आकाशवाणी वाराणसी द्वारा संगीत सम्मेलन का आयोजन

वाराणसी / सूचना, शिक्षा और मनोरंजन के प्रसार के साथ साथ देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने मे आकाशवाणी अपनी महती भूमिका निभाता रहा है | इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष  आकाशवाणी संगीत सम्मेलन के 67वें  संस्करण का भव्य आयोजन देश भर के 24  केंद्रों द्वारा किया जा रहा है जिसके अंतर्गत आकाशवाणी वाराणसी  द्वारा शनिवार, 15 नवंबर 2025 को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के  संगीत एवं मंच कला संकाय  स्थित  पं ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में आकाशवाणी संगीत सम्मेलन आयोजित  किया गया |

अपराहन 03 बजे, कार्यक्रम का शुभारंभ आकाशवाणी के मनमोहक संकेत धुन के साथ हुआ | कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मभूषण प्रोफेसर देवी प्रसाद द्विवेदी, विशिष्ट अतिथि पद्मश्री शिवनाथ मिश्रा, आकाशवाणी के केन्द्राअध्यक्ष स्वतंत्र सिंह और कार्यक्रम प्रमुख अशोक पाण्डेय ने  दीप प्रज्ज्वलन उपरांत माता सरस्वती, महमना प. मदन मोहन मालवीय और प.  ओंकार नाथ ठाकुर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया | आकाशवाणी के उप निदेशक अशोक कुमार , कार्यक्रम के नोडल अधिकारी प्रफुल्ल सिन्हा एवं कार्यक्रम अधिशासी दिलीप यादव ने गणमान्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ , अंगवस्त्रम और स्मृतिचिह्न प्रदान करके उनका स्वागत किया तत्पश्चात कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की

संगीत सम्मेलन की शुरुआत हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रख्यात गायक और आकाशवाणी के ए –ग्रेड कलाकार डॉ शुभंकर दे के गायन से हुई , उन्होंने मंच पर अपने मन मोहक गायन से वातावरण को सुरमई  बना दिया|  उन्होंने सबसे पहले राग- विहाग में विलंबित रचना –हिय में सिय राम  प्रस्तुत किया जिसकी मधुर ताल और भावपूर्ण आलाप ने सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया | इसके पश्चात उन्होंने राग – मालकौन्स में मध्य विलंबित रचना मत्तताल में  – “गूंज उठी है” तथा द्रुत रचना एक ताल –“शंकर अवतर हरो” का प्रभावशाली गायन किया | उनके गायन कि भावगर्भिता  और रागों कि गहराई ने उपस्थित श्रोताओं को अद्भुत आनंदानुभूति  से भर दिया |

डॉ शुभंकर दे के गायन मे उनके साथ तबले पर सिद्धार्थ चक्रवर्ती और हारमोनियम पर डॉ इंद्रदेव चौधरी ने संगति की |  कार्यक्रम के उत्तरार्ध में लोकसंगीत की सुगंध बिखेरते हुए ए – ग्रेड भोजपुरी लोकगायक मन्नालाल यादव और साथियों  ने मंच संभाला  और पूर्वांचल कि मिट्टी से जुड़े  लोकगीतों  –ऐसी मनोहारी प्रस्तुति  दी कि पूरा सभागार लोकरस में झूम उठा | उनके गीतों में बनारस की बोली, ग्रामीण जीवन कि सहजता और लोकभाव  की  मधुर गूंज सुनाई दी | यह संगीत सम्मेलन न केवल शास्त्रीय संगीत और लोकसंगीत की विधाओं का सुन्दर समन्वय था बल्कि भारतीय संगीत परंपरा के संवर्धन और प्रसार की  दिशा में आकाशवाणी की निरंतर प्रतिबद्धता  का सशक्त प्रमाण भी बना  |कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी के वरिष्ठ उदघोषक अरुण कुमार पाण्डेय द्वारा किया गया और कार्यक्रम का समापन आकाशवाणी के कार्यक्रम प्रमुख अशोक पाण्डेय द्वारा सभी आगंतुकों के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ |

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