मासिक सांगीतिक शृंखला ‘‘नाद-यात्रा’’ का आयोजन किया गया

नाद यात्रा शृंखला : राग और रंग ही सृष्टि के दिव्य आनन्द की पराकाष्ठा है*

NTPC

वाराणसी/ काशी की संगीत परम्परा शिवत्व की साधना का सुविख्यात सहज मार्ग है जिसके संरक्षण और संवहन हेतु इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र का क्षेत्रीय केन्द्र, वाराणसी समर्पित है। इसी के अनुरूप कला केन्द्र द्वारा संस्कार भारती काशी महानगर के सहयोग से दिनांक 28 फरवरी, 2026 को मासिक सांगीतिक शृंखला ‘‘नाद-यात्रा’’ का आयोजन किया गया। इस सांगीतिक समारोह के मुख्य अतिथि प्रो  उदय प्रताप शाही (पूर्व विभागाध्यक्ष, रेडियोथेरेपी एवं विकिरण चिकित्सा विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी) थे। प्रो० शाही ने अपने सम्बोधन में भारतीय संगीत परम्परा में नाद और साधना के आध्यात्मिक आयामों पर अपने विचार व्यक्त किये।

इस संगीतमय कार्यक्रम के मुख्य प्रस्तुतिकर्ता आगरा शहर की विख्यात गायिका सुश्री शुभ्रा तलेगाँवकर (शास्त्रीय गायिका, ग्वालियर घराना) ने राग प्रदीप के साथ अपने गायन का आरम्भ किया एवं ब्रज के भक्ति रस के साथ होली के आनन्ददायी गीतों की सुमधुर प्रस्तुतियाँ प्रदान की।  कार्यक्रम में युवा गायन प्रस्तुति में संगीत एवं मंचकला संकाय, बीएचयू की छात्रा सुश्री राधिका मिश्रा ने काशी के सुप्रसिद्ध होली के गीतों से दर्शकों का मुग्ध कर दिया तथा अपनी मनमोहक प्रस्तुतियाँ का समापन ‘खेलें मसाने की होली’ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन प्रस्तुतियों में संगत कलाकार के रूप में तबले पर श्री आनंद कुमार मिश्रा तथा गोविन्द मिश्रा एवं समवादिनी पर श्रीमती प्रतिभा तलेगाँवकर एवं श्री कृष्णकुमार तिवारी ने सहभागिता की।

कला केन्द्र की परम्परानुसार कार्यक्रम का शुभारम्भ द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण एवं संस्कार भारती के ध्येय गीत से हुआ। इसके पश्चात् कला केन्द्र के निदेशक डॉ० अभिजित् दीक्षित ने स्वागत भाषण के दौरान उपस्थित श्रोता समूह से आगंतुक कलाकारों का परिचय कराते हुए कहा कि, ‘परा और अपरा विद्या के ज्ञान संयोजन में नाद की महत्ता व्याख्यायित है, उन्होंने संगीत के रंगोत्सव से सम्बन्ध की इसे अलौकिक आनन्द प्राप्ति का सहज मार्ग बताया। इसके पश्चात् श्री ईशान घोष (संगीत एवं मंचकला संकाय, बीएचयू, वाराणसी) ने सांगीतिक वक्तव्य देते हुये राग एवं आनन्द के साथ रंगोत्सव की तारतम्यता को प्रकाशित करते हुये इस मूलतत्त्व की सुन्दर व्याख्या प्रस्तुत की।

कार्यक्रम के अन्त में संस्कार भारती, काशी महानगर के अध्यक्ष डॉ रामवीर शर्मा ने उपस्थित कलाकारों तथा श्रोता समूह के प्रति धन्यवादयक्त किया गया और आगामी मासिक कड़ी में अधिकाधिक सहभागिता का आमंत्रण दिया गया। कार्यक्रम का संचालन संगीत एवं मंचकला संकाय, बीएचयू, वाराणसी  के श्री कृष्ण कुमार तिवारी ने संयत एवं प्रभावशाली श्ौली में किया। यह आयोजन इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, के परिसर में सम्पन्न हुआ, जहाँ उपस्थित वाराणसी के वरिष्ठ विद्वानों, कलाकारों, विद्यार्थियों एवं कलासुधियों ने “नाद यात्रा” की इस मासिक श्रृंखला को काशी की सांस्कृतिक धारा से जुड़ने वाला सार्थक प्रयास बताया। कार्यक्रम के दौरान प्रो. वीरेंद्र कुमार, डॉ० रामशंकर, डॉ विनीता जी, डॉ० कुमार अम्बरीश चंचल, सुश्री सरोज वर्मा, श्री प्रमोद पाठक, महामंत्री संस्कार भारती, काशी महानगर, डॉ० प्रेम नारायण सिंह, संजय सिंह, श्री दीपक शर्मा संगठन मन्त्री, संस्कार भारती, काशी महानगर, सुश्री तनुश्री रॉय आदि संस्कारभारती के वरिष्ठ सदस्यों तथा काशी के विभिन्न कलासुधियों एवं विद्वानों के अतिरिक्त काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।

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