संचार क्रान्ति के जनक और लोक निति के देदिप्तमान नक्षत्र और अत्यन्त दूरदर्शी जन नेता थे पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी

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 वाराणसी।  देश के  सबसे युवा पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी देश में हुई संचार क्रांति के जनक और  देश को इक्सवीं सदी में ले जाने वाले एक  महानतम दूरदर्शी  जन नेता धे जिनके यश और किर्ति को  दिर्घ काल तक ये देश याद करता रहेगा ।उक्त विचार आज इंग्लिशिया लाइन स्थित पंडित कमलापति त्रिपाठी फाउंडेशन के कार्यालय में स्वर्गीय राजीव गांधी जी के  35  वीं पुण्य तिथि पर आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं द्वारा  व्यक्त करते हुए आगे कहा कि राजीव गांधी भारत की राजनीति के  ऐसे ध्रुव तारा थे, जिन्हों ने  अपने छोटे से राजनैतिक  जीवन के छोटे  से शासनकाल में  जहां संचार क्रांति की शुरुआत करा करके देश को विशेष  रूप से देश के यूवावों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का अवसर प्रदान कराया तो वहीं ईमानदार और  मूल्य परक राजनीति करते हुए कुछ अपनों  से धोखे खाने के बावजूद भी उन्होंने भारत को 21वीं सदी  में ले जाने का अपना ध्रुव संकल्प कभी नहीं छोड़ा । सत्ता में रहते हुए और सत्ता से बाहर रहने के बाद भी उन्होंने राजनीतिक शुचिता, पवित्रता  और मर्यादाओं का हमेशा ध्यान रख्खा। यद्यपि इस कालखंड में कुछ ऐसे लोग भी रहे जो   स्वार्थ बस उनको  बदनाम करने से भी बाज नहीं आए   थे, फिर भी वे सत्यपथ पर हमेशा अविचल  भाव से चलते रहे , राजीव गांधी जी का छोटा सा राजनीतिक जीवन अनेक उतार चढ़ाव, उथल पथल और संघर्षों से होता हुआ दुआ अंततः देश की एकता अखन्डता की रक्षा के लिये बलिदान हो गया। वे सच्चे अर्थों में मां भारती के  ऐसे महानतम सपूत थे जिन्हों ने  ना चाहते हुए भी राजनीति की दुनिया में कदम  जरूर रख्खा था पर अपने से छोटे से कार्यकाल में  ही उन्होंने भारतीय राजनीति पर जो अमिट छाप छोड़ा था उसे इतिहास कभी भुला नहीं पाएगा  ये और बात है आज की सत्ता में बैठे  कुछ बौने कद के लोग उनकी राजनैतिक उंचाई  को चाह कर भी जब नहीं छू पाते तो ईर्ष्याबस अनाप शनाप  बातें जरूर करते हैं ।
  ऐसे महामानव  देश रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी को उनकी 35 वीं पावन पुण्य तिथि पर पर हम सब आदर सहित श्रद्धानत  हैं, और उन्हे शत शत नमन करते हैं ,विचार  गोष्ठी के प्रारंभ में राजीव जी के चित्र पर पुष्पाजंलि अर्पित की गई ।
   विचार  गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ नेता पंडित विजय शंकर पांडे ने संचालन बैजनाथ सिंह  ने  किया और विचार  गोष्ठी  में प्रमुख रूप  डाक्टर  अनिल उपाध्याय, ,राधेलाल एडवोकेट, आनन्द सिंह, भूपेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट,विजयकृष्ण राय अन्नू , प्रभूनाथ पान्डेय एडवोकेट, डाक्टर प्रेम शंकर पाण्डेय,आनन्द  मिश्रा,मनोज चौबे,महेंद्र सिंह चौहान ,डाक्टर उमापति उपाध्याय,  पुनीत मिश्रा,एडवोकेट पंकज मिश्रा,बह्मदेव मिश्रा ,राजेन्द्र प्रसाद  जायसवाल, कमलाकांत पांडे, सुशील सोनकर,  युवराज पाण्डेय,अशोक कुमार पांडे,सुवाष राम,मोहम्मद अरशद,पिंटू शेख आदि लोगों ने  प्रमुख रूप से  अपने विचार  प्रकट  किये  ।

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