है । जिसे खगोल विज्ञान में ब्लड मून कहा जाता है। ऐसा होने का कारण यह है कि जब चंद्रमा पृथ्वी की उम्ब्रा (गहरी छाया) में प्रवेश करता है, तो पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की किरणों को वक्रित करता है और केवल लाल-लाल प्रकाश चंद्रमा पर पहुँचता है ।जिससे उसका रंग…
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