दुद्धी, सोनभद्र। भारत गांवों का देश हैं और भारत की आधे से अधिक आबादी गांवों में रहती हैं। गाँव के लोग जहाँ कोई साधन नहीं होता वहाँ अपने तरीके से जुगाड़ बना लेते हैं। ऐसा ही एक मामला दुद्धी तहसील एवं ब्लॉक क्षेत्र के डुमरा गाँव के जोरकहू गाँव के ग्रामीणों की है जहाँ कई वर्षों पहले पुलिया टूट गई थी।
पुलिया बनवाने के लिए ग्रामीणों ने कई जन प्रतिनिधियों से गुहार लगाई और जन प्रतिनिधि हर चुनाव में टूटी पुलिया बनवाने का वायदा करते रहे लेकिन पुलिया नहीं बन सकी। बस्ती को जोड़ने वाली पीसीसी सड़क की पुलिया टूटने से बस्ती के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। बस्ती जाने का अन्य कोई मार्ग नहीं होने से परेशान ग्रामीणों ने स्वयं मिलकर लकड़ी और खम्भे के सहारे पुलिया का निर्माण कर लिया जिससे होकर ग्रामीण अपनी बस्ती में आने-जाने लगे।
ग्रामीणों ने बताया कि आज से करीब 10 साल पहले पुलिया टूट गई, बनवाने के लिए करीब 5-6 साल इंतजार किया गया जब किसी ने नहीं सुना तो आज से 3-4 साल पहले बस्ती में एक आदिवासी ने एक गाड़ी खरीदी लेकिन पुलिया टूटने के कारण उसकी गाड़ी घर तक नहीं जा पा रहीं थी फिर क्या था आदिवासी जनजातियों ने अपनी देशी जुगाड़ से पुलिया का निर्माण कर दिया। हालांकि देशी जुगाड़ से बनी पुलिया 3-4 साल चलने के बाद अब धीरे -धीरे जर्जर स्थिति में पहुंच गया हैं फिर ग्रामीण जान हथेली पर लेकिन लकड़ी की जर्जर पुलिया से आने -जाने को मजबूर हैं।


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