हिण्डाल्को द्वारा किसानों को कराया गया आई. आई. व्ही. आर. वाराणसी का शैक्षणिक भ्रमण

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 रेणुकूट। हिण्डाल्को रेणुकूट के क्लस्टर हेड  समीर नायक के निर्देशन एवं कलस्टर हेड, एचआर,  जसबीर सिंह के मार्गदर्शन एवं सीएसआर प्रमुख  अनिल झा के नेतृत्व में क्षेत्र के किसानों के विकास हेतु विभिन्न प्रकार की योजनाएं एवं कार्यक्रम सीएसआर के अंर्तगत आयोजित किये जा रहे हैं।

इसी क्रम में हिण्डाल्को के सी.एस.आर. विभाग द्वारा दुद्धी, म्योरपुर एवं बभनी के 25 किसानों का भारतीय सब्जी अनुसंधान केन्द्र (आई.आई. व्ही. आर.), वाराणसी में शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। गौरतलब है कि भारतीय सब्जी अनुसंधान केन्द्र, वाराणसी देश के प्रमुख अनुसंधान केन्द्रों में से एक है जो सब्जी के क्षेत्र में किये जा रहे नवीन अनुसंधान हेतु प्रसिद्ध है। आई.आई. व्ही. आर. वाराणसी में जनजातीय उपयोजना (टीएसपी) के अंतर्गत एक दिवसीय किसान शैक्षणिक भ्रमण में 25 किसानों ने भाग लेकर संस्थान की अत्याधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों एवं अनुसंधान से सीधा परिचय प्राप्त किया।

यह कृषक शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम आई. आई. व्ही. आर. के निदेशक डॉ. राजेश कुमार तथा कार्यक्रम समन्वयक एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नीरज सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस दौरान किसानों ने संस्थान के प्रायोगिक खेतों, स्वचालित एवं वातावरण नियंत्रित पॉली हाऊस, प्रयोगशालाओं एवं विभिन्न प्रदर्षन इकाइयों का अवलोकन किया।

भ्रमण के दौरान संस्थान द्वारा किसानों को विकसित, नवीन एवं उन्नत कृषि तकनीकियों से अवगत कराया गया। उन्होंने ब्रिमेटो, पोमेटो, ग्राफ्टेड मिर्च एवं टमाटर जैसी नवीन प्रकार की सब्जियों के साथ-साथ मिर्च, बैंगन, मूली एवं विंग्ड बीन की उच्च उपज वाली किस्मों को प्रत्यक्ष रूप से देखा। साथ ही, हाइड्रोपोनिक खेती, जैविक खेती मॉडल, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, वर्मी कम्पोस्ट तथा नाडेप कम्पोस्ट निर्माण जैसी सहायक गतिविधियों की विस्तृत जानकारी तकनीकी अधिकारी अजय कुमार यादव द्वारा दी गयी। तकनीकी सत्र के दौरान प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नीरज सिंह ने किसानों को संस्थान की उन्नत तकनीकों को अपनाकर सफल कृषि उद्यमी बनने तथा पोषण सुरक्षा में योगदान देने का अह्वान किया। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुदर्शन मौर्य ने सब्जी उत्पादन की आधुनिक विधियों, बाजार रणनीतियों एवं संभावित चुनौतियों के बारे में विस्तृत व्याख्यान दिया तथा मशरूम उत्पादन की उन्न्त तकनीकों पर चर्चा की। इस अवसर पर प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विकास सिंह भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के समापन पर सभी 25 किसानों को एक विशेष प्रोत्साहन किट प्रदान की गई। इस किट में संस्थान द्वारा विकसित लोबिया की “काशी विशान”, नेनुआ की “काशी श्रेया”, लौकी की “काशी गंगा”, भिंडी की “काशी लालिमा”, कोहड़ा की “काशी हरित” तथा तोरई की “काशी शिवानी” किस्मों के बीज शामिल थे, ताकि किसान खेती का लाभ अपने खेतों में उठा सकें। इसके अतिरिक्त अनुसूचित जनजाति के 50 अन्य किसानों हेतु सब्जी बीज किट भी प्रदान किये जिसे हिण्डाल्को सी.एस. आर. के माध्यम से क्षेत्र में किसानों को प्रदान किया जाएगा। इस शैक्षणिक भ्रमण का प्रमुख उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों के किसानों को नवीनतम् कृषि अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकियों से सीधे जोड़ना, उन्हें तकनीकी रूप से सशक्त बनाना तथा आत्मनिर्भर कृषि उद्यमी के रूप में विकसित करने में सहयोग देना था। हिण्डाल्को सी.एस. आर., रेनुकूट एवं आई. आई. व्ही. आर. वाराणसी का यह संयुक्त प्रयास ग्रामीण विकास एवं कृषि उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक पहल है। शैक्षणिक भ्रमण के दौरान हिण्डाल्को सीएसआर से  रमाकान्त शर्मा, अंकित द्विवेदी, ब्लॉक समन्वयक हरिहर प्रसाद यादव,  कृष्ण कुमार एवं  लालकेश कुशवाहा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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