कैंसर एक ऐसी चुनौती है जो किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है, परंतु समय पर जाँच…….

राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस 2025 के उपलक्ष्य में हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट एवं इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज़, लखनऊ विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में धन्वंतरि ऑडिटोरियम, सेकेंड कैंपस, लखनऊ विश्वविद्यालय, जानकीपुरम एक्सटेंशन, लखनऊ में जन-जागरूकता कार्यक्रम

लखनऊ | राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस 2025 के उपलक्ष्य में हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट एवं इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज़, लखनऊ विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में धन्वंतरि ऑडिटोरियम, सेकेंड कैंपस, लखनऊ विश्वविद्यालय, जानकीपुरम एक्सटेंशन, लखनऊ में जन-जागरूकता कार्यक्रम “Spreading Hope, Saving Lives: Awareness for All” का भव्य आयोजन किया गया।

इस अवसर पर डॉ. शिखा श्रीवास्तव, स्त्री रोग विशेषज्ञ; डॉ. शैली महाजन, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, दंत चिकित्सा विभाग, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान; डा. हेमंत कुमार अग्रवाल, प्रोफेसर, श्वसन रोग विभाग, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ; एवं डा. पूजा सिंह, त्वचा रोग विशेषज्ञ, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कैंसर के प्रति जागरूकता, समय पर जाँच एवं स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर बल दिया। कार्यक्रम की संरक्षक के रूप में लखनऊ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मनुका खन्ना की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. मनुका खन्ना, कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय; डॉ. रूपल अग्रवाल, न्यासी, हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट; डॉ. आर. के. सिंह, निदेशक, द्वितीय कैंपस, लखनऊ विश्वविद्यालय; डॉ. एस. पी. सिंह, डीन, FOET, द्वितीय कैंपस, लखनऊ विश्वविद्यालय; डॉ. पुष्पेंद्र त्रिपाठी, डीन, डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज़, द्वितीय कैंपस, लखनऊ विश्वविद्यालय; तथा विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन, माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं सभी अतिथियों को प्रतीक चिह्न प्रदान कर किया गया।

सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ. रूपल अग्रवाल, न्यासी, हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट ने कहा —

“आज राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस 2025 के अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के इस गरिमामय परिसर में उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत गौरव और प्रेरणा का विषय है। मैं विश्वविद्यालय प्रशासन का हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ, जिन्होंने इस जनहितकारी जागरूकता कार्यक्रम के आयोजन में हमारे ट्रस्ट का सहयोग किया। 7 नवम्बर, नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. सी. वी. रमन की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। कैंसर एक ऐसी चुनौती है जो किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है, परंतु समय पर जाँच और जागरूकता से अनेक जीवन बचाए जा सकते हैं। हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट शिक्षा, संस्कृति और समाजसेवा के माध्यम से लोगों में चेतना और उत्तरदायित्व की भावना जागृत करने के लिए निरंतर कार्यरत है।”

प्रो. (डॉ.) मनुका खन्ना, माननीय कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय ने कहा —“कैंसर आज विश्व के सामने एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। किन्तु वैज्ञानिक प्रगति, समय पर निदान और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से हम इस चुनौती को परास्त कर सकते हैं। यह समझना आवश्यक है कि रोकथाम (Prevention) और शीघ्र पहचान (Early Detection) ही सबसे प्रभावी उपचार हैं।

मैं डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज़ तथा हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट को इस सार्थक पहल के लिए हृदय से बधाई देती हूँ। आप सबका यह प्रयास समाज में स्वास्थ्य-जागरूकता की एक नई दिशा स्थापित करेगा।”

डॉ. शिखा श्रीवास्तव ने सर्वाइकल तथा ब्रेस्ट कैंसर के बारे में कहा —“कैंसर अब मृत्यु का पर्याय नहीं, बल्कि समय पर पहचान और उपचार से नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी है।” उन्होंने विशेष रूप से सर्वाइकल कैंसर और स्तन कैंसर के बारे में जागरूक करते हुए बताया कि इन दोनों बीमारियों के प्रारंभिक लक्षणों की अनदेखी करना महिलाओं के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि कई महिलाएँ शर्म या डर के कारण नियमित स्वास्थ्य जाँच नहीं करातीं, जबकि नियमित परीक्षण, HPV वैक्सीनेशन, संतुलित आहार, व्यायाम और नशे से दूरी जैसी सरल आदतें कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

डॉ. शैली महाजन ने ओरल कैंसर के विषय में कहा —“कैंसर केवल शरीर के आंतरिक अंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि मुख और दंत कैंसर भी उतने ही गंभीर और बढ़ते हुए खतरे हैं।” उन्होंने बताया कि तंबाकू, गुटखा, शराब सेवन, असंतुलित जीवनशैली और मुख की स्वच्छता की अनदेखी मुख कैंसर के प्रमुख कारण हैं।

उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से कहा कि मौखिक स्वास्थ्य की उपेक्षा जीवनभर की पीड़ा का कारण बन सकती है। ‘रुको, रोको और टोको’ का मंत्र अपनाकर तथा समय-समय पर दंत परीक्षण, संतुलित आहार, नशे से दूरी और अच्छी मौखिक स्वच्छता अपनाकर मुख कैंसर को पूरी तरह रोका जा सकता है।”

डॉ. हेमंत कुमार अग्रवाल ने फेफड़ों के कैंसर के बारे में कहा —“भारत में फेफड़ों का कैंसर तेजी से बढ़ती हुई एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन गया है, जिसका प्रमुख कारण धूम्रपान, प्रदूषण और जीवनशैली में असंतुलन है।”

उन्होंने बताया कि फेफड़ों के कैंसर के लक्षण अक्सर प्रारंभिक अवस्था में सामान्य खाँसी या सांस लेने में कठिनाई के रूप में दिखाई देते हैं, जिन्हें लोग अनदेखा कर देते हैं। यही लापरवाही बाद में गंभीर रूप ले लेती है। यदि व्यक्ति समय पर चिकित्सकीय परामर्श ले और नियमित स्वास्थ्य जाँच कराए, तो इस बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है।

डॉ. पूजा सिंह ने त्वचा कैंसर के विषय में कहा —“त्वचा पर दिखने वाले छोटे-छोटे बदलाव — जैसे नया तिल बनना, पुराने तिल का आकार या रंग बदलना, या किसी घाव का लंबे समय तक न भरना — कैंसर के प्रारंभिक संकेत हो सकते हैं, जिन्हें कभी अनदेखा नहीं करना चाहिए।”उन्होंने बताया कि त्वचा कैंसर के बढ़ते मामलों का मुख्य कारण अत्यधिक धूप में रहना, प्रदूषण, रासायनिक उत्पादों का अत्यधिक उपयोग और त्वचा की अनदेखी है। उन्होंने विद्यार्थियों और युवाओं से अपील की कि वे अपनी त्वचा की नियमित जांच कराएँ, सनस्क्रीन का प्रयोग करें, और संतुलित आहार तथा जल सेवन पर ध्यान दें।

अंत में सभी उपस्थित जनों ने यह संकल्प लिया —“वे समाज में कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने, समय पर जांच करवाने और ‘स्वस्थ समाज, सुरक्षित जीवन’ के निर्माण में अपना योगदान देंगे।”

कार्यक्रम के अंत में डॉ. पुष्पेंद्र त्रिपाठी, डीन, डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज़, द्वितीय कैंपस, लखनऊ विश्वविद्यालय ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया तथा राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में डॉ. लुबना अजमी, डॉ. प्रणति श्रीवास्तव, सुश्री किरण सिंह एवं डॉ. सौम्या सिंह (सहायक प्रोफेसर, LUIPS), डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज़, द्वितीय कैंपस, लखनऊ विश्वविद्यालय; अन्य शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के स्वयंसेवकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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