बुलंदशहर। खुर्जा परियोजना में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केमिकल इमरजेंसी मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य यह जांचना था कि किसी भी रासायनिक आपात स्थिति में अधिकारी और कर्मचारी कितनी जल्दी और सही तरीके से काम कर सकते हैं। यह मॉक ड्रिल राष्ट्रीय आपदा मोचक बल, गाजियाबाद के मार्गदर्शन में कराई गई।

केमिकल इमरजेंसी मॉक ड्रिल से वास्तविक दुर्घटना के समय त्वरित और सुरक्षित प्रतिक्रिया देने में मदद मिलती है। इससे आपात योजनाओं, संचार व्यवस्था और सुरक्षा उपकरणों की जांच होती है। साथ ही, कर्मचारियों को निकासी मार्गों और सुरक्षा नियमों की जानकारी मिलती है। नियमित अभ्यास से डर कम होता है और किसी भी आपात स्थिति के लिए बेहतर तैयारी हो जाती है। मॉक ड्रिल के दौरान केमिकल रिसाव की एक काल्पनिक स्थिति बनाई गई, ताकि आपात स्थिति से निपटने की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया जा सके। इसमें यह देखा गया कि सूचना देने, बचाव कार्य करने और स्थिति को नियंत्रित करने में कितना समय लगता है। अभ्यास के दौरान रेस्क्यू कार्य, प्राथमिक उपचार एवं सुरक्षा उपायों का प्रदर्शन किया गया। सभी संबंधित विभागों ने आपसी सहयोग से अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
बिनोद साहू मुख्य महाप्रबंधक (परियोजना) ने इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि नियमित मॉक ड्रिल से आपात स्थिति में जान-माल की सुरक्षा बेहतर तरीके से की जा सकती है। इस मॉक ड्रिल के दौरान NDRF, SDRF, जिला प्रशासन, THDC के समस्त अधिकारीगण, पुलिसकर्मी, फायर ब्रिगेड, Steag, Bhavani Staff तथा NCC कैडेट उपस्थित रहे। कार्यक्रम को आयोजित करने में सुरक्षा विभाग, मानव संसाधन एवं जनसंपर्क विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही|

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