लोक और शास्त्र का समायोजन करती है काशी की नादयात्रा

वाराणसी/ काशी के माहात्म्य की चेतना की जागृति के लिये काशी की संगीत परंपरा भी एक अतुलनीय ज्ञान मार्ग है और इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र का क्षेत्रीय केन्द्र, वाराणसी इसका संवाहक एवं संरक्षक है, इसके अनुरूप कला केन्द्र द्वारा संस्कार भारती काशी प्रान्त के सहयोग से अपने सभागार में  30 जुलाई, 2025 को नादयात्रा शृंखला का आयोजन किया गया। इस संगीतमय कार्यक्रम की मुख्य गायिका डॉ० संगीता पण्डित (उपशास्त्रीय गायिका, एवं संकाय प्रमुख, संगीत एवं मंच कला संकाय) थीं। उनके साथ गायन सहयोग में सुश्री निवेदिता श्याम, सुश्री अलका कुमारी, सुश्री शमयिता पांजा थी। डॉ. पंडित के साथ तबले पर संगत कर रहे थे पं. ललित कुमार, सारंगी संगति अनीश मिश्रा तथा हारमोनियम पर थे डॉ. इन्द्रदेव चौधरी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे, श्याम कृष्ण अग्रवाल (वरिष्ठ समाजसेवी, वाराणसी)।

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परम्परानुसार कार्यक्रम का शुभारम्भ निदेशक डॉ. अभिजित् दीक्षित द्वारा अध्यक्ष एवं आगंतुक कलाकारों का माल्यार्पण एवं अंग वस्त्रम् के साथ सम्मानित किया गया। उन्होंने नादयात्रा की संकल्पना को परिभाषित करते हुये, ‘परब्रह्म की उपासना के सम्बन्ध में उपनिषदों का मानना है कि हमें मूल रूप की उपासना करनी चाहिए जो हमें रस के रूप में प्राप्त होता है इसी रस स्वरुप को आज लोकसंगीत के रूप में प्राप्त करने का प्रयास हम करेंगे। उन्होंने कला केन्द्र में कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए सभी आगंतुक कलाकारों एवं मुख्य अतिथि का स्वागत किया। सांगीतिक वक्तव्य प्रदान करते हुये काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंचकला विभाग के प्रशिक्षु शुभम गोस्वामी ने वर्षा ऋतु तथा संगीत के समसम्बन्ध को विशेष रूप से व्याख्यायित किया।

इसके बाद अपने मुख्य अतिथि उद्बोधन में श्याम कृष्ण अग्रवाल ने इस महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम के आयोजन के लिये सभी को साधुवाद दिया तथा कार्यक्रम के प्रकल्प को शुभकामनायें दी। कार्यक्रम में प्रथम प्रस्तुति के रूप में वंशी वादन करते हुये सुधीर कुमार गौतम ने राग यमन के साथ प्रारम्भ करते हुये कजरी के सुमधुर गीतों को बांसुरी की मधुर तान में पिरोया। वरिष्ठ कलाकार एवं मुख्यगायिका डॉ० संगीता पण्डित ने अपनी प्रस्तुतियों में सावनी ठुमरी – अब के सावन घर आजा, एवं बरसाती दादरा के रूप में- घिर आई काशी बदरिया, सावन झरि लगो धीरे-धीरे, कहनवा मानों ओ राधारानी तथा काहे करेलु गुमान गोरी सावन में जैसी कर्णप्रिय प्रस्तुतियों द्वारा सभी श्रोताओं का मनमोह लिया।

कार्यक्रम के अन्त में डॉ. रामवीर शर्मा जी ने उपस्थित कलाकारों तथा श्रोता समूह के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रेरणा चतुर्वेदी ने किया। उक्त कार्यक्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी, के विविध छात्र-छात्राओं के साथ साथ आचार्यगणों ने सभा में सहभागिता की।

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