सोनभद्र। जिलाधिकारी बी.एन. सिंह ने कहा कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज देश की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक है। हर नागरिक के मन में तिरंगे के प्रति प्रेम, सम्मान और निष्ठा का विशेष स्थान है।भारतीय झंडा संहिता 2002 में संशोधन के बाद अब हाथ से बने या मशीन से निर्मित सूती, पॉलिएस्टर, ऊनी, सिल्क या खादी कपड़े से राष्ट्रीय ध्वज बनाया जा सकता है। कोई भी नागरिक, संस्था या गैर-सरकारी संगठन सभी अवसरों पर ध्वज फहरा सकता है, बशर्ते उसकी मर्यादा और सम्मान बना रहे।झंडे की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 होना चाहिए। फटा या मैला झंडा प्रदर्शित नहीं किया जाए। एक ही ध्वज-दंड पर अन्य झंडों के साथ राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जा सकता। निर्धारित गणमान्य व्यक्तियों को ही वाहन पर राष्ट्रीय ध्वज लगाने की अनुमति है। विस्तृत जानकारी गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।


गांव गिराँव हिंदी न्यूज़ पोर्टल पर आप – Latest Breaking News, देश, विदेश, खेल, मनोरंजन, राजनीति, क्राइम, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, लाइफस्टाइल, क्रिकेट से सम्बंधित सभी समाचार प्राप्त करते है।
