वाराणसी से दिल्ली पदयात्रा के समर्थन में रोजगार अधिकार अभियान का बयान

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सद्भावना, संविधान व लोकतंत्र जैसे सवालों को लेकर वाराणसी से दिल्ली तक की पदयात्रा शुरू 

पदयात्रा में शामिल हुए रोजगार अधिकार अभियान के कोआर्डिनेटर 

वाराणसी, सद्भावना, संविधान व लोकतंत्र जैसे सवालों को लेकर राजघाट वाराणसी से दिल्ली तक की आज गांधी जयंती पर शुरू हुई पदयात्रा में रोजगार अधिकार अभियान के नेशनल कोआर्डिनेटर राजेश सचान शामिल हुए। पटेल धर्मशाला में आयोजित सभा में उन्होंने कहा कि देश में बेरोज़गारी का सवाल बेहद चिंताजनक है। हर व्यक्ति के गरिमापूर्ण आजीविका व शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी राज्य व सरकार का संवैधानिक दायित्व है। लेकिन इन सवालों को हल करने के संवैधानिक दायित्व का निर्वहन नहीं किया गया। बताया कि रोजगार अधिकार अभियान में हर व्यक्ति के सम्मानजनक जीवन की गारंटी करने, देश में सरकारी विभागों में रिक्त पड़े एक करोड़ पदों को तत्काल भरने, शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार की गारंटी करने, सुपर रिच की संपत्ति पर समुचित टैक्स लगाने जैसे सवालों को उठाया जा रहा है।

तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता देश के विकास के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शोध कार्य संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। औद्योगिक जरूरतों के मुताबिक तकनीकी संस्थानों का अपग्रेडेशन नहीं है। 

        रोजगार अधिकार अभियान का मानना है कि इन ज्वलंत मुद्दों को हल करने के लिए देश में संसाधनों की कमी का तर्क बेबुनियाद है। एक दशक में बड़े पूंजी घरानों की संपत्ति में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। यह तथ्य है कि बड़े पूंजी घरानों की संपत्ति पर समुचित टैक्स और काली अर्थव्यवस्था को विनियमित कर केंद्रीय बजट में 40 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का इजाफा संभव है। इसके लिए अर्थनीति की दिशा में बदलाव की जरूरत है। 

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