काशी में सजेगा शब्दों और विचारों का महापर्व, साहित्य-पत्रकारिता की दिग्गज हस्तियां होंगी एक मंच पर

*17 फरवरी को अशोका इंस्टीट्यूट के प्रेक्षागृह में दो वरिष्ठ संपादकों को मिलेगा ‘जनमित्र पुरस्कार’, वरिष्ठ पत्रकार-लेखक विजय विनीत की तीन कृतियों पर मंथन*

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वाराणसी। गंगा के तट पर बसी काशी एक बार फिर शब्दों की उजास और विचारों की तापस परंपरा से आलोकित होने जा रही है। साहित्य और पत्रकारिता जगत की बड़ी-बड़ी हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति में 17 फरवरी 2026 (मंगलवार) को काशी में शब्द, विचार और संवाद का विराट महापर्व सजेगा। पहड़िया स्थित अशोका इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी एंड मैनेजमेंट के नवनिर्मित प्रेक्षागृह में पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न 2:30 बजे तक ‘एकाग्र परिचर्चा’ का आयोजन किया जाएगा। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बौद्धिक चेतना का उत्सव होगा, जहां साहित्य, समाज और समकालीन पत्रकारिता की दिशा पर गंभीर विमर्श आकार लेगा।

काशी की परंपरा रही है कि यहां शब्द साधना बनते हैं और विचार जीवन का पथ आलोकित करते हैं। इसी परंपरा के अनुरूप इस आयोजन का केंद्र वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रतिष्ठित लेखक विजय विनीत की तीन महत्वपूर्ण कृतियां-‘सपनों की पगडंडियाँ’, ‘पत्रकारिता एआई’ और ‘मैं इश्क लिखूं, तुम बनारस समझना’ रहेंगी। इन पुस्तकों पर एकाग्र परिचर्चा के माध्यम से साहित्य, समाज और बदलते जनसंचार माध्यमों की दिशा पर गंभीर मंथन होगा।

‘सपनों की पगडंडियाँ’ शिक्षाविद् प्रो. सुरेंद्र सिंह कुशवाहा की प्रेरणादायी उत्कर्ष यात्रा का संवेदनशील वृत्तांत है। यह पुस्तक केवल जीवनी नहीं, बल्कि संघर्ष, संकल्प और साधना की उस निरंतर साधना का आख्यान है, जिसमें विपरीत परिस्थितियों के बीच भी लक्ष्य से विचलित हुए बिना आगे बढ़ने की शक्ति दिखाई देती है। विजय विनीत ने अत्यंत सहज किंतु प्रभावशाली भाषा में यह रेखांकित किया है कि शिक्षा मनुष्य के व्यक्तित्व को गढ़ती है और आत्मविश्वास उसे ऊंचाइयों तक ले जाता है। पगडंडियों से राजमार्ग तक की यह यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती है और उन्हें यह विश्वास दिलाती है कि परिश्रम और धैर्य का कोई विकल्प नहीं।

परिचर्चा में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के निवर्तमान अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय, इतिहासकार एवं पूर्व सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी, बीएचयू में हिंदी विभाग के अध्येता प्रो. मनोज सिंह, नागरीप्रचारणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल, जाने-माने साहित्यकार रामजी यादव के अलावा नवभारत टाइम्स (लखनऊ) के संपादक सुधीर मिश्र एवं दैनिक अमृत विचार के समूह संपादक राजेश श्रीनेत एवं दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार-लेखक अभिषेक श्रीवास्तव जैसी प्रतिष्ठित हस्तियां अपने विचार रखेंगी। इन सभी की उपस्थिति आयोजन को विशिष्ट गरिमा प्रदान करेगी और विमर्श को व्यापक आयाम देगी।

कार्यक्रम के अंतर्गत चित्रकला और पुस्तक प्रदर्शनी का भी आयोजन होगा, जहां प्रकृति, सृजनशीलता और युवा चेतना के विविध आयाम सजीव रूप में सामने आएंगे। बनारस की चर्चित चित्रकार पूनम राय के संयोजन में रंगों और शब्दों का यह संगम आयोजन को बहुआयामी बनाएगा। साथ ही पत्रकारिता के विद्यार्थियों को वरिष्ठ संपादकों से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। यह संवाद उनके लिए केवल जिज्ञासाओं के समाधान का अवसर नहीं, बल्कि अनुभव और दृष्टि से समृद्ध होने का क्षण होगा।

‘जर्नलिज्म AI’ में बदलते दौर की पत्रकारिता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की गई है। समाचार संकलन, विश्लेषण और प्रस्तुति की नई पद्धतियों ने मीडिया जगत को नई गति दी है, किंतु इसके साथ नैतिक चुनौतियां भी सामने आई हैं। विजय विनीत ने इस कृति में स्पष्ट किया है कि तकनीक चाहे जितनी उन्नत हो जाए, पत्रकारिता का मूल आधार सत्य, संवेदना और जनपक्षधरता ही रहेगा। यदि इन मूल्यों की अनदेखी हुई तो पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम बनकर रह जाएगी, समाज की आत्मा का दर्पण नहीं।

‘मैं इश्क लिखूं, तुम बनारस समझना’ काशी की सांस्कृतिक आत्मा का भावपूर्ण चित्रण है। इस कृति में बनारस की गलियों की सहजता, घाटों की आरती की उजास, लोकजीवन की आत्मीयता और अध्यात्म की गहराई शब्दों में स्पंदित होती है। लेखक ने बनारस को केवल एक शहर नहीं, बल्कि एक अनुभूति, एक विचार और एक परंपरा के रूप में प्रस्तुत किया है। यहां प्रेम है, विरक्ति है, लोक है और शाश्वतता का भाव भी।

विजय विनीत लंबे समय से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। उन्होंने जनसरोकार, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक विषयों पर निर्भीक लेखन किया है। उनकी लेखनी में तथ्य की दृढ़ता और संवेदना की गहराई साथ-साथ चलती है। विभिन्न समाचार पत्रों में संपादकीय दायित्व निभाते हुए उन्होंने मूल्यनिष्ठ और जनपक्षधर पत्रकारिता को सशक्त स्वर दिया है। वे मानते हैं कि पत्रकारिता केवल घटनाओं का विवरण नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व का निर्वाह है।

कार्यक्रम की संयोजक ‘मेरा शहर’ की अध्यक्ष सोनल उपाध्याय के मुताबिक, संवाद कार्यक्रम के दौरान दो वरिष्ठ पत्रकारों को ‘जनमित्र पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान मानवाधिकार संरक्षण के लिए काम करने की संस्था पीवीसीएचआर की ओर से दिया जाएगा। इनमें नवभारत टाइम्स के संपादक सुधीर मिश्र और अमृत विचार के प्रधान संपादक राजेश श्रीनेत शामिल हैं।

वरिष्ठ पत्रकार राजेश श्रीनेत को जनमित्र सम्मान उनकी ईमानदार और सजग पत्रकारिता के प्रति समर्पण के लिए प्रदान किया जाएगा। वर्ष 2001 में जब वे बनारस में दैनिक हिन्दुस्तान के स्थानीय संपादक के रूप में तैनात थे, उस समय चंदौली के नौगढ़ क्षेत्र के कुबराडीह गांव में आदिवासियों की भूख से हो रही मौतों को जिस संवेदनशीलता और निर्भीकता से उन्होंने प्रकाशित किया, वह केवल एक समाचार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का दस्तावेज बन गया। उस रिपोर्ट ने प्रशासन को झकझोरा और आदिवासी जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की राह प्रशस्त की। यह उदाहरण पत्रकारिता की शक्ति और उसकी सामाजिक जिम्मेदारी का प्रमाण है।

वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक सुधीर मिश्र ने पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को पत्रकारिता के केंद्र में लाने का अभिनव प्रयोग किया। ‘आरोग्य वाटिका’ जैसे विचारों को प्रोत्साहित कर उन्होंने यह सिद्ध किया कि अख़बार केवल सूचना नहीं देता, बल्कि जीवन-पद्धति भी गढ़ता है। प्रकृति और मनुष्य के सह-अस्तित्व को सशक्त स्वर देने वाले इन रचनात्मक प्रयोगों ने समाज में नई चेतना का संचार किया। इन्हीं प्रयासों के लिए उन्हें जनमित्र पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

सोनल उपाध्याय ने कहा है कि यह आयोजन केवल पुस्तक चर्चा नहीं, बल्कि साहित्य, विचार और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है। काशी की बौद्धिक परंपरा को नई ऊर्जा देने वाला यह ‘पुस्तक पर्व’ शहर के सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने जा रहा है। जब शब्दों में संवेदना और विचारों में उत्तरदायित्व का संगम होता है, तब समाज में परिवर्तन की संभावना जन्म लेती है। 17 फरवरी का यह आयोजन उसी संभावना का उत्सव होगा, जहां साहित्य आत्मा को स्पर्श करेगा, पत्रकारिता समाज को दिशा देगी और संवाद भविष्य की राह को प्रकाशित करेगा। काशी एक बार फिर यह प्रमाणित करने जा रही है कि वह केवल आस्था की नगरी नहीं, बल्कि विचार और चेतना की भी राजधानी है।

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