पांच साल बाद भी अपहृत बेटी का सुराग नहीं, हाईकोर्ट ने पुलिस को किया तलब

सोनभद्र। बेटी बचाओ का नारा देने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की पुलिस पांच वर्ष पूर्व अपहरण की गई बेटी को अब तक बरामद नहीं कर सकी है। मामले को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोनभद्र के रॉबटसगंज कोतवाल और क्षेत्राधिकारी को तलब किया है। न्यायालय के समक्ष पुलिस अधिकारियों ने एसआईटी गठित कर अपहृता की बरामदगी का भरोसा दिलाते हुए समय की मांग की है।

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मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।एडवोकेट विकास शाक्य ने बताया कि 16 फरवरी 2020 को भाटौलिया तेंदू निवासी धर्मशीला मौर्य की 19 वर्षीय बेटी घर से निकलने के बाद वापस नहीं लौटी। इस पर थाना रॉबटसगंज में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। बाद में परिजनों को जानकारी मिली कि वंशराज और वीरेश कुमार यादव उर्फ मोहन यादव स्कॉर्पियो से जबरन बैठाकर उसे ले गए हैं, लेकिन पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया।लगातार प्रयासों के बाद तीन वर्ष पश्चात 6 अगस्त 2023 को मुकदमा अपराध संख्या 474/2023 धारा 366 भादवि के तहत दर्ज किया गया। पुलिस ने बिना अपहृता की बरामदगी किए मात्र तीन माह में चार्जशीट दाखिल कर दी। दोनों आरोपी गिरफ्तार हुए, लेकिन वर्तमान में जमानत पर बाहर हैं।

अपहृता की मां द्वारा मुकदमे की पैरवी किए जाने पर उसके ऊपर कई बार हमले किए गए, जिसके संबंध में अपराध संख्या 666/2025 दर्ज है। इसके बावजूद पुलिस ने कोई प्रभावी सुरक्षा नहीं दी। सीएडब्ल्यू अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा भी पुलिस अधीक्षक को टीम गठित करने का आदेश दिया गया था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

इसके बाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संतोष दुबे ने मामला उच्च न्यायालय में उठाया, जहां पुलिस अधिकारियों को तलब किया गया। एडवोकेट विकास शाक्य ने आरोप लगाया कि सोनभद्र पुलिस का रवैया अमीरी-गरीबी देखकर बदल जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अपहृता की मां के साथ कोई गंभीर घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सोनभद्र पुलिस की होगी। पीड़ित परिवार की उम्मीद अब 24 फरवरी को उच्च न्यायालय के आदेश पर टिकी है।

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