पहले भी खदानों में जा चुकी है कई लोगों की जान
अहरौरा, मिर्जापुर / सोनभद्र जिले में खदान धंसने से आधा दर्जन से अधिक हुई मजदूरों की मौत के बाद भी स्थानीय प्रशासन व खनन विभाग नहीं गंभीर हुआ और क्षेत्र के कंचनपुर मगन दिवाना पहाड़ी के पास स्थित एक लगभग डेढ़ सौ फीट गहरी खदान में एक क्रेशर प्लांट के मुंशी की मौत हो गई। बता दें की इसके पूर्व भी अहरौरा क्षेत्र के विभिन्न खदानों में कई श्रमिकों, एवं तीन बच्चों की मौत हो चुकी हैं । बता दें की अहरौरा क्षेत्र में भगवती देई, सोनपुर, चकजाता, चिरैया, लालपुर, एकली, धुरिया, कंचनपुर, दुर्गा जी सहित अन्य ग्राम पंचायत में सौ से अधिक खदाने स्वीकृत है । इन खदानों में मानकों को दर किनार कर कंप्रेशर मशीन से ड्रिल कर भारी पैमाने पर ब्लास्टिंग किया जाता हैं। आज स्थिति यह है की जहां पहले पहाड़िया दो सौ ढाई सौ फीट ऊंची थी आज क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक स्थानों पर पहाड़िया डेढ़ सौ से ढाई सौ फीट नीचे जा चुकी है। इसके बाद जारी निर्धारित एम एम ग्यारह से अधिक मात्रा में उसमें खनन किया जा रहा है और क्रेशर प्लांट चलाने के लिए बोल्डर निकाला जा रहा है।
पूर्व में भी हो चुकी है घटनाएं
गुरुवार की सुबह कंचनपुर पहाड़ी पर हुई घटना कोई नई घटना नहीं है इसके पूर्व भी ब्लास्टिंग के दौरान कई मजदूरों की जान जा चुकी है। 2014,2015 में क्षेत्र के एक क्रेशर प्लांट पर मैन्युअल प्रेसिंग के दौरान पट्टे में फंसने से श्रमिक की हुई थी मौत।
2015,2016 में क्षेत्र के चिरैया में स्थित एक खदान में पशु चराने गए तीन मासूम बच्चों की खदान में भरे पानी में डूबने से हुई थी मौत। 2016,2017 में जिगना में स्थित एक खदान में गिरने से टैक्टर चालक की मौत हुई है। वर्ष 2017,2018 में क्षेत्र के धुरिया में बिना अप्रशिक्षित ब्लास्टर एक श्रमिक द्वारा ब्लास्टिंग के दौरान चली गई थी जान।
खान सुरक्षा मानकों की होती हैं अनदेखी
खदान का पट्टा स्वीकृत होने के बाद लीज धारकों को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा खनन योजना दिया जाता है।
खनिज परिहार नियमावली 2021 के नियम एक व दो में खनन करने के विधान बताए गए हैं लेकिन उसका पालन नहीं किया जाता है।

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