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(युगपुरुष अटल बिहारी वाजपेयी जी की 101वीं जयंती 25 दिसम्बर 2025 पर विशेष कविता) भारत माँ का सपूत अटल, हिमालय-सा ऊँचा भाल, जनता के मन का प्रधानमंत्री, जन-जन का रखवाला लाल। सत्ता नहीं, सेवा थी जीवन, राजनीति बनी साधना, सरल, संवेदनशील व्यक्तित्व, जिसमें बसती थी करुणा। अविवाहित तन, पर भारत था उनका विस्तृत परिवार, करोड़ों युवा-बालक बने उनके स्नेह के अधिकार। संघ-शाखा से संसद तक, निष्ठा का उजला पथ, विचारों की लौ जलाए रखी हर संघर्ष, हर यथार्थ-सथ। कवि की वाणी, ओज के शब्द, संसद में गूँज उठे, तर्क और मर्यादा के आगे विपक्ष भी झुक उठे। पोखरण में शक्ति…
