नई दिल्ली । भारतीय रेल नेटवर्क पर ‘कवच’ ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम के क्रियान्वयन की प्रगति को लेकर संसद में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ‘कवच’ एक अत्यंत उन्नत और जटिल स्वदेशी संरक्षा प्रणाली है, जिसमें पाँच प्रमुख उप-प्रणालियों का समन्वित संचालन शामिल है। इनमें ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क, दूरसंचार टावर, स्टेशन डेटा सेंटर, ट्रैकसाइड उपकरण तथा लोकोमोटिव में स्थापित ऑनबोर्ड सिस्टम शामिल हैं।

रेल मंत्री ने जानकारी दी कि इस दिशा में भारतीय रेल द्वारा उल्लेखनीय प्रगति की जा चुकी है। अब तक 8,570 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी है, लगभग 1,100 दूरसंचार टावर स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 767 स्टेशनों पर स्टेशन डेटा सेंटर स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 6,776 किलोमीटर रेलमार्ग पर ट्रैकसाइड उपकरण तैनात किए जा चुके हैं तथा 4,154 किलोमीटर के दायरे में आने वाले लोकोमोटिवों में कवच प्रणाली स्थापित की जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि कवच प्रणाली के अंतिम डिज़ाइन को जुलाई 2024 में स्वीकृति प्राप्त हुई, जो व्यापक अनुसंधान, विकास और परीक्षण की लंबी प्रक्रिया के बाद संभव हो सका।
रेल मंत्री ने कहा कि इस प्रकार की अत्याधुनिक संरक्षा तकनीक आदर्श रूप से कई दशक पहले लागू हो जानी चाहिए थी, किंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद इस दिशा में तेजी से ठोस पहल की गई। उन्होंने बताया कि कवच का विकास वर्ष 2016 में प्रारंभ हुआ, इसका पहला संस्करण 2019 में लॉन्च किया गया और अब इसके विस्तार का कार्य तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कवच प्रणाली के क्रियान्वयन की वर्तमान गति को वैश्विक स्तर पर भी सराहा जा रहा है, जो भारतीय रेल की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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