वैदिक मंत्रोच्चार और हवन से गुंजायमान हुआ वातावरण,माता रानी के वार्षिक उत्सव का भव्य आयोजन संपन्न 

झूंसी (प्रयागराज) बसंत पंचमी के पावन अवसर पर ग्राम चकसार नाथ स्थित ग्राम देवी मंदिर में माता रानी के वार्षिक उत्सव का भव्य एवं दिव्य आयोजन अत्यंत श्रद्धा, आस्था और वैदिक परंपराओं के साथ संपन्न हुआ। संपूर्ण ग्राम क्षेत्र माता रानी की जयकारों, घंटा-घड़ियाल की मधुर ध्वनि एवं वैदिक मंत्रोच्चार से भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठा।

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कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार माता रानी की विधिवत पूजा-अर्चना से हुई, इस अवसर पर वैदिक परंपरा के अनुरूप पूजन संपन्न कराया गया, जिसमें विद्वान पुरोहित द्वारा मंत्रोच्चार करते हुए माता रानी का श्रृंगार एवं आरती की गई। घंटा-घड़ियाल की गूंज के बीच भक्तों ने माता के चरणों में शीश नवाया। पूजनोपरांत भव्य सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें यंत्रों के मधुर स्वरों के साथ हनुमान जी की महिमा का गुणगान किया गया। संपूर्ण परिसर “जय श्रीराम” और “जय माता दी” के उद्घोष से गूंज उठा। सुंदरकांड के पश्चात कार्यक्रम के समापन से पूर्व हवन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें वैदिक अग्नि के समक्ष आहुतियां अर्पित कर पूरेगाँव, समाज एवं राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की गई। हवन कार्यक्रम के उपरांत पुरोहित पंडित विवेक तिवारी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को बसंत पंचमी के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला तथा उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी ज्ञान, विद्या, ऊर्जा और नवचेतना का प्रतीक पर्व है तथा यह दिन मां सरस्वती की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर प्रदान करता है। इस पावन आयोजन के मुख्य यजमान के रूप में जी० एस० तिवारी अपनी धर्मपत्नी के साथ उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जय शंकर शुक्ला, रामासरे शुक्ला,कैलाश नाथ शुक्ला, विप्र नाथ ओझा, मातादेव शुक्ला, राजपति शुक्ला, राधेश्याम पांडेय,   श्यामधर शुक्ला, राजधर शुक्ला, संदीप शुक्ला, ब्रह्मदेव शुक्ला उर्फ तुफानी, राजेश्वरी शुक्ला, देवी प्रसाद तिवारी, भगवती प्रसाद तिवारी, सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी एवं दूर-दराज से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम का आयोजन एवं संयोजन मंदिर के वरिष्ठ पुजारी हरीशंकर तिवारी के कुशल मार्गदर्शन एवं देखरेख में अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। अंत में माता रानी की आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें सभी भक्तों ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता की। पूरे आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि ग्राम चकसार नाथ की धरती सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता की सशक्त मिसाल है।

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