भारत के नागरिकों ने संविधान को सर्वोपरि मान कर सदैव इसका सम्मान किया – योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री ने संविधान दिवस पर उपस्थित महानुभावों को भारत के संविधान की उद्देशिका का सशपथ पाठन कराया

मुख्यमंत्री ने बाबा साहब डॉ0 भीमराव आम्बेडकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धान्जलि दी

जब कोई देश अपने संविधान की मूल भावनाओं को सम्मान देते हुए आगे बढ़ता, उसे विकसित होने से कोई ताकत नहीं रोक सकतीः मुख्यमंत्री

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत सौभाग्यशाली है कि यहाँ के नागरिकों ने संविधान को सर्वोपरि मान कर सदैव इसका सम्मान किया है। स्वाधीनता संग्राम सेनानियों व प्रतीकों के प्रति आदर भाव प्रदर्शित करते हुए संविधान की मूल भावनाओं को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का प्रयास किया है। जब कोई देश अपने संविधान की मूल भावनाओं को सम्मान देते हुए आगे बढ़ता है, उसे विकसित होने से कोई ताकत नहीं रोक सकती। हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना होगा। जो व्यक्ति जिस क्षेत्र में कार्य कर रहा है, उसे उस क्षेत्र में पूरी ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा। मुख्यमंत्री आज यहां लोक भवन में संविधान दिवस पर उपस्थित महानुभावों को भारत के संविधान की उद्देशिका का सशपथ पाठन कराने के पश्चात अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने संविधान के आदर्शों पर आधारित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। इसके पूर्व, मुख्यमंत्री जी ने बाबा साहब डॉ0 भीमराव आम्बेडकर जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धान्जलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत के संविधान को अंगीकृत किए जाने के अमृत महोत्सव का समारूप है। वर्ष 2015 से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की प्रेरणा से पूरा देश 26 नवम्बर की तिथि को संविधान दिवस के रूप में आयोजित करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद जी की अध्यक्षता में संविधान सभा ने भारत के संविधान का निर्माण किया था। संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष के रूप में बाबा साहब डॉ0 भीमराव आम्बेडकर की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण थी। संविधान के निर्माण में 02 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे। स्वाधीनता संग्राम सेनानियों के योगदान तथा संविधान विशेषज्ञों के सहयोग के परिणामस्वरूप भारत की अनेकता को एकता में परिवर्तित करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा संविधान बना। हम सभी को अपने संविधान पर गौरव की अनुभूति करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहब डॉ0 भीमराव आम्बेडकर ने संविधान सभा में कहा था कि संविधान एक ऐसा दस्तावेज है, जो भारत की विविधता को एकता में परिवर्तित करने में सदैव मार्गदर्शिका के रूप में देश का नेतृत्व करेगा। वर्तमान में संविधान लागू होने का अमृत महोत्सव वर्ष चल रहा है। संविधान अंगीकृत किए जाने के अमृत महोत्सव वर्ष का समारोह आज यहां पर आयोजित किया जा रहा है। प्रत्येक संस्था व पंचायत में इस प्रकार के आयोजन के माध्यम से संविधान की प्रस्तावना का वाचन करने का प्रयास हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक लोकतंत्र का दावा करने वाले दुनिया के अनेक बड़े देशों ने अपने यहां आधी आबादी अर्थात महिलाओं को मत देने का अधिकार बहुत बाद में दिया। भारत ने पहले आम चुनाव से ही प्रत्येक वयस्क मतदाता को, जो भारत का नागरिक है, चाहे वह किसी भी जाति, क्षेत्र, मत और मजहब का हो, मत देने का अधिकार प्रदान किया है। भारत में संविधान लागू होने के साथ ही बिना भेदभाव के सामाजिक रूप से अस्पृश्य कहे जाने वाले दलित समाज व जनजातीय समाज के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गयी। उनको यह अधिकार समाज की मुख्यधारा के साथ जोड़ने और सामाजिक समता के निर्माण में उनकी भूमिका के निर्वहन हेतु प्रदान किया गया। भारत के संविधान की भावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए आज नया भारत उस दिशा में तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक विद्यार्थी यदि ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन करता है, तो मानकर चलिए कि वह भारत के संविधान का सम्मान कर रहा है। यदि एक शिक्षक ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए अपने उत्तरदायित्वों को पूर्ण कर रहा है, इसका मतलब वह भारत के संविधान का सम्मान कर रहा है। यदि व्यापारी ईमानदारी के साथ अपने व्यापार कार्य को सम्पन्न कर रहा है, शासकीय सेवा में कार्य करने वाला कोई कार्मिक ईमानदारी के साथ अपने उत्तर दायित्वों का निर्वहन कर रहा है, तो यह मान कर चलिए कि वह अपने नागरिक कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक पालन करते हुए भारत के संविधान के प्रति अपनी सच्ची निष्ठा का निर्वहन भी कर रहा है। कोई व्यक्ति चाहे वह किसी भी पद पर हो, यदि वह ईमानदारी के साथ अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन नहीं कर रहा है, तो इसका तात्पर्य है कि वह भारत के संविधान, भारत के स्वाधीनता संग्राम सेनानियों तथा भारत की विरासत का अपमान कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश का विकसित होना तथा विकसित उत्तर प्रदेश के लिए लखनऊ का विकसित होना आवश्यक है। गत विधान मण्डल सत्र के दौरान इस मुद्दे पर 24 घन्टे चर्चा की गयी थी। प्रदेश सरकार ने इस सम्बन्ध में जनता के सुझाव प्राप्त करने के लिए पोर्टल लॉन्च किया। विकसित भारत व विकसित उत्तर प्रदेश के लिए शिक्षा, हेल्थ, एम्प्लॉयमेन्ट, स्किल डेवलपमेन्ट, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, एग्रीकल्चर, इन्वेस्टमेन्ट, सिक्योरिटी आदि क्षेत्रों में अब तक 98 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं। यह चीजें दिखातीं हैं कि व्यवस्था के साथ प्रत्येक व्यक्ति जुड़ना चाहता है। प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि कुछ अच्छा परिवर्तन हो। 98 लाख लोगों का तात्पर्य प्रत्येक पांच परिवारों में से एक परिवार ने हमें सुझाव भेजा है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत हमें सबसे छोटी इकाई से प्रारम्भ करनी होगी। यदि ग्राम पंचायत व वॉर्ड आत्मनिर्भर होगा, तो जनपद, प्रदेश व देश भी आत्मनिर्भर हो जाएगा। यदि भारत आत्मनिर्भर होगा, तो विकसित भारत की संकल्पना हमसे दूर नहीं हो सकती है। आज यहाँ संविधान दिवस पर विगत एक वर्ष में संविधान को अंगीकृत किये जाने के अमृत महोत्सव वर्ष में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। सरकार ने तय किया कि विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण सम्बन्धी अच्छे सुझावों को जनपद तथा प्रदेश स्तर पर दो श्रेणियों में विभाजित करते हुए जनपद स्तर पर तीन तथा प्रदेश स्तर पर पांच अच्छे सुझावों को समारोहपूर्वक सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में संविधान पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी। कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने भी सम्बोधित किया।इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान, अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी, लखनऊ की महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल, उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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