मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान-ग्रेटर नोएडा की 10वीं शासी निकाय की बैठक संपन्न

लखनऊः मुख्य सचिव एस.पी.गोयल की अध्यक्षता में राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान-ग्रेटर नोएडा की 10वीं शासी निकाय की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कई महत्वपूर्ण एजेंडा पर चर्चा की गई और उन्हें मंजूरी दी गई।
          बैठक में तेजी से बढ़ती मांग और गुणवत्तापूर्ण देखभाल में सुधार, उन्नत निदान और उपचार सुविधाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए संस्थान के उन्नयन के प्रस्ताव को अनुमोदन प्रदान किया गया, जिसमें उन्नत बुनियादी ढांचे का निर्माण एवं क्षमता वृद्धि शामिल है। इसी क्रम में मेडिकल कॉलेज परियोजना के अंतर्गत ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएनआईडीए) द्वारा गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) आवंटित 56 एकड़ भूमि पर मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज और पैरामेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए दूसरे चरण की राशि आवंटित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई।
          संस्थान में यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, पीडियाट्रिक सर्जरी, क्रिटिकल केयर मेडिसिन, कार्डियोलॉजी, मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और न्यूरोसर्जरी में सुपरस्पेशलिटी पाठ्यक्रम (डीएम/एमसीएच/डीआरएनबी) तथा नियोनेटोलॉजी, पेन मेडिसिन, रीजनल एनेस्थीसिया, डेंटल सर्जरी और क्रिटिकल केयर में फेलोशिप शुरू किया जाएगा तथा राष्ट्रीय आपातकालीन जीवन रक्षक (एनईएलएस) प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा, जिसकी सैद्धांतिक मंजूरी शासी निकाय की बैठक में प्रदान की गई। इसी क्रम में स्वास्थ्य देखभाल कौशल विकास पाठ्यक्रमों के लिए जीआईएमएस विद्या सेतु (कौशल शिक्षा प्रशिक्षण इकाई) शुरू करने के प्रस्ताव को अनुमोदन प्रदान किया गया, जिसमें गहन देखभाल और मैकेनिकल वेंटिलेशन में प्राथमिक प्रतिक्रिया – देखभाल प्रशिक्षण (प्राइम-केयर) और नर्सिंग मॉड्यूल शामिल है।
          जीआईएमएस द्वारा संस्थान का 10 वर्षीय विजन प्रस्तुत किया गया और सैद्धांतिक रूप से स्वीकृत किया गया तथा कार्यान्वयन हेतु एक रोडमैप तैयार करने के निर्देश मुख्य सचिव द्वारा दिए गए। संस्थान के दीर्घकालिक विजन के तहत, जीआईएमएस का लक्ष्य एसजीपीजीआई, लखनऊ की तर्ज पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक प्रमुख तृतीयक देखभाल और सुपर-स्पेशलिटी शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।
         अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष ने रोबोटिक सर्जरी, उच्चस्तरीय निदान और सटीक चिकित्सा जैसी उन्नत रोगी देखभाल सुविधाएँ प्रदान करने के लिए पहल करने का सुझाव दिया। एसजीपीजीआई के समान पश्चिमी यूपी में चिकित्सा केंद्र को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
          इससे पूर्व, जीआईएमएस के निदेशक डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश के गुप्ता ने बताया कि राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश सरकार का एक स्वायत्त तृतीयक स्वास्थ्य सेवा संस्थान है, जिसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना है और इसे उत्कृष्ट व्यावसायिक चिकित्सा शिक्षा और बहु-विषयक अनुसंधान प्रदान करने में अग्रणी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
          उन्होंने संस्थान की गतिविधियों, रोगी देखभाल सेवाओं, शैक्षणिक और अनुसंधान पहलों, उपलब्धियों और जीआईएमएस के भविष्य के दृष्टिकोण का एक व्यापक अवलोकन प्रस्तुत किया।  उन्होंने बताया कि संस्थान ने एमबीबीएस (2019), डीएनबी (2020), नर्सिंग कॉलेज (2021), पैरामेडिकल विज्ञान संस्थान (2021) और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (एमडी/एमएस) (2024) शुरू किए हैं। जीआईएमएस द्वारा अल्प समय में की गई उल्लेखनीय प्रगति, विशेष रूप से एनएबीएच और एनएबीएल मान्यता प्राप्त करने के लिए मुख्य सचिव और सभी सदस्यों द्वारा सराहना की गई।
          बैठक में सचिव चिकित्सा शिक्षा और डीजीएमई अपर्णा यू., विशेष सचिव वित्त समीर कुमार, पीजीआईसीएच नोएडा के निदेशक डॉ ए. के. सिंह, लेफ्टिनेंट पूर्व कुलपति केजीएमयू लखनऊ जनरल डॉ बिपिन पुरी, सलाहकार पल्मोनरी विभाग बैंगलोर लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) बीएनबीएम प्रसाद सहित अन्य सदस्यों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

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