भारत की न्याय प्रणाली को सुदृढ़ बनाने में फॉरेंसिक साइंस की निर्णायक भूमिका – डॉ. अर्नीत अरोड़ा

न्याय की बुनियाद “एविडेंस बेस्ड ट्रुथ” पर टिकी है – वी. सी. विवेकानंदन

एचएनएलयू में “फॉरेंसिक साइंस एंड लॉ का इंटरफेस: शेपिंग द फ्यूचर ऑफ क्रिमिनल जस्टिस इन इंडिया” विषय पर दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सम्पन्न
रायपुर/ हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एचएनएलयू), रायपुर के स्कूल ऑफ लॉ एंड टेक्नोलॉजी के अंतर्गत स्थित सेंटर फॉर लॉ एंड फॉरेंसिक्स द्वारा “इंटरफेस ऑफ फॉरेंसिक साइंस एंड लॉ: शेपिंग द फ्यूचर ऑफ क्रिमिनल जस्टिस इन इंडिया” विषय पर दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का सफल आयोजन 7 एवं 8 नवम्बर 2025 को किया गया। यह कॉन्फ्रेंस स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एसएफएसएल), रायपुर, छत्तीसगढ़ और नेशनल फॉरेंसिक साइंसेस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) के सहयोग से आयोजित किया गया ।

उद्घाटन सत्र
कुलपति प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन ने अपने उद्घाटन संबोधन में विधि और विज्ञान के बीच पारस्परिक संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि न्याय की बुनियाद “एविडेंस बेस्ड ट्रुथ” पर टिकी है। उन्होंने फॉरेंसिक साइंस सेंटर से “फॉरेंसिक लॉ लैब्स” प्रारंभ करने का आग्रह किया, जिससे लॉ एंड साइंस की अंतःविषयक शिक्षा को तकनीकी प्रगति के अनुरूप विकसित किया जा सके।मुख्य अतिथि डॉ. अर्नीत अरोड़ा, हेड, डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी, एम्स भोपाल, ने भारत की न्याय प्रणाली को सुदृढ़ बनाने में फॉरेंसिक साइंस की निर्णायक भूमिका पर बल दिया तथा नैतिक रूप से सशक्त वैज्ञानिक एकीकरण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

विशिष्ट अतिथि डॉ. टी. एल. चंद्रा, जॉइंट डायरेक्टर, एसएफएसएल रायपुर, ने आपराधिक जांच में सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने हेतु तकनीकी मॉडर्नाइजेशन के महत्व पर चर्चा की। उद्घाटन सत्र की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि एचएनएलयू और एसएफएसएल रायपुर के मध्य मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर रहा, जिसका उद्देश्य विधि, फॉरेंसिक साइंस और क्रिमिनल जस्टिस के क्षेत्रों में एकेडमिक कोलैबोरेशन, जॉइंट रिसर्च और कैपेसिटी बिल्डिंग को बढ़ावा देना है। यह एमओयू डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव, रजिस्ट्रार, एचएनएलयू तथा डॉ. टी. एल. चंद्रा, जॉइंट डायरेक्टर, एसएफएसएल द्वारा माननीय कुलपति एवं अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में संपादित किया गया।

टेक्निकल सेशन्स एवं एकेडमिक पार्टिसिपेशन
दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में 19 टेक्निकल सेशन्स आयोजित किए गए, जिनकी अध्यक्षता 38 एक्सपर्ट्स ने की। इनमें एसएफएसएल, एनएफएसयू, आरजीएनयूएल, एनएलयू सोनीपत, डिपार्टमेंट ऑफ होम (गवर्नमेंट ऑफ छत्तीसगढ़) सहित अन्य प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं लॉ स्कूल्स के विद्वान शामिल थे। प्राप्त 340 से अधिक एब्स्ट्रैक्ट्स में से लगभग 140 रिसर्च पेपर्स प्रस्तुतिकरण हेतु चयनित किए गए, जिन्हें 170 पार्टिसिपेंट्स ने चार थीमैटिक ट्रैक्स में प्रस्तुत किया:

लीगल एडमिसिबिलिटी एंड एविडेंशियरी वैल्यू ऑफ फॉरेंसिक एविडेंस

ब्रिजिंग साइंस एंड जस्टिस: इनोवेशन्स इन क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन एंड बिहेवियरल एनालिसिस

लेजिस्लेटिव एंड पॉलिसी फ्रेमवर्क

कैपेसिटी बिल्डिंग, इंटरडिसिप्लिनरी कोलैबोरेशन एंड एथिकल कंसिडरेशन्स

कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न राज्यों छत्तीसगढ़, गुजरात, पंजाब, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, हरियाणा, केरल और दिल्ली के प्रतिभागियों सहित इंटरनेशनल डेलीगेट्स ने भी भाग लिया। प्रस्तुतियाँ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज, फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूशन्स, और सिंबायोसिस इंटरनेशनल एवं अलायंस यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से प्राप्त हुईं, जिससे कॉन्फ्रेंस की व्यापक एकेडमिक रेज़ोनेंस स्पष्ट हुई।

पैनल डिस्कशन और वैलेडिक्टरी सेशन
समापन सत्र के दौरान “फॉरेंसिक्स इन द एज ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: रिइमैजिनिंग जस्टिस, प्राइवेसी एंड ट्रुथ” विषय पर पैनल डिस्कशन आयोजित की गई, जिसमें प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन, श्री आर. मुरलीधरन (सीनियर एडवोकेट, बेंगलुरु) और डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने पैनलिस्ट के रूप में विचार साझा किए।
चर्चा में यह निष्कर्ष सामने आया कि यद्यपि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) साक्ष्य प्रक्रिया को नई दिशा दे सकती है, किंतु न्याय के मूल सिद्धांत — फेयरनेस, लिबर्टी और ह्यूमन डिग्निटी — सदैव केंद्र में रहने चाहिए। विमर्श का संचालन अभिनव के. शुक्ला, फैकल्टी एवं को-कन्वेनर ऑफ द कॉन्फ्रेंस, द्वारा किया गया। उद्घाटन सत्र में स्वागत अभिनव के. शुक्ला द्वारा तथा समापन सत्र में स्वागत डॉ. विष्णु कोनूरायर द्वारा किया गया। कॉन्फ्रेंस की रिपोर्ट डॉ. पंकज उमबरकर, प्रोग्राम डायरेक्टर, ने प्रस्तुत की तथा धन्यवाद ज्ञापन जीवन सागर, फैकल्टी एवं को-कन्वेनर ऑफ द प्रोग्राम, द्वारा किया गया। फैकल्टी टीम में डॉ. पंकज उमबरकर, अभिनव के. शुक्ला, डॉ. प्रियांका मोहोड़, डॉ. पर्वेश कुमार राजपूत, डॉ. एरिट्रिया रॉय और जीवन सागर शामिल रहे, जिन्हें स्टूडेंट टीम विश्रुत, पलक सैनी, आदित्य टंडन, प्रीति तलरेजा, सान्वी अग्रवाल, कृतिका, वेदिका, श्रायना और श्रीधर का उत्साही सहयोग प्राप्त हुआ।

आगे की दिशा : यह कॉन्फ्रेंस एचएनएलयू के “रिसर्च हब एंड स्पोक (आर-हैस)” पहल के अंतर्गत फॉरेंसिक लॉ सेगमेंट को आपराधिक न्याय प्रणाली में सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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