‘उद्गार शतक’ काव्य संग्रह के पुनर्लोकार्पण समारोह में जुटे पूर्वांचल के दिग्गज साहित्यकार

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मऊ। दोहरीघाट स्थित क्षेत्रीय ग्राम्य विकास संस्थान के प्रशासनिक भवन में सोमवार को हिन्दी साहित्य के एक ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने साहित्य प्रेमी जब ‘उद्गार शतक’ साझा हिन्दी काव्य संग्रह का पुनर्लोकार्पण भव्य समारोह के रूप में सम्पन्न हुआ।
इस साहित्यिक आयोजन में मऊ, आजमगढ़, गोरखपुर और वाराणसी सहित पूर्वांचल के अनेक जिलों से प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार बृजभूषण राय ‘ब्रिज’ ने की, जबकि संचालन वरिष्ठ कवि चंद्रभूषण सिंह ने किया।
आजमगढ़, मऊ व गोरखपुर से पधारे विशिष्ट साहित्यकारों में उपन्यासकार रमेश राय, वरिष्ठ कवि चिंतामणि मिश्रा, राजेश कुमार दूबे, दाढ़ी बाबा, रामकृष्ण यादव तथा रामकृष्ण मिश्रा ‘सरस’ प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
वाराणसी व मऊ के साहित्यकारों में पं. छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ (उद्गार शतक के संपादक व स्याही प्रकाशन के प्रकाशक), रामनरेश पाल, हर्षवर्धन मंगाई, डॉ. लियाकत अली, नंदलाल राजभर ‘नंदू’, एवं आशिक कुमार राय ‘आशिक’ की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम में कवयित्री शबाना परवीन एवं शायर शादाब जाहिर को उनकी साहित्यिक सेवाओं हेतु पुस्तक व स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
यह आयोजन विशेष रूप से उस काव्य संग्रह ‘उद्गार शतक’ के पुनर्लोकार्पण को समर्पित रहा, जिसमें देशभर के 127 कवियों की काव्यकृतियाँ संकलित हैं। यह संग्रह समकालीन हिन्दी कविता को एक व्यापक मंच प्रदान करता है। आयोजन के संयोजन, स्वागत वक्तव्य और धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के उपनिदेशक व वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य दीनानाथ द्विवेदी ‘रंग’ द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया।
कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और समकालीन कविता की चुनौतियों पर सारगर्भित विमर्श भी हुआ। समस्त प्रतिभागी साहित्यकारों ने ‘उद्गार शतक’ को हिन्दी साहित्य में एक महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए इसके सतत प्रकाशन और प्रसार पर बल दिया। यह आयोजन न केवल एक पुस्तक लोकार्पण समारोह रहा, बल्कि साहित्यिक सौहार्द, संवाद और सृजन की एक समरस सभा भी सिद्ध हुई। कार्यक्रम में उपस्थित कवियों ने काव्यपाठ भी किया।

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