रांची । 77वें गणतंत्र-दिवस के अवसर पर सीएमपीडीआई के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक चौधरी शिवराज सिंह ने रांची स्थित मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और सभी हितधारकों को बधाई दी। इसके पूर्व, श्री सिंह ने गार्ड आफ आनर ग्रहण किया, परेड टुकड़ियों का निरीक्षण किया और मार्चिंग टुकड़ियों से सलामी ली। श्री सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि ‘‘वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 11 लाख मीटर ड्रिलिंग के लक्ष्य के मुकाबले, सीएमपीडीआई ने दिसम्बर, 2025 तक 7.56 लाख मीटर ड्रिलिंग की है, जिसमें से 2.87 लाख मीटर विभागीय संसाधनों के माध्यम से की गयी है। साथ ही, 450 लाइन किलोमीटर 2डी/3डी सिस्मिक सर्वे के विभागीय लक्ष्य के मुकाबले दिसम्बर, 2025 तक 207 लाइन किलोमीटर सिस्मिक सर्वे किया जा चुका है। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक (तकनीकी/सीआरडी) शंकर नागाचारी, निदेशक (तकनीकी/ईएस) राजीव कुमार सिन्हा, निदेशक (तकनीकी/आरडीएंडटी) नृपेन्द्र नाथ, सीएमपीडीआई और सीसीएल के मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री पंकज कुमार, महाप्रबंधक एवं विभागाध्यक्ष, जेसीसी सदस्य, श्रमिक प्रतिनिधि, सीएमओएआई के प्रतिनिधि तथा सीएमपीडीआई परिवार के सदस्य उपस्थित थे।

सिंह ने कहा कि गैर-कोयला क्षेत्र में सीएमपीडीआई ने झारखंड राज्य में एक बेस मेटल और एक बाॅक्साइट ब्लाॅक में गवेषण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इसके अतिरिक्त, झारखंड में एक मेग्नेटाइट ब्लाॅक और मध्य प्रदेश में एक काॅपर और ग्रेफाइट ब्लाॅक में गवेषण कार्य जारी है। साथ ही, ओडिशा के डीजीओ ने सीएमपीडीआई को ग्रेफाइट गवेषण के लिए दो ब्लाॅक आवंटित किए हैं। इस परियोजना के माध्यम से सीएमपीडीआई ने ओडिशा राज्य में गैर-कोयला गवेषण क्षेत्र में अपनी उपस्थिति स्थापित की है, जहां जीएसआई, एमईसीएल और ओएमसी जैसी प्रमुख एजेंसियां सक्रिय हैं।
श्री सिंह ने बताया कि कोल इंडिया ने चालू वित्तीय वर्ष के लक्ष्य जो कि 875 मिलियन टन कोयला उत्पादन है, के मुकाबले 24.01.2026 तक 590 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया है। भारत के कुल कोयला उत्पादन में कोल इंडिया की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त, कोल इंडिया 24.01.2026 तक 596 मिलियन टन कोल आफटेक और 1565 मिलियन घन मीटर ओवर बर्डेन (ओबी) की निकासी दर्ज की। दिसम्बर, 2025 तक 21 भूवैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार की गईं। इनके माध्यम से लगभग 6 बिलियन टन अतिरिक्त कोयला भंडार में प्रमाणिक श्रेणी में और 630 मिलियन टन को अनुमानित श्रेणी में जोड़ा गया। आगे उन्होंने बताया कि सीएमपीडीआई ने नेशनल रिमोट सेंसिंग सेटर/इसरो और बीसीसीएल के साथ समझौता ज्ञापनों के माध्यम से भूमि सर्वे के प्रबंधन और भूमिगत कोयला आग प्रबंधन में प्रगति की है, जिसमें जमीनी सर्वेक्षणों के अलावा उपग्रह/एनआईएसएआर डेटा को भी एकीकृत किया गया है। इस दिशा में, झरिया कोयला क्षेत्र के लिए पहली आग मानचित्रण रिपोर्ट तैयार करके प्रस्तुत कर दी गई है।
सीआईएल की विविधीकरण रणनीतियो के अनुरूप, सीएमपीडीआई भूमिगत कोयला गैसीकरण के विकास के लिए प्रयासरत है। सीएमपीडीआई, ईसीएल और एर्गो एक्सर्जी (कनाडा) ने 31 मई, 2025 को ईसीएल के कास्ता ब्लाॅक में यूजीसी अनुसंधान एवं विकास का पहला चरण पूरा किया। जून, 2025 में शुरू होने वाले दूसरे चरण में झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी के बाद सिंथेटिक गैस उत्पादन के लिए एक पायलट संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, बीसीसीएल के झरिया ब्लाॅक-1 (गवेषण चरण) में सीबीएम परीक्षण कुओं की ड्रिलिंग शुरू हो गई है। इनसे प्राप्त गैस उत्पादन डेटा सीबीएम ब्लाॅक की वास्तविक गैस उत्पादन क्षमता का आकलन करने और वाणिज्यिक उत्पादन के लिए आवश्यक क्षेत्र विकास योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सीएमपीडीआई ने सीआईएल की सभी सक्रिय और परित्यक्त खदानों के लिए व्यापक जल उपयोग अध्ययन किया, जिसकी कोयला मंत्रालय ने काफी सराहना की। इस अध्ययन के माध्यम से छह राज्यों में 22 पायलट परियोजना स्थलों की पहचान की गयी है, जहां खदान के पानी का बड़े पैमाने पर उपचार किया जाएगा और इसका उपयोग सिंचाई, पेयजल और बोतलबंद पानी के लिए किया जाएगा। यह पहल स्वच्छ जल, स्वच्छता और जलवायु परिवर्तन से संबंधित भारत के संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
सीएमपीडीआई ने सीआईएल की विभिन्न सहायक कंपनियों के लिए पारंपरिक जल निकायों के संरक्षण, जीर्णोद्धार और पुनरूद्धार हेतु चार माॅडल विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की हैं और उन्हें कार्यान्वयन के लिए सीआईएल को प्रस्तुत किया है।
जीईएफ-सीबीआईटी कार्यक्रम के तहत, सीएमपीडीआई और आईआईटी-आईएसएम, धनबाद की परियोजना ‘‘परित्यक्त कुओं और कोयला खानों से ग्रीनहाउस गैसों का आकलन’’ को एमओईएफ एंड सीसी की मंजूरी मिल गई है। यह पहल सीएमपीडीआई को जलवायु प्रभाव आकलन और शमन के राष्ट्रीय प्रयासों में अग्रणी स्थान पर रखती है।
एमसीएल में नाॅक-कोकिंग कोल वाशरी और रिजेक्ट आधारित पावर प्लांट स्थापित करने की संभावनाओं पर एक कांसेप्ट नोट तैयार किया गया है। इस अवसर पर सीएमपीडीआई ने अपनी पहली द्विमासिक तकनीकी पुस्तिका ‘टेकविस्टा’ का विमोचन किया। इस पुस्तिका का उद्देश्य कोल इंडिया के पेशेवरों की विशेषज्ञता, सर्वाेत्तम कार्यप्रणालियों और नवोन्मेषी विचारों को दस्तावेजीकरण और प्रसारित करने के लिए एक मंच प्रदान करके तकनीकी उत्कृष्टता और ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना है, जिससे वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान ज्ञान भंडार का निर्माण हो सके।
सीएमपीडीआई के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री चौधरी शिवराज सिंह, निदेशक (तकनीकी/सीआरडी) शंकर नागाचारी, निदेशक (तकनीकी/ईएस) राजीव कुमार सिन्हा, निदेशक (तकनीकी/आरडीएंडटी) नृपेन्द्र नाथ ने पहली तकनीकी पुस्तिका ‘‘टेकविस्टा’’ का विमोचन किया। समापन भाषण में श्री सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के बदलते ऊर्जा परिदृश्य में, सीएमपीडीआई को उच्च दक्षता और निर्णय क्षमता के साथ खनन परामर्श में अग्रणी बनने के लिए एआई/एमएल के माध्यम से स्वचालन और आधुनिकीकरण करना चाहिए। विभागों को विविधीकरण करना चाहिए, डिजिटलीकरण अपनाना चाहिए और राजस्व के नए अवसरों की तलाश करनी चाहिए।

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