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अक्षम सरकारों के विरुद्ध जेन जी का बढ़ता आक्रोश

अक्षम सरकारों के विरुद्ध जेन जी का बढ़ता आक्रोश

- सुरेश सिंह बैस विभिन्न देशों में बढ़ता जेन जी (Gen Z) का आक्रोश सरकारों की असफलता के लक्षण भी हैं और युवा पीढ़ी की जागरूक, व्यथित प्रतिक्रिया का परिचायक भी है। यह सिर्फ उच्च्श्रंखिल आक्रोश नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक असंतोष का परिणाम है। नेपाल में करीब 70 दिन पहले जेन जी के नेतृत्व में हुए उग्र प्रदर्शन ने पिछले प्रधानमंत्री ओली की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था, लेकिन ताजातरीन हालात बता रहे हैं कि नई अंतरिम सरकार के साथ भी जन असंतोष, गहरी निराशा और आंदोलन की भावना कम नहीं हुई है। जेन जी प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें भ्रस्ताचार खत्म करना, पारदर्शिता, जल्दी चुनाव, और संसद…
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लाखों भारतीय ट्रंप के एच1बी वीजा बम से सीधे प्रभावित होंगे….

लाखों भारतीय ट्रंप के एच1बी वीजा बम से सीधे प्रभावित होंगे….

ब्रह्मानंद राजपूत टैरिफ को लेकर मची खलबली के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने एच-1बी वीजा पर वार्षिक 1,00,000 डॉलर की नई फीस लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में जिस एग्जिक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किया है, उससे एच-1बी वीजा व्यवस्था में बड़े बदलाव आए हैं। अब से कोई भी व्यक्ति अमेरिका जाने के लिए एच-1बी वीजा के लिए आवेदन करेगा, तो उसके नियोक्ता को प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में 1 लाख डॉलर (करीब ₹83 लाख) का भुगतान करना होगा। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह…
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स्कूली बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य: एक सामूहिक जिम्मेदारी

स्कूली बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य: एक सामूहिक जिम्मेदारी

 डॉ. मनोज कुमार तिवारी , वरिष्ठ परामर्शदाता  एआरटीसी, एस एस हॉस्पिटल, आईएमएस, बीएचयू, वाराणसी  आज के दौर में स्कूली बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और उस पर ध्यान देना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। बच्चे हमारे समाज और राष्ट्र का भविष्य हैं, और एक स्वस्थ भविष्य की नींव उनके शारीरिक और मानसिक कल्याण पर ही टिकी होती है। जिस प्रकार हम उनके शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर सजग रहते हैं, उसी प्रकार उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी अनिवार्य है। बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य की चिंताजनक स्थिति आधुनिक जीवनशैली और प्रतिस्पर्धा के इस युग में बच्चे छोटी उम्र से ही कई तरह के दबावों…
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आम आदमी के साथ थे मुंशी प्रेमचंद……

आम आदमी के साथ थे मुंशी प्रेमचंद……

भोलानाथ मिश्र, पत्रकार कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानियां 31 जुलाई, 2025, को उनकी 145वीं जयंती पर भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी उस समय थीं जब इन्हें लिखा गया था। 31 जुलाई, 1880 ई. को उत्तर प्रदेश में वाराणसी के निकट लमही गांव में जन्में अमर कथाकार प्रेमचंद हिन्दी-उर्दू कथा साहित्य की कर्मभूमि बदलकर, यथार्थवादी काया-कल्प करने वाले एक ऐसे कथा शिल्पी हैं, जो आम आदमी के साथ थे। उनकी कहानियों के पात्र आजादी के अमृतकाल में भी स्थान-स्थान पर देखे जा सकते हैं। धनपत राय श्रीवास्तव 8 अक्टूबर, 1936 को इस संसार से तो विदा हो गए, लेकिन करीब…
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इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा

इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा

भोलानाथ मिश्र 25 जून, 2025 को भारत में आपातकाल लगने के 50 साल पूरे हो जाएंगे। 25 जून, 1975 को आपातकाल घोषित हो गया था। 21 महीने तक संविधान के अनुसार नहीं, बल्कि सरकार की इच्छा के अनुसार देश चला। नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित थे। इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के बड़े नेता राहुल गांधी की दादी तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई थी। राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इंदिरा जी की सिफारिश पर आपातकाल की घोषणा की थी। पूरे देश में प्रेस की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई थी। समाचार सेंसर किए जाने लगे। लोकसभा का…
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कश्मीर को बचाने में श्री गुरुजी  की भूमिका……

कश्मीर को बचाने में श्री गुरुजी  की भूमिका……

भोलानाथ मिश्र, पत्रकार / प्राध्यापक ___________________________  अपरेशन ' सिंदूर ' को सफल हुए एक माह से ऊपर हो गए हैं । विभिन्न राजनीतिक दलों से निर्वाचित  जनप्रतिनिधियों के 7 दल 35 देशो में जाकर पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों और पहलगांव की जघन्य निर्मम निर्दोष पर्यटकों की हत्या का भारत के पराक्रमी सैन्य बल द्वारा की गई टारगेटेड कार्रवाई की जानकारी दे कर स्वदेश लौट रहे हैं । अमेरिका के बड़बोले बयानबाज डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट को लेकर कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी द्वारा ' नरेंद्र , सरेंडर ' वाला बयान चर्चाओं में है । विपक्ष के कई नेता और प्रवक्ताओं…
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1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान रहा है वीरांगना अवंतीबाई लोधी का

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान रहा है वीरांगना अवंतीबाई लोधी का

(वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी के 167वें बलिदान दिवस 20 मार्च 2025 पर विशेष) आज भी भारत की पवित्र भूमि ऐसे वीर-वीरांगनाओं की कहानियों से भरी पड़ी है जिन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश के आजाद होने तक भिन्न- भिन्न रूप में अपना अहम योगदान दिया। लेकिन भारतीय इतिहासकारों ने हमेशा से उन्हें नजरअंदाज किया है। देश में सरकारों या प्रमुख सामाजिक संगठनों द्वारा स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े हुए लोगों के जो कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं वो सिर्फ और सिर्फ कुछ प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के होते हैं। लेकिन बहुत से ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हैं जिनके…
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रस- रंग -भंग-व्यंग्य : चले थे मनाने…..”होली”

रस- रंग -भंग-व्यंग्य : चले थे मनाने…..”होली”

      - सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"            किस्सा कुछ पुराना है। कुछ सालों पूर्व की घटना है। होली का त्योहार आने वाला था मेरा मित्र प्रदीप उपाध्याय जो पेण्ड्रा तहसील में जटगा-पसान के रास्ते के मध्य में पड़ने वाला एक छोटा सा गांव है बांधापारा, जो घनघोर जगलों (फिलहाल तो जितने जंगल बचे हैं उनमें तो यहां के जंगल अभी भी सुरक्षित बचे हुए हैं। ) के बीच मात्र बीस तीस घरों का छोटा सा गांव है।              वहीं वह प्राध्यापक के पद पर पदस्थ था। एक दो दिनों…
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प्रगतिशील भारत के निर्माण में समर्पित होने का संकल्प लेने का दिन है गणतंत्र दिवस

प्रगतिशील भारत के निर्माण में समर्पित होने का संकल्प लेने का दिन है गणतंत्र दिवस

(76 वें गणतंत्र दिवस पर विशेष आलेख) गणतंत्र शब्द का साधारण अर्थ है ’’लोगों का तंत्र’’ यानी कि जिस संविधान द्वारा हमारे देश में कानून का राज स्थापित है, उस संविधान से ही हमारे देश के तंत्र को मजबूती मिलती है और उसी तंत्र को भारतवासी मानते हैं। इसलिए हमारे देश को गणतांत्रिक देश बोला जाता है। हमारे देश में हमेशा से लोगों के लिये संविधान का एक अहम स्थान है। गणतंत्र दिवस हर वर्ष जनवरी महीने की 26 तारीख को पूरे देश में देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत होकर मनाया जाता है। भारत के लोग हर साल 26…
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