उद्गार’ की 132वी कवि गोष्ठीे का भव्य आयोजन

उद्गार’ साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था द्वारा स्याही प्रकाशन के उद्गार सभागार में मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन संपन्न

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काशी। नगर के साहित्यिक परिदृश्य में निरंतर सक्रिय ‘उद्गार’ साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था द्वारा स्याही प्रकाशन के उद्गार सभागार में मासिक कवि गोष्ठी का भव्य, गरिमामयी एवं अत्यंत सफल आयोजन संपन्न हुआ। इस साहित्यिक समागम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. डी. आर. विश्वकर्मा ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात कवि एवं चिंतक डॉ. राकेश चंद्र पाठक ‘महाकाल’ तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में  एन. बी. सिंह की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और ऊँचाई प्रदान की। गोष्ठी में स्याही प्रकाशन के प्रकाशक एवं प्रधान संपादक पंडित छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’ की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम का सशक्त, संतुलित एवं प्रभावशाली संचालन सुप्रसिद्ध कवि सुनील कुमार सेठ द्वारा किया गया, जिन्होंने मंच को पूरे समय जीवंत बनाए रखा।

इस अवसर पर साहित्य जगत के वरिष्ठ रचनाकार डॉ. दयाराम विश्वकर्मा, जगदीश नारायण गुप्त, डॉ. राकेश चंद्र पाठक ‘महाकाल’ एवं  तेजबली पाल ‘अनपढ़’ के जन्ममास का सामूहिक रूप से हर्षोल्लास के साथ आयोजन किया गया। सभी सम्मानित साहित्यकारों को अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं साहित्यिक सम्मान प्रदान कर उनके दीर्घायु, स्वस्थ एवं सृजनशील जीवन की मंगलकामनाएँ दी गईं।

कवि गोष्ठी में अनेक प्रतिष्ठित एवं सक्रिय साहित्यकारों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से डॉ. लियाकत अली ‘जलज’, डॉ. अनिल सिन्हा ‘बहुमुखी’, चन्द्र भूषण सिंह, आशिक बनारसी, नन्दलाल राजभर ‘नंदू’, रामनरेश पाल, जी. एल. पटेल ‘अयन’, विदुषी सहाना, मुनिन्द्र पांडेय ‘मुन्ना’, जयप्रकाश मिश्रा ‘धानापुरी’, कैलाश यादव, विजय चंद्र त्रिपाठी, दिनेश दत्त पाठक, विमल बिहारी, सिद्धनाथ शर्मा ‘सिद्ध’, श्रीमती उषा पांडेय ‘कंचन’, विनय कुमार गुप्ता ‘तन्हा’, कुंवर ‘नाजुक’, आनंद पाल, बाबा रामचंद्र, अलियार प्रधान, राजेंद्र प्रसाद गुप्त ‘बावरा’, जीउत लाल विश्वकर्मा, बैजनाथ प्रसाद श्रीवास्तव, देवेंद्र पांडेय, दीपक श्रीवास्तव ‘दबंग’ सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी सहभागिता से गोष्ठी को यादगार बनाया।

गोष्ठी में प्रस्तुत रचनाओं में देश, समाज, संस्कृति, प्रेम, मानवीय संवेदना एवं समसामयिक सरोकारों की सशक्त अभिव्यक्ति देखने को मिली, जिसे श्रोताओं ने करतल ध्वनि के साथ सराहा। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. डी. आर. विश्वकर्मा ने साहित्य को समाज का दर्पण बताते हुए ऐसे आयोजनों को रचनात्मक संवाद और वैचारिक चेतना का सशक्त मंच बताया। वहीं मुख्य अतिथि डॉ. राकेश चंद्र पाठक ‘महाकाल’ ने कवियों से निरंतर साधना, प्रतिबद्ध लेखन और साहित्य सेवा के पथ पर अग्रसर रहने का आह्वान किया।कार्यक्रम का समापन अंचला पांडेय द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ आत्मीय, सौहार्दपूर्ण एवं सकारात्मक वातावरण में सम्पन्न हुआ। साहित्य प्रेमियों के लिए यह कवि गोष्ठी एक सार्थक, प्रेरक एवं स्मरणीय आयोजन सिद्ध हुई।

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