नौगढ़ में न तो विद्यालयों का हुआ कायाकल्प न तो सुधरे अधिकारी…..

स्कूलों के कायाकल्प के लिए बैठकें होती रहीं, चेतावनियां दी जाती रहीं… नौगढ़ के बच्चे आज भी असुरक्षित

NTPC

नौगढ़, चन्दौली ।( विशेष सम्वाददाता ) जिले में प्रशासनिक सुधारों और जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के सख्त समीक्षा बैठकों के दावों के बीच तहसील नौगढ़ में क्षेत्र की जमीनी सच्चाई सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। सोनभद्र सीमा से सटा प्राथमिक विद्यालय पड़रिया कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि यह उन दर्जनों विद्यालयों की तस्वीर है, जहां आज भी बाउंड्री वॉल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं मौजूद नहीं हैं।

आपको बता दें कि नौगढ़ क्षेत्र के कई सरकारी विद्यालय वर्षों से खुले परिसर में संचालित हो रहे हैं। बाउंड्री वॉल के अभाव में स्कूल परिसरों में अराजक तत्वों और आवारा पशुओं की बेरोकटोक आवाजाही बनी रहती है। जिन जगहों पर बच्चों का भविष्य संवरना चाहिए, वहां असुरक्षा और अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है।

गरिमा पर चोट – स्कूल में शौचालय नहीं, बच्चियों को जंगल जाना मजबूरी

सबसे शर्मनाक और संवेदनशील स्थिति शौचालयों को लेकर है। कई विद्यालयों में आज तक शौचालय नहीं बने हैं। मजबूरी में बच्चों—खासतौर पर छात्राओं—को शौच के लिए खेतों और जंगलों का सहारा लेना पड़ता है। यह स्थिति सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर करती है और बच्चों की गरिमा व सुरक्षा पर सीधा आघात करती है।

दावे ऊपर, डर नीचे,  दिन में पढ़ाई, शाम को अराजकता 

यह नौगढ़ के कई स्कूलों की रोजमर्रा की तस्वीर बन चुकी है। प्रशासनिक बैठकों में सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर सख्ती दिखाई जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस हैं। सवाल यह है कि अगर जिलाधिकारी की चेतावनियों का असर होता, तो नौगढ़ के बच्चे आज भी इस डर के साए में क्यों पढ़ रहे होते? ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर खंड शिक्षा अधिकारी और संपूर्ण समाधान दिवस तक बार-बार शिकायतें की गईं, लेकिन कार्रवाई कागजों से बाहर नहीं आई। निरीक्षण और जवाबदेही के अभाव में समस्या लगातार गहराती जा रही है।

पूरे नौगढ़ का सवाल

यह मामला अब किसी एक विद्यालय का नहीं रह गया है। यह नौगढ़ के हर उस बच्चे का सवाल है, जो सुरक्षित स्कूल, सम्मानजनक वातावरण और बुनियादी सुविधाओं का हकदार है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि बाउंड्री वॉल और शौचालय निर्माण को लेकर तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि किसी अनहोनी से पहले व्यवस्था सुधर सके।

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