खनन पट्टा धारकों ने डीएम से की मुलाकात

ओबरा/ क्रशर व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों ने अपनी प्रमुख समस्याओं को लेकर शनिवार को जिलाधिकारी  से मुलाकात की। ‘डाला-बिल्ली क्रशर ओनर्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने DM को अपनी 13 मुख्य मांगों का ज्ञापन सौंपा। कारोबारियों ने विस्तार से बताया कि खनन क्षेत्र में कई गंभीर रुकावटें हैं, जिसके कारण लंबे समय से खदानें बंद पड़ी हैं, इसलिए उन्होंने जोर देकर कहा कि जिन पट्टों को नियमों या सुरक्षा कारणों से रोका गया है, उन्हें सभी मानकों का पालन करवाते हुए तुरंत फिर से शुरू किया जाए।

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उनकी सबसे बड़ी मांग यह थी कि आम जनता को सस्ते दाम पर गिट्टी-बालू उपलब्ध कराने और खनिज क्षेत्र के विकास में तेजी लाने के लिए छोटे खनन पट्टों को ऑनलाइन टेंडर की जटिल प्रक्रिया से बाहर रखा जाए। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की कि क्रशर और खनन जैसे व्यवसायों को ‘लघु उद्योग’ का दर्जा दिया जाए, ताकि वे प्रदूषण नियंत्रण विभाग के सख्त और बड़े नियमों से थोड़ी छूट पा सकें। कारोबारियों ने DM से अपील की कि किसानों की निजी जमीनों के बीच आने वाली छोटी-छोटी सरकारी जमीनों को एक साथ जोड़कर बड़े खनन पट्टे की मंजूरी दी जाए, क्योंकि इससे निर्माण कार्यों जैसे सड़क और पुल निर्माण के लिए जरूरी पत्थर और गिट्टी का उत्पादन बढ़ेगा। उन्होंने प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने की भी मांग की, जिसमें वन विभाग से पेड़ों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र NOC देने की समय सीमा तय करने और CTO संचालन सहमति जैसे कार्यों को लखनऊ के बजाय क्षेत्रीय कार्यालय से ही पूरा करने की बात प्रमुख थी।

व्यापारियों ने जिलाधिकारी को बताया कि खदानें बंद होने से केवल उनका व्यापार ही नहीं, बल्कि हजारों मजदूरों का रोजगार भी छिन गया है, और उनका उद्देश्य सिर्फ व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास और निर्माण कार्यों के लिए जरूरी सामग्री की आपूर्ति बनाए रखना है। इस पर जिलाधिकारी ने सभी कारोबारियों की बातों को गंभीरता से सुना और उन्हें भरोसा दिलाया कि इन सभी 13 जरूरी मुद्दों को जल्द ही सरकार के उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और समाधान निकालने की पूरी कोशिश की जाएगी। इस मौके पर अभिषेक सिंह, अयोध्या दूबे, उस्मान अली, चंद्रभूषण गुप्ता सहित खनन से जुड़े कई बड़े कारोबारी मौजूद थे।

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