धनबाद। मानव संसाधन निदेशालय के तत्वावधान में ‘सेवा संकल्प’ प्रस्ताव के क्रियान्वयन एवं मानव संसाधन की भूमिका के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक हाइब्रिड मोड (ऑफलाइन एवं ऑनलाइन) में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता निदेशक (मानव संसाधन) मुरली कृष्ण रमैया ने की। इस अवसर पर निदेशालय के अंतर्गत सभी महाप्रबंधक/विभागाध्यक्ष, सभी क्षेत्रीय प्रबंधक (मानव संसाधन) एवं उनकी टीम के सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें से कुछ अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से तथा अन्य अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। बैठक का उद्देश्य दिनांक 24 फरवरी 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अंगीकृत “सेवा संकल्प प्रस्ताव” की अवधारणा को प्रसारित करना तथा उसके अनुरूप मानव संसाधन विभाग द्वारा किए जाने वाले संरेखित (Alignment) कार्यों की रूपरेखा तय करना था। यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर में स्थानांतरण के साथ-साथ भावी सुशासन की दृष्टि को रेखांकित करता है।

बैठक में “सेवा संकल्प प्रस्ताव बनाम एचआर एक्शन” के अंतर्गत एक एलाइन्मेंट मैट्रिक्स प्रस्तुत किया गया, जिसमें प्रमुख नीतिगत उद्देश्यों एवं उनके अनुरूप एचआर की रणनीतिक हस्तक्षेपों पर विस्तार से चर्चा की गई।‘सेवा तीर्थ’ की अवधारणा: यह नाम भौतिक उत्कृष्टता के साथ गहरे मानवीय मूल्यों का समन्वय है, जो कार्यालय को सेवा की एक “पवित्र यात्रा” के रूप में परिभाषित करता है।‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ (अर्थव्यवस्था): सुधारों की तीव्र गति के माध्यम से भारत को निकट भविष्य में विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाने का संकल्प।‘नागरिक देवो भव’: पारदर्शी, संवेदनशील एवं नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था, जिसमें प्रत्येक नागरिक को सर्वोच्च मानते हुए कार्य किया जाए।सामाजिक कल्याण उपलब्धियां: 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना, 80 करोड़ नागरिकों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना तथा 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण।‘विकसित भारत 2047’: भारत को एक विकसित एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र में परिवर्तित करने की प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि।‘कार्मिक मंदिर’ की अवधारणा: ‘सेवा भाव’ के साथ उत्कृष्ट कॉरपोरेट संस्कृति का निर्माण करते हुए कार्यालयों को स्वच्छ, हरित, सुलभ एवं अहंकार-मुक्त कार्यस्थल के रूप में विकसित करना‘परफॉर्म एक्सप्रेस’ (रूपांतरण): व्यक्तिगत प्रदर्शन को प्रोत्साहित करना, कार्यात्मक क्षमताओं की पहचान, सुधार के क्षेत्रों का निर्धारण, बेहतर तैनाती योजना, औद्योगिक संबंधों को सुदृढ़ करना तथा प्रशासनिक पारदर्शिता व त्रुटि-न्यूनता सुनिश्चित करना।‘कस्टमर देवो भव’: कर्मचारी-केंद्रित सेवाओं का पुनर्जीवन करते हुए कर्मचारी संतुष्टि, खुशी, प्रेरणा एवं सेवा-गुणवत्ता को बढ़ावा देना।प्रभावी कॉरपोरेट गवर्नेंस: सीएसआर एवं कल्याण/सीडी संबंधी गतिविधियों की पहचान, प्राथमिकता निर्धारण एवं प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय—ट्रिपल बॉटम लाइन सिद्धांतों का अनुपालन।‘विकसित कंपनी’ का रोडमैप: प्रतिभाओं की पहचान, उत्तराधिकार योजना (Succession Planning), ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण एवं ‘लर्निंग बाय डूइंग’ के माध्यम से भावी एचआर पेशेवरों को तैयार करना, जिससे उत्पादकता एवं दक्षता में वृद्धि हो।
बैठक के समापन पर निदेशक (मानव संसाधन) ने सभी अधिकारियों से आह्वान किया कि वे ‘सेवा संकल्प’ की भावना को आत्मसात करते हुए समन्वित प्रयासों द्वारा एक “विकसित कंपनी” के निर्माण में योगदान दें, जिससे “विकसित भारत 2047” के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में सार्थक भूमिका निभाई जा सके।
आइए, हम सब मिलकर एक विकसित भारत के लिए विकसित कंपनी का निर्माण करें।

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