राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की कार्यकारिणी की बैठक संपन्न, जे एन तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक

20 जनवरी के विधानसभा घेराव, धरना ,प्रदर्शन कार्यक्रम पर लगी अंतिम मोहर
मुख्य सचिव नहीं ले रहे हैं कर्मचारियों की मांगों का संज्ञान, मुख्यमंत्री को भी लिखे जा चुके हैं दर्जनों पत्र
लखनऊ / राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक, जिसमें संबद्ध संगठनों के अध्यक्ष ,महामंत्री जनपद शाखाओं के अध्यक्ष मंत्री एवं संयुक्त परिषद की केंद्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारी शामिल हुए। संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी की अध्यक्षता में लखनऊ में संपन्न हुई बैठक में 100 से भी अधिक पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक के बाद प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने अवगत कराया कि आज की बैठक में 20 जनवरी के विधानसभा पर धरना प्रदर्शन एवं घेराव कार्यक्रम पर उपस्थित पदाधिकारियों ने अंतिम मोहर लगा दिया है। उन्होंने कहा कि 20 जनवरी को प्रदेश के विभिन्न विभागों से 20000 से भी अधिक कर्मचारियों ने विधानसभा पर घेराव करने का एवं धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने का आश्वासन दिया है। जे एन तिवारी ने बताया है कि आउटसोर्स कर्मियों के न्यूनतम मानदेय पर अभी तक कोई स्पष्ट स्थिति नहीं बनी है। आउटसोर्स कर्मियों का शोषण लगातार हो रहा है। 30 दिन 12 घंटा काम लेकर 28 दिन का मानदेय दिया जा रहा है, वह भी मनमानी तरीके से। 2001 के बाद संविदा , वर्क चार्ज एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण की कोई नियमावली नहीं बनी है, जिसके कारण कर्मचारी एवं शिक्षकों में सेवा सुरक्षा को लेकर संशय बना रहता है। विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों पर मुख्य सचिव समिति निर्णय नहीं कर रही है। कोरोना काल के दौरान काटा गया नगर प्रतिकर भत्ता एवं सीज किया गया 18 महीने के महंगाई भत्ते पर भी निर्णय नहीं किए जाने से कर्मचारी नाराज हैं। जे एन तिवारी ने अवगत कराया है कि कैशलेस इलाज में भी प्रदेश के कर्मचारियों को लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के 40 लाख कर्मचारियों के परिवारों के दो करोड़ 40 लाख मतदाता इस बार के चुनाव में निर्णायक भूमिका में होंगे। 18 जनवरी को एक बार पुनः ऑन लाइन बैठक करके समीक्षा करके विधान सभा घेराव की रणनीति बनाई जाएगी।
जे एन तिवारी के अनुसार मुख्य सचिव कर्मचारियों की मांगों पर कोई वार्ता नहीं कर रहे हैं। प्रमुख सचिव कार्मिक के स्तर से भी कर्मचारी संगठनों से संबंधित कोई कार्य नहीं हो रहा है। मुख्यमंत्री जी को भी दर्जनों पत्र संयुक्त परिषद द्वारा लिखे गए हैं परंतु शासन संज्ञान नहीं ले रहा है। ऐसी स्थिति में विधानसभा पर धरना प्रदर्शन एवं घेराव ही एकमात्र विकल्प है। 20 जनवरी को धरना प्रदर्शन एवं घेराव के बाद भी कर्मचारियों के आंदोलन का कारवां रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को फिर से एक बार जागरूक करके कर्मचारी हित में अपने अधिकारों का उपयोग करने के लिए तैयार किया जाएगा। 20 जनवरी को आंदोलन के अगले चरण की घोषणा भी होगी। आज की बैठक में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की आजीवन सदस्यता ग्रहण करने वाले समाज कल्याण एवं जनजाति विकास विभाग के 15 सदस्यों को सम्मानित भी किया गया। संयुक्त परिषद की महामंत्री अरुण शुक्ला , वरिष्ठ उपाध्यक्ष नारायण जी दुबे, उपाध्यक्ष प्रीति पांडे, कोषाध्यक्ष नितिन गोस्वामी, मंडल अध्यक्ष वीरेंद्र वीर यादव,सेंट्रल रीजनल वर्कशॉप कर्मचारी संघ के महामंत्री जसवंत सिंह, रोडवेज कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष डीके त्रिपाठी, महामंत्री डी के उपाध्याय यू पी फूड एंड सिविल सप्लाईज इंस्पेक्टर ऑफिसर एसोसिएशन के महामंत्री त्रिलोकी नाथ चौरसिया, सूर्य नारायण मिश्रा, आशा हेल्थ वर्कर संघ की अध्यक्ष कुसुम लता यादव, लक्ष्मी सोनकर , संयुक्त परिषद के जनपदों के पदाधिकारी, अमरनाथ यादव, बृजेश श्रीवास्तव, जय गोविंद यादव, रमेश चंद्र राय,सहित दर्जनों संगठनों के पदाधिकारियों ने कर्मचारियों को संबोधित किया। बैठक में 60 से अधिक संगठनों एवं 40 से भी अधिक जनपद शाखाओं के पदाधिकारी उपस्थित थे ।
अरुणा शुक्ला

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