महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति ने किया आइसार्क का भ्रमण…

अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का किया अवलोकन* 

NTPC

वाराणसी। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह ने रविवार को अंतर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान–दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क) का भ्रमण किया। यह भर्मण कृषि एवं टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के क्षेत्र में शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।इस भ्रमण का उद्देश्य जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देना, विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि नवाचारों से जोड़ना तथा संस्थागत सहयोग के नए अवसरों की खोज करना था। भ्रमण के दौरान डॉ. सुरिंदर सिंह ने अपनी टीम के साथ आइसार्क के वैज्ञानिकों से संवाद किया और केंद्र में चल रहे अनुसंधान एवं विकास कार्यों की जानकारी प्राप्त की, विशेष रूप से जलवायु-अनुकूल धान उत्पादन, कृषि यंत्रीकरण और टिकाऊ कृषि प्रणालियों के क्षेत्र में।

आइसार्क के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने कुलपति और उनकी टीम का स्वागत करते हुए केंद्र की भूमिका को नवाचार, क्षमता निर्माण और ज्ञान प्रसार के एक प्रमुख केंद्र के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग से विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान और जमीनी अनुभव प्राप्त करने में सहायता मिलती है। डॉ. सुरिंदर सिंह ने आइसार्क की उन्नत अनुसंधान सुविधाओं और प्रयोगशालाओं का अवलोकन किया, जिनमें स्पीडब्रीड सुविधा, भौगोलिक सूचना प्रणाली प्रयोगशाला, संगणकीय जीवविज्ञान प्रयोगशाला, एडटेक स्टूडियो, पादप एवं मृदा प्रयोगशाला तथा धान गुणवत्ता विश्लेषण एवं मूल्य-संवर्धित उत्पाद विकास प्रयोगशालाएँ शामिल हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों के साथ संवाद कर फसल सुधार, कृषि यंत्रीकरण, डिजिटल कृषि और टिकाऊ खेती के क्षेत्र में चल रहे कार्यों को जाना । साथ ही उन्हें केंद्र की प्रगति, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और प्रौद्योगिकी प्रसार गतिविधियों की जानकारी दी गई। डॉ. सुरिंदर सिंह ने कृषि एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आइसार्क के योगदान की सराहना की और छात्र प्रशिक्षण, अध्ययन भ्रमण, इंटर्नशिप तथा संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने में रुचि व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों की शैक्षणिक अध्ययन  और वास्तविक जीवन की चुनौतियों के बीच की दूरी को कम करने में सहायक होंगे। इस भ्रमण का समापन संभावित संयुक्त पहलों पर चर्चा के साथ हुआ, जिनमें इंटर्नशिप, प्रशिक्षण कार्यक्रम और ज्ञान का आदान-प्रदान शामिल हैं, जो कृषि शिक्षा को मजबूत बनाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में सहायक होंगे।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *