राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने राजकीय बाल गृह बालिका रामनगर का किया निरीक्षण 

निराश्रित बालिकाओं से संवाद कर उन्हें प्रेरित किया

NTPC

वाराणसी। प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने गुरुवार महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित राजकीय बाल गृह बालिका रामनगर का निरीक्षण कर वहां की बालिकाओं के साथ संवाद किया। निरीक्षण के समय जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलपति आनंद त्यागी, रजिस्ट्रार डॉक्टर सुनीता पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज कुमार मिश्रा, जिला कार्यक्रम अधिकारी दिनेश कुमार सिंह उपस्थित थे।

      इस अवसर पर बालिकाओं के साथ संवाद करते हुए राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने उनके द्वारा साझा किए गए सफलता की कहानी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रतीत हो रहा है कि महिला कल्याण विभाग बालिकाओं के विकास के लिए अच्छा कार्य कर रही है। संस्था में निवासरत बालिकाओं को रोजगार परक प्रशिक्षण देने हेतु जिलाधिकारी तथा कुलपति काशी विद्यापीठ को निर्देश दिया गया। उन्होंने संस्था की विजिटिंग डॉक्टर से बालिकाओं के स्वास्थ्य की जानकारी ली। 2 गर्भवती बालिकाओं तथा 4 बच्चों वाली बालिकाओं को अतिरिक्त आहार तथा नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, उनका हीमोग्लोबिन के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बालिकाओं के साथ संवाद में कंप्यूटर तथा एआई का उपयोग करने के बारे में चर्चा की तथा बालिकाओं के अध्ययन कक्ष, भंडार कक्ष, रसोई कक्ष का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

       राज्यपाल के आगमन पर संस्था की बालिकाओं द्वारा तबला वादन के साथ स्वागत किया गया, उसके पश्चात भजन “नगरी हो आयोध्या सी रगहुकुल सा घराना हो” हारमोनियम के साथ सुनाया गया। जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज कुमार मिश्रा द्वारा अपने स्वागत भाषण में संस्था के बारे में तथा बाल गृह बालिका में संचालित कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। उसके पश्चात संस्था से रोजगार के माध्यम से पुनर्वासित 5 बालिकाओं ने अपने अनुभव प्रस्तुत किया। जिनमें से 2 उत्कर्ष बैंक हरहुआ में कार्यरत हैं तथा 4 जीडी गोयनका हेल्थ इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग के साथ ही अपनी स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं।

       बताते चलें कि राजकीय बाल गृह बालिका, एक आवासीय संस्था है जो महिला कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित है। जिसमें 11 से 18 वर्ष की आयु की बालिकाओं को आश्रय प्रदान किया जाता है, जो अनाथ, POCSO एक्ट के तहत पीड़ित, बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति, बाल विवाह, बाल मिसिंग, गृह से पलायित जो किसी कारणवश घर छोड़ देती हैं, जैसे प्रकरणों से प्रभावित होती हैं।

       

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