सचेत नहीं रहेंगे तो वैश्विक पटल पर पिछड़ जाएगी हिंदी- प्रदीप सारंग

बौधायन ग्रन्थ एवं भिखारी ठाकुर का साहित्य भोजपुरी का गर्व है- डॉ संतोष पटेल
उपराष्ट्रपति माननीय सीपी राधाकृष्णन ने तृतीय अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन का शुक्रवार को शुभारम्भ किया। भिन्न विषयक अनेक सत्रों का आयोजन किया गया। वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष अनिल जोशी को विशेष आभार।
दिल्ली। भारत में सह-भाषाओं के आंदोलन में उभार अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र का हिस्सा है। सचेत नहीं रहेंगे तो वैश्विक परिदृश्य पर हिंदी पिछड़ जाएगी। उक्त विचार अवधी-विद्वान प्रदीप सारंग ने दिल्ली स्थित इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय लोककला केंद्र में सम्पन्न हो रहे तृतीय अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन के प्रथम दिवस के द्वितीय सत्र में आयोजित भारत की सह भाषाएं: नए परिप्रेक्ष्य, विषयक संगोष्ठी में व्यक्त किये। श्री सारंग ने यह भी कहा कि हिंदी के समानांतर सभी विधाओं में अवधी साहित्य सृजित हो रहा है और जबतक मर्यादा पुरुषोत्तम राम, तुलसीकृत रामचरित मानस, हनुमान चालीसा तथा भारत रहेगा तब तक बुलंद रहेगा अवधी का झंडा।
अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय हिंदी संस्थान की पूर्व निदेशक प्रो बीना शर्मा ने कहा कि सह भाषाएं जितनी समृद्ध होंगी हिंदी भी उतनी ही अधिक समृद्ध होती जाएगी।
अपने संबोधन में समालोचक भोजपुरी भाषा एक्टिविस्ट डॉ संतोष पटेल संपादक भोजपुरी जिंदगी ने कहा कि बौधायन की रचना भोजपुरी का गर्व है। श्री पटेल ने यह भी कहा कि भोजपुरी परिवार की भाषा है लोकजीवन की भाषा है इसलिए खुलापन होना स्वाभाविक है। ब्रज-विदुषी अर्चना चतुर्वेदी ने कहा कि एक समय था जब ब्रज में लिखने को साहित्यकार लालायित रहते थे। कालांतर में भक्ति भाव की भाषा मान लिया गया और बहुतायत में सिर्फ भक्ति साहित्य सृजित हुआ, यह भूल थी। अब नए दौर में लोकजीवन की कथा-व्यथा को विषय बनाना चाहिए। जीएसटी उपायुक्त, साहित्यकार डॉ संध्या सिलावट के सफल संचालन में सम्पन्न अंतरराष्ट्रीय सत्र में सत्र-संयोजक साहित्य-सप्तक के सह सम्पादक मजोज श्रीवास्तव अनाम ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

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