नादयात्रा (मासिक सांगीतिक शृंखला)*

वाराणसी काशी के सुरमयी माहात्म्य में संगीत के नाद-निनाद का जो महत्त्व है वही काशी के शिवत्व की अभिव्यक्ति है। इसी संकल्पना की अभिव्यक्ति के अनुरूप इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र द्वारा संस्कार भारती, काशी महानगर के सहयोग से दिनांक 6 जनवरी, 2026 को संस्कार भारती के संस्थापक पद्मश्री माननीय योगेन्द्र जी जन्मतिथि की पूर्व संध्या पर उनकी स्मृति में नादयात्रा शृंखला के अन्तर्गत शास्त्रीय संगीत आधारित संगीतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस सांगीतिक समारोह के मुख्य अतिथि भारतवर्ष के सुप्रतिष्ठित जी०आई० टैग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ० रजनीकांत, महासचिव, ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन, वाराणसी थे।

उक्त कार्यक्रम के मुख्य प्रस्तुतिकार के रूप में सुप्रसिद्ध सोप्रनो सैक्सोफोन वादक श्री फिल स्कार्फ एवं युवा कलाकार आल्टो सैक्सोफोन वादक श्री प्रियंक कृष्ण के साथ संगत कलाकार के रूप में तबले पर पं० अनूप बैनर्जी उपस्थित थे। सर्वप्रथम कला केन्द्र की परम्परानुसार, कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से हुई जिसे श्री वृहस्पति पांडेय के प्रस्तुत किया। तत्पश्चात्, क्षेत्रीय निदेशक डॉ० अभिजित् दीक्षित ने अतिथियों का वाचिक स्वागत एवं अभिनन्दन करते हुये उन्होंने नादयात्रा के प्रकल्प को व्याख्यायित किया एवं लगातार 40 उपक्रमों से आयोजित होने वाले इस सांगीतिक कार्यक्रम का ध्येय काशी की समृद्ध संगीत परंपरा का संयोजन है एवं यहाँ सुविख्यात गुरु-शिष्य परंपरा का संरक्षण-संवर्धन करना है। उन्होंने कलापारखी, कलासाधक, कलामर्मज्ञ बाबा योगेन्द्र जी का स्मरण करते हुये तपःभूत कर्मयोगी को अपनी अशेष प्रणामाञ्जलि अर्पित की। उन्होंने कलाकारों का परिचय करते हुये उनका स्वागत किया।

इसके उपरान्त कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ० रजनीकांत ने कला साधना में जी०आई० टैग के महत्त्व एवं प्रमुख कार्यों के विषयों को प्रकाशित करते हुये कलाप्रेमियों को उसमें सहयोग करने की अपील की। इसके उपरान्त डॉ० राकेश कुमार, संगीत एवं मंचकला संकाय, बीएचयू, वाराणसी ने अपने सांगीतिक वक्तव्य में मुख्यतः कलासाधक माननीय योगेन्द्र जी के योगदान का स्मरण किया। तत्पश्चात् मुख्य कार्यक्रम में राग भीम पलाशी के साथ इस सांगीतिक कार्यक्रम की शुरुआत हुयी जिसमें प्रथम प्रस्तुति श्री प्रियंक कृष्ण ने दी। कार्यक्रम की मुख्य प्रस्तुति श्री फिल स्कार्फ ने देते हुये प्रमुख भजन वैष्णव जन ते के साथ इसका समापन किया। अंत में संस्कार भारती के अध्यक्ष डॉ. रामवीर शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया तथा इस कार्यक्रम का संचालन श्री रजनीकांत त्रिपाठी ने किया। इस कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में काशी के संगीत प्रेमी तथा बीएचयू के संगीत विभाग के प्राचार्य एवं शोधार्थी उपस्थित थे।
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यस्य निःश्वसितं वेदा यो वेदेभ्योऽखिलं जगत् ।निर्ममे तमहं वन्दे विद्यातीर्थमहेश्वरम् ॥

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