जनजातीय समाज की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए प्रतिबद्ध है डबल इंजन सरकार – योगी आदित्यनाथ

कोई भी पात्र जनजातीय परिवार सरकारी योजनाओं से वंचित नहीं रहेगा – मुख्यमंत्री

  धरती आबा बिरसा मुंडा की 150वीं जयन्ती पर सोनभद्र को मिली 548 करोड़ की 432 विकास परियोजनाओं की सौगात
  सोनभद्र केवल ऊर्जा की राजधानी नहीं, बल्कि मानव इतिहास और प्रकृति की अद्भुत धरोहर का भी केंद्र – मुख्यमंत्री

सोनभद्र। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनजातीय समाज के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की डबल इंजन सरकार विकास, सुरक्षा और सुशासन को साथ लेकर आगे बढ़ रही है और जनजातीय समाज को मुख्यधारा के विकास का अग्रणी भागीदार बनाने के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम कर रही है। ‘धरती आबा’ बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में जनजातीय बाहुल्य जनपद के चोपन में आयोजित ‘जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम’ में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अवसर केवल स्मरण का नहीं, बल्कि जनजातीय गौरव को विकास से जोड़ने का है।

   मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘धरती आबा’ बिरसा मुंडा का संदेश ‘अबुआ देश, अबुआ राज’ आज के नए भारत में ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के रूप में प्रकट हो रहा है। डबल इंजन की सरकार जनजातीय समाज की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए उनके साथ कदम से कदम मिलाकर खड़ी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों से प्रेरित होकर सोनभद्र और पूरे उत्तर प्रदेश का जनजातीय समाज राष्ट्र की एकता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए अपनी सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा और विकास की मुख्यधारा में अग्रणी भागीदार बनेगा।
    ‘धरती आबा’ बिरसा मुंडा को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से 150 वर्ष पहले 1875 में जन्मे धरती आबा ने मात्र 25 वर्ष की आयु में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जो संघर्ष छेड़ा, वह आज भी नए भारत के लिए मार्गदर्शक है। रांची जेल में यातनाओं के बीच उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया, ब्रिटिश हुकूमत को जनजातीय समुदाय के अधिकारों को स्वीकार करने के लिए झुकना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज स्वतंत्र भारत में वही संघर्ष जनजातीय समाज के सम्मान, हिस्सेदारी और विकास के रूप में आगे बढ़ रहा है और डबल इंजन की सरकार इस विरासत को न्यायपूर्ण नीतियों और ठोस कार्यों में बदल रही है।

 सोनभद्र की पावन धरती को उत्तर प्रदेश की ऊर्जा राजधानी, प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध संसाधनों के अद्वितीय संगम की संज्ञा देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां आयोजित ‘जनजातीय गौरव दिवस’ कार्यक्रम में भारी संख्या में उपस्थित जनजातीय बहनों-भाइयों की सहभागिता, बदलाव की आकांक्षा और विश्वास का प्रतीक है। कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वंशजों को सम्मानित किया गया और वन अधिकार कानून के अंतर्गत जनजातीय परिवारों को जमीन के पट्टे सौंपे गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सोनभद्र को 548 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की सौगात दी गई है, जो कनेक्टिविटी से लेकर बुनियादी सुविधाओं तक, जनपद के समग्र विकास की नई दिशा तय करेंगी। इस अवसर पर सोनभद्र के पर्यटन स्थलों पर आधारित पुस्तिका तथा मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय, मिर्जापुर की कुलपति द्वारा लिखित ‘धरती आबा बिरसा मुंडा’ पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया गया। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए। इस अवसर पर ‘मिशन शक्ति’ के अंतर्गत महिला पुलिसकर्मियों के लिए 25 स्कूटी को हरी झंडी दिखाई। ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के इस विशेष अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के जनजातीय समूह द्वारा याक नृत्य, छत्तीसगढ़ के सरगुजा जनजातीय समूह तथा सोनभद्र के करमा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की बहुरंगी जनजातीय संस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया।

सोनभद्र की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल ऊर्जा राजधानी नहीं, बल्कि मानव इतिहास और प्रकृति की अद्भुत धरोहर का भी केंद्र है। सलखन फॉसिल पार्क में 140 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्मों के अवशेष विश्व समुदाय के लिए अद्वितीय आकर्षण हैं और यूनेस्को द्वारा इसे विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया जाना सोनभद्र की वैश्विक पहचान को मजबूत करता है। शिवद्वार पंचमुखी महादेव, ज्वालामुखी शक्तिपीठ, हाथी नाला और बायोडायवर्सिटी पार्क जैसे धार्मिक और प्राकृतिक स्थल यहां स्पिरिचुअल और इको-टूरिज्म की अपार संभावनाओं को उजागर करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पाई जाने वाली 15 जनजातियों में से 14 जनजातियां अकेले सोनभद्र में निवास करती हैं और यहां 4 लाख से अधिक जनजातीय बहन-भाइयों का जीवन मानव उद्गम और सभ्यता के इतिहास से जुड़ी एक जीवंत विरासत है। जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रारंभ की गई ‘पीएम जन मन योजना’ के अंतर्गत ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ उत्तर प्रदेश के जनजातीय बहुल 517 गांवों में बुनियादी सुविधाओं और समग्र विकास का नया अध्याय लिख रहा है। प्रदेश में लगभग 11 लाख की जनजातीय आबादी सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर, चित्रकूट, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी, श्रावस्ती, बहराइच सहित विभिन्न जनपदों में निवास करती है और इन सभी क्षेत्रों में योजनाओं को संतृप्तिकरण के लक्ष्य के साथ लागू किया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना से वंचित न रह जाए।
   मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के कार्यक्रम में 1,000 से अधिक जनजातीय परिवारों को वन अधिकार पट्टे सौंपे गए हैं और इससे पहले 23,000 से अधिक पट्टे स्वीकृत किए जा चुके हैं। शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में सोनभद्र को मॉडल के रूप में पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपद में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित किया गया है, जो पूर्णतया आवासीय है और जिसमें 240 छात्र-छात्राएं (120 बालक, 120 बालिकाएं) आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए विकासखंड रॉबर्ट्सगंज में राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय, विकासखंड नगवा में आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय तथा अनुसूचित जाति-जनजाति की छात्राओं हेतु रॉबर्ट्सगंज में राजकीय छात्रावास का निर्माण कराया जा रहा है। जनपद में चार पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय संचालित हैं, जिनमें से तीन बालकों और एक बालिकाओं के लिए हैं। 

 विकास परियोजनाओं का विस्तृत उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सोनभद्र, उत्तर प्रदेश की ऊर्जा राजधानी के रूप में नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। ओबरा स्थित उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम की इकाई में 1,320 मेगावाट की नई पावर परियोजना स्थापित की गई है, जिसकी लागत 13,005 करोड़ रुपये से अधिक है। इससे प्रदेश की ऊर्जा क्षमता बढ़ने के साथ-साथ हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न हुए हैं। कनहर सिंचाई परियोजना पर 3,394 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से कार्य हो रहा है, जिससे रॉबट्र्सगंज, दुद्धी और ओबरा विधानसभा क्षेत्रों के 108 गांवों के 53,000 से अधिक कृषक परिवारों को लगभग 35,467 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। जल जीवन मिशन के अंतर्गत ‘हर घर नल’ योजना के माध्यम से 36,649 घरों को पेयजल से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सोनभद्र में पहली बार एक राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा किया गया है और यहां प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। जिला चिकित्सालय को 500 बेड के अस्पताल में विकसित किया गया है, ताकि अधिक से अधिक नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं समय पर मिल सकें। कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वंशजों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वन अधिकार पट्टों का वितरण केवल कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि इतिहास के ऋण से मुक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सोनभद्र के लिए आज 532 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं, जनजातीय समुदाय के लिए चलाई जा रही शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को उन्होंने समग्र विकास के रोडमैप का हिस्सा बताया। 

कार्यक्रम में लोकार्पित प्रमुख परियोजनाएं-घोरावल-शिल्पी-कोड़ारी मार्ग स्थित सोन नदी के कोलियां घाट पर सेतु, बलुई-मीतापुर मार्ग का चैड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, उरमौरा राजपुर रोड वाया बसौली-बहुआर-रघुनाथपुर-सिन्दूरी मार्ग का चैड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, 48वीं वाहिनी पीएसी में 200 व्यक्तियों की क्षमता वाली बैरक तथा पुलिस लाइन में 150 पुलिसकर्मियों हेतु हॉस्टल/बैरक निर्माण। जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई। जिला ग्राम्य विकास संस्थान का आवासीय/अनावासीय भवन, नवीन समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय, घोरावल-कोहरथा-शिवद्वार मार्ग का सुदृढ़ीकरण, नवसृजित तहसील ओबरा में आवासीय भवन, थाना जुगैल में टाइप-ए के 3 तथा टाइप-बी के 23 आवास, नगर पालिका परिषद सोनभद्र में कल्याण मंडप इत्यादि।

  कार्यक्रम के दौरान समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव गोंड ने मुख्यमंत्री को जनजातीय समाज की पहचान ‘तीर-धनुष’, वाद्य यंत्र ‘मांदर’ और पारंपरिक टोपी भेंट की। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सदस्य विधान परिषद चैधरी भूपेन्द्र सिंह, प्रभारी मंत्री रविन्द्र जायसवाल, समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। 

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