चोपन/सोनभद्र। चोपन ब्लॉक की सिंदुरिया ग्राम पंचायत में हर घर नल योजना की जमीनी सच्चाई सामने आ गई है। कागजों में स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का दावा किया गया, लेकिन गांव में आज तक घरों में पानी की एक बूंद नहीं पहुंची। नाराज ग्रामीणों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए सोन नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया।ग्रामीणों का कहना है कि दो से तीन वर्ष पहले पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़कों की खुदाई कर दी गई थी। गांव में पाइप डाल दिए गए, लेकिन जलापूर्ति शुरू नहीं हुई। फाइलों में काम पूरा दिखाकर प्रगति दर्ज कर दी गई, जबकि धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। पेयजल की कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण लोग दूषित नदी का पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।जल संकट से परेशान पुरुष और महिलाएं सैकड़ों की संख्या में सोन नदी में उतर गए। अर्धनग्न होकर नदी में बैठकर उन्होंने प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण योजना अधूरी पड़ी है और जनता को मूलभूत सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इंतजार के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। सड़कें खोद दी गईं, पाइप डाले गए, लेकिन पानी नहीं आया। मजबूरी में गंदा पानी पीना पड़ रहा है। यदि जल्द जलापूर्ति शुरू नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।योग गुरु अजय कुमार पाठक ने भी ग्रामीणों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि स्वच्छ जल प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। जब तक हर घर में नल से पानी नहीं पहुंचेगा, तब तक जल सत्याग्रह और जनआंदोलन जारी रहेगा।सिंदुरिया में हर घर नल योजना की स्थिति ने सरकारी दावों और वास्तविकता के बीच की खाई को उजागर कर दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस जनाक्रोश के बाद कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है।

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